Rajasthan

Munabao Railway Station | मुनाबाव रेलवे स्टेशन की बदहाली

Last Updated:May 06, 2026, 09:35 IST

Barmer News: बाड़मेर जिले में भारत-पाक सीमा पर स्थित देश का आखिरी रेलवे स्टेशन मुनाबाव इन दिनों बदहाली का शिकार है. 2019 में थार एक्सप्रेस बंद होने के बाद से यहां अंतरराष्ट्रीय सुविधाओं का अकाल पड़ गया है. भीषण गर्मी के बावजूद स्टेशन पर न तो पीने के पानी की व्यवस्था है और न ही पंखे चल रहे हैं. स्थानीय ग्रामीण और यात्री सुविधाओं के अभाव में परेशान हैं. कभी दो देशों को जोड़ने वाला यह महत्वपूर्ण स्टेशन आज रेलवे और प्रशासन की उपेक्षा के कारण अपनी पहचान खोता जा रहा है.

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बाड़मेर. भारत-पाक सीमा के अंतिम छोर पर स्थित मुनाबाव रेलवे स्टेशन कभी अंतरराष्ट्रीय सरहद को जोड़ता था. यहां से चलने वाली थार एक्सप्रेस ने वर्षों तक भारत-पाकिस्तान के लोगों को जोड़े रखा लेकिन आज हालात बिल्कुल उलट हैं. कभी चहल-पहल से भरा रहने वाला यह स्टेशन अब बदहाली और उपेक्षा का शिकार हो रहा है. अंतरराष्ट्रीय सीमा पर स्थित होने के बावजूद यहां बुनियादी सुविधाओं के लिए यात्रियों को तरसना पड़ रहा है.

एक समय था जब मुनाबाव अंतरराष्ट्रीय रेलवे स्टेशन पर भारी चहल-पहल रहती थी. पाकिस्तान से आने और जाने वाले यात्रियों की आवाजाही के कारण यहां सुरक्षा व्यवस्था, कस्टम और इमिग्रेशन जैसी आधुनिक सुविधाएं मौजूद थीं. प्लेटफॉर्म पर ठंडे पानी, पर्याप्त पंखे और साफ-सफाई की बेहतर व्यवस्था रहती थी. साल 2019 तक जब थार एक्सप्रेस का नियमित संचालन होता था, तब इस स्टेशन की रौनक देखते ही बनती थी. विदेशी और भारतीय यात्रियों की भारी भीड़ के कारण यह स्टेशन हमेशा जीवंत बना रहता था.

भीषण गर्मी में सुविधाओं का भारी अभाववर्तमान में राजस्थान की भीषण गर्मी में मुनाबाव रेलवे स्टेशन पर सुविधाओं का अभाव यात्रियों के लिए बड़ी परेशानी का सबब बन रहा है. यहां का आलम यह है कि अब पीने के पानी की समुचित व्यवस्था नहीं है. प्लेटफॉर्म पर लगे कई पंखे खराब और बंद पड़े हैं. तपती दुपहरी में यात्रियों को बिना हवा के बैठना पड़ता है. इतना ही नहीं, स्टेशन पर बनी टॉयलेट सुविधाएं भी अब बदहाल और अनुपयोगी हो गई हैं. अंतरराष्ट्रीय सीमा पर स्थित ऐसे महत्वपूर्ण स्टेशन की यह हालत प्रशासन की लापरवाही को दर्शाती है.

ग्रामीणों की मजबूरी बनी लोकल सवारी गाड़ियांमुनाबाव और आसपास के गांवों के लोग आज भी इसी स्टेशन पर निर्भर हैं. यहां से संचालित होने वाली साधारण सवारी गाड़ियां ही उनकी मुख्य यात्रा का साधन हैं. सुविधाओं की भारी कमी के कारण महिलाओं, बुजुर्गों और बच्चों को यात्रा के दौरान सबसे ज्यादा दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है. गर्मी के मौसम में स्टेशन पर घंटों ट्रेन का इंतजार करना किसी सजा से कम नहीं है. स्थानीय लोग लंबे समय से सुविधाओं को दुरुस्त करने की मांग कर रहे हैं.

थार एक्सप्रेस के पहिए थमने से पसरा सन्नाटाथार एक्सप्रेस फरवरी 2019 से बंद है. इस ट्रेन को दोनों देशों के बीच दोस्ती की सौगात और ‘रोटी-बेटी’ के रिश्ते को निभाने वाला जरिया माना जाता था. पुलवामा हमले के बाद भारत-पाक संबंधों में आए तनाव और सुरक्षा कारणों से इस इंटरनेशनल ट्रेन सेवा को अनिश्चितकाल के लिए रोक दिया गया था. 2019 से अब तक यह सेवा फिर शुरू नहीं हो पाई है, जिसके कारण मुनाबाव स्टेशन अब एक वीरान हिस्से की तरह नजर आता है.

About the Authorvicky Rathore

Vicky Rathore (born July 25, 1994) is a multimedia journalist and digital content specialist currently working with Rajasthan. I have over 8 years of experience in digital media, where I specialize in cr…और पढ़ें

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