‘रात एक बजे मैं उनपर चीख-चिल्ला रहा था’, सालों से किस बात की गलानी में अंदर ही अंदर घूंटते रहे मनोज वाजपेयी?

Last Updated:June 17, 2026, 17:41 IST
फिल्मी पर्दे पर ज्यादातर मौकों पर गंभीर रोल निभाने वाले अभिनेता मनोज वाजपेयी ने अपनी लाइफ की एक ऐसी कहानी बयां की है जो उनके रीयल कैरेक्टर को बयां करती है. मनोज वाजपेयी ने बताया कि वह कई साल से अपने अंदर एक बात दबाए थे, जिसकी उन्हें गलानी है. शेखर सुमन ने जब मनोज वाजपेयी के मन को कुरेदा तो वह भी खुद को रोक नहीं पाए. मनोज वाजपेयी ने बताया कि वह सालों से एक बात को लेकर अंदर ही अंदर घूंट रहे हैं. आइए जानते हैं मनोज वाजपेयी के सीने में दफन वह दर्द क्या है.मनोज वाजपेयी सालों से एक दर्द सीने में दबाए बैठे थे, उन्होंने शेखर सुमन के सामने उसे बयां कर दिया. तस्वीर साभार: Shekhar Tonite का स्क्रिनग्रैब.
मशहूर अभिनेता मनोज वाजपेयी की फिल्म ‘गवर्नर’ इन दिनों सुर्खियों में है. 25 करोड़ रुपये में बनकर तैयार हुई फिल्म ‘गवर्नर’ रिलीज के पांचवे दिन तक 5.26 करोड़ रुपये कमा पाई है, लेकिन थिएटर से जो भी लोग इस मूवी को देखकर निकल रहे हैं वह इसकी खूब तारीफ कर रहे हैं. खासकर मनोज वाजपेयी की आरबीआई के गवर्नर के रोल में उनको खूब पसंद किया जा रहा है. मनोज वाजपेयी ने हमेशा कि तरह एक बार फिर से अपनी ऐक्टिंग के दम पर दर्शकों का दिल जीत रहे हैं. आपको एक बात की हैरानी होगी कि फिल्मी पर्दे पर ज्यादातर मौकों पर सख्त इंसान का किरदार निभाने वाले मनोज वाजपेयी रीयल लाइफ में बेहद संवेदनशील हैं.
पिछले दिनों अभिनेता शेखर सुमन के नये शो शेखर टूनाइट में पहुंचे मनोज वाजपेयी ने अपनी लाइफ का एक ऐसा किस्सा बताया जो उनके रियल लाइफ के कैरेक्टर को बयां करता है. शेखर सुमन ने बताया कि वह पिछले कई साल से एक बात को लेकर गलानी फील कर रहे थे. शेखर सुमन ने जब उन्हें कन्फेशन करने का मौका दिया तो मनोज ने झट से दिल के किसी कोने में दब दर्द को बयां कर दिया.
मनोज वाजपेयी ने कहा- ‘एक बार मैं सुबह से शाम तक शूटिंग कर रहा था. मुझे करीब एक सुर में 20 लाइन का डायलॉग बोलना था. वो एक सीरियल का सीन था. उस वक्त एक कैमरामैन थे केके महाजन. वो अपने जमाने के बहुत बड़े कैमरामैन थे. रात को करीब एक बजे मुझे बोला गया कि आपका शॉट है. इतने लंबे इंतजार के बाद जब शॉट देने के लिए बुलाया गया तो तब तक मेरा मूड खराब हो चुका था. इतने समय के इंतजार के बाद मैं भन्नाया (नाराज) हुआ था, जितनी सारी लाइन की प्रैक्टिस की थी वो सब भूल गया था. डायलॉग बोलते वक्त मुझे वो लाइनें याद नहीं आ रहे थे, क्योंकि रात के एक बज चुके थे. जब भी कैमरा ऑन हो तो कभी पांच लाइन तो कभी सात लाइन के बाद, कभी आठ लाइन के बाद डायलॉग भूल जा रहा था.’
मनोज वाजपेयी ने आगे कहा- ‘इसपर अचानक केके महाजन चीखे. उन्होंने कहा कि कौन से ऐक्टर को लेकर आ गए हो. लेकर जाओ इसे और लाइन याद कराओ. जब वो मुझपर चीखे तो मैं भी उनपर चीख पड़ा. उधर से वो फिर से चीखे तो मैं लगातार चीखता रहा. मैं भूल चुका था कि सामने एक सीनियर आदमी, एक बुजुर्ग कैमरामैन हैं, मैंने सबके सामने उनकी बेइज्जती की. इस बात की गलानी मुझे हमेशा रही. जब तक मैंने सोचा कि उनसे मिलूंगा. कभी मिलकर उनसे बात करते हुए उनसे क्षमा मांगूंगा, तब तक वह गुजर गए. आज तक मुझे इस बात की गलानी है. यह कहने में मुझे कोई दिक्कत नहीं हो रही है, केवल पक्षतावा हो रहा है कि उनको कभी सॉरी नहीं बोल पाया.’
About the AuthorAbhishek Kumar
अभिषेक कुमार की डिजिटल टीम में बतौर एसोसिएट एडिटर काम कर रहे हैं. वे यहां बिहार, उत्तर प्रदेश, झारखंड, राजस्थान, मध्य प्रदेश, छत्तसीगढ़, उत्तराखंड की राजनीति, क्राइम समेत तमाम समसामयिक मुद्दों पर लिखते …और पढ़ें
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