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रिहर्सल देखने के शौक से लगा सिनेमा का चस्का, होटल मैनेजमेंट छोड़ थाम लिया कैमरा, पहली ही फिल्म ने जीता नेशनल अवॉर्ड

Last Updated:August 16, 2026, 23:55 IST

निशिकांत कामत उन फिल्मकारों में गिने जाते हैं, जिन्होंने बहुत कम समय में अपनी अलग पहचान बना ली थी. उनकी फिल्मों में आम लोगों की जिंदगी, उनकी परेशानियां और समाज की सच्चाई दिखाई देती थी. उन्होंने ‘डोम्बीवली फास्ट’, ‘मुंबई मेरी जान’, ‘फोर्स’, ‘दृश्यम’ और ‘मदारी’ जैसी फिल्मों के जरिए दर्शकों को अलग-अलग तरह की कहानियां दीं. आइए, निर्देशन की जयंती पर उनकी जिंदगी को थोड़ा और करीब से जानें.

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रिहर्सल देखने के शौक से लगा सिनेमा का चस्का, पहली ही मूवी ने जीता नेशनल अवॉर्डZoomनिशिकांत कामत की अनूठी जिंदगी

नई दिल्ली: निशिकांत कामत ने निर्देशन के साथ-साथ अभिनय में भी अपनी पहचान बनाई थी. उनके करियर की शुरुआत एक ऐसे मौके से हुई थी, जब वह सिर्फ शौक के लिए एक नाटक की रिहर्सल देखने पहुंचे थे और वहां खड़े-खड़े ही थिएटर का हिस्सा बन गए. निशिकांत कामत का जन्म 17 जून 1970 को महाराष्ट्र के दादर में हुआ था. वह एक मराठी परिवार से ताल्लुक रखते थे. पढ़ाई के दौरान ही उनकी दिलचस्पी फिल्मों और थिएटर में बढ़ने लगी थी. दिलचस्प बात यह है कि शुरुआत में उनका थिएटर में आने का कोई बड़ा सपना नहीं था. वह बस नाटक की रिहर्सल देखने पहुंचे थे. वहां निर्देशक ने उनसे पूछा कि क्या वह चार लड़कों के साथ खड़े हो सकते हैं, निशिकांत ने हां कह दिया. उन्हें शायद उस वक्त अंदाजा भी नहीं था कि उनका यह छोटा सा फैसला आगे चलकर उनकी पूरी जिंदगी बदल देगा.

होटल मैनेजमेंट की छोड़ी पढ़ाईनिशिकांत कामत को धीरे-धीरे थिएटर में काम करने में मजा आने लगा. मंच पर अभिनय करते हुए उनका फिल्मों के प्रति लगाव और बढ़ता गया. बाद में वह होटल मैनेजमेंट की पढ़ाई करने गोवा भी गए, लेकिन वहां पहुंचकर उन्हें महसूस हुआ कि उनका असली मन थिएटर और फिल्मों में ही है. इसके बाद उन्होंने फिल्म और टीवी की दुनिया में काम तलाशना शुरू किया. शुरुआत में उन्हें छोटे काम मिले, लेकिन उन्होंने हर काम से कुछ नया सीखने की कोशिश की.

22 साल की आयु में बने एडिटरनिशिकांत ने दूरदर्शन के एक मराठी सीरियल में असिस्टेंट के तौर पर काम शुरू किया. उनका काम एडिटर तक टेप पहुंचाना भी था. इसी दौरान वह एडिटिंग का काम ध्यान से देखने लगे और धीरे-धीरे उन्होंने इसे सीख लिया. इसका नतीजा यह हुआ कि महज 22 साल की उम्र में वह एडिटर बन गए. इसके बाद, उन्होंने करीब दो साल तक एडिटिंग की. 24 साल की उम्र में उन्हें टीवी निर्देशन का पहला मौका मिला. जिस व्यक्ति ने कभी सिर्फ रिहर्सल देखने के लिए थिएटर का रुख किया था, वह कुछ ही साल में कैमरे के पीछे खड़ा होकर कहानियां बनाने लगा. टीवी में करीब पांच-छह साल काम करने के बाद निशिकांत ने सीरियल बनाना छोड़ दिया. इसके बाद, उन्होंने स्क्रिप्ट लिखने का काम शुरू किया. फिल्म निर्देशक बनने से पहले उन्होंने लंबे समय तक इंडस्ट्री में अलग-अलग तरह के काम किए. इस दौरान उन्होंने संघर्ष भी देखा. कई बार उनके पास काम नहीं होता था, लेकिन उन्होंने फिल्मी दुनिया छोड़ने के बजाय सीखते रहना जारी रखा. इसी मेहनत ने उन्हें आगे चलकर अपनी पहली फिल्म बनाने का मौका दिया.

डेब्यू फिल्म के लिए जीता नेशनल अवॉर्डसाल 2005 में निशिकांत कामत ने मराठी फिल्म ‘डोम्बीवली फास्ट’ से निर्देशक के रूप में डेब्यू किया. फिल्म में आम आदमी के गुस्से और उसकी परेशानियों की कहानी दिखाई गई थी. फिल्म को दर्शकों और समीक्षकों ने काफी पसंद किया. ‘डोम्बीवली फास्ट’ उनके करियर के लिए बड़ी सफलता साबित हुई और इसे 2006 में मराठी की बेस्ट फीचर फिल्म का नेशनल अवॉर्ड भी मिला. पहली ही फिल्म से नेशनल अवॉर्ड हासिल करना उनके लिए बड़ी अचीवमेंट थी. इसके बाद, निशिकांत ने पीछे मुड़कर नहीं देखा. उन्होंने अपनी ही फिल्म ‘डोम्बीवली फास्ट’ का तमिल रीमेक ‘इवानो ओरुवन’ बनाया, जिसमें आर माधवन अहम भूमिका में थे. साल 2008 में उन्होंने हिंदी सिनेमा में कदम रखा और ‘मुंबई मेरी जान’ का निर्देशन किया. यह फिल्म 2006 के मुंबई ट्रेन धमाकों के बाद आम लोगों की जिंदगी पर पड़े असर को दिखाती थी. इसके बाद उन्होंने ‘फोर्स’ जैसी एक्शन फिल्म बनाई, जिसमें जॉन अब्राहम के साथ विद्युत जामवाल नजर आए. विद्युत ने इसी फिल्म से हिंदी सिनेमा में कदम रखा था.

कई फिल्मों में एक्टिंग भी कीसाल 2014 में निशिकांत ने मराठी फिल्म ‘लाय भारी’ का निर्देशन किया. इसके अगले साल 2015 में उनकी सबसे चर्चित फिल्मों में से एक ‘दृश्यम’ रिलीज हुई. अजय देवगन, तब्बू और श्रिया सरन की इस फिल्म ने दर्शकों के बीच जबरदस्त लोकप्रियता हासिल की. इसके बाद उन्होंने ‘रॉकी हैंडसम’ और ‘मदारी’ जैसी फिल्मों का निर्देशन किया. ‘रॉकी हैंडसम’ में उन्होंने खुद खलनायक का किरदार भी निभाया. निशिकांत सिर्फ निर्देशक ही नहीं बल्कि अभिनेता भी थे. वह ‘404’, ‘डैडी’, ‘जूली 2’ और ‘भावेश जोशी सुपरहीरो’ जैसी फिल्मों में नजर आए. उन्होंने अपने करियर में निर्देशन, लेखन और अभिनय तीनों क्षेत्रों में काम किया. उनकी आखिरी निर्देशित फिल्म ‘मदारी’ थी, जिसमें इरफान खान अहम भूमिका में थे. फिल्म में एक आम आदमी और भ्रष्ट व्यवस्था के बीच संघर्ष की कहानी दिखाई गई थी. निशिकांत कामत का निधन 17 अगस्त 2020 को 50 साल की उम्र में हुआ. वह लीवर की बीमारी से जूझ रहे थे और उनकी हालत गंभीर हो गई थी. बेहद कम उम्र में दुनिया छोड़ने के बावजूद उन्होंने अपने पीछे फिल्मों का ऐसा काम छोड़ा, जिसे आज भी याद किया जाता है.

About the AuthorAbhishek NagarSenior Sub Editor

अभिषेक नागर ‘न्यूज18 डिजिटल’ में सीनियर सब एडिटर के पद पर काम कर रहे हैं. दिल्ली के रहने वाले अभिषेक नागर ‘न्यूज18 डिजिटल’ की एंटरटेनमेंट टीम का हिस्सा हैं. उन्होंने एंटरटेनमेंट बीट के अलावा करियर, हेल्थ और…

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New Delhi,Delhi

First Published :

August 16, 2026, 23:55 IST

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