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bharatpur news I भरतपुर में खेती का बदला मिजाज, मूंगफली से किसानों ने बनाई दूरी, सरसों पर बढ़ा भरोसा

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50 साल में भरतपुर की खेती की तस्वीर, मूंगफली गायब और सरसों बनी किसानों की पसंद

Last Updated:August 09, 2026, 11:02 IST

भरतपुर में पिछले 50 वर्षों में खेती का स्वरूप तेजी से बदला है. कभी 22 हजार हेक्टेयर में होने वाली मूंगफली की खेती अब लगभग खत्म होने की कगार पर है, जबकि सरसों का रकबा बढ़कर 2.5 लाख हेक्टेयर से अधिक हो गया है. बढ़ती लागत, कीट-रोग और घटते मुनाफे से परेशान किसानों ने मूंगफली से दूरी बनाकर कम जोखिम और बेहतर मुनाफे वाली सरसों को अपनी पहली पसंद बना लिया.

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भरतपुर. जिले की खेती में पिछले 50 वर्षों में बड़ा बदलाव देखने को मिला है, एक समय था जब यहां करीब 22 हजार हेक्टेयर क्षेत्र में मूंगफली की फसल लहलहाती थी लेकिन आज हालात ऐसे हैं कि मूंगफली की खेती लगभग खत्म होने की कगार पर पहुंच चुकी है. इसके विपरीत सरसों ने किसानों की पहली पसंद बनकर खेती के नक्शे को पूरी तरह बदल दिया है. कृषि विभाग के आंकड़ों के अनुसार जहां पहले सरसों का रकबा करीब 53 हजार हेक्टेयर था वहीं अब यह बढ़कर 2.5 लाख हेक्टेयर से भी अधिक हो चुका है. यह बदलाव केवल फसल का नहीं बल्कि किसानों की सोच तकनीक और खेती के तरीके में आए परिवर्तन को भी दर्शाता है.

कृषि विभाग के अधिकारियों के मुताबिक मूंगफली की खेती में गिरावट के पीछे कई कारण जिम्मेदार हैं. कृषि विभाग के अधिकारी राधेश्याम मीणा ने लोकल 18 से बातचीत में बताया कि मूंगफली किसानों के लिए अब लाभ का सौदा नहीं रही. उत्पादन लागत बढ़ती जा रही थी जबकि मुनाफा लगातार घट रहा है. इसके साथ ही फसल में कीट-रोगों का प्रकोप भी तेजी से बढ़ा, जिसमें खास तौर पर लट नामक कीट ने भारी नुकसान पहुंचाया. यह कीट मूंगफली की फसल को जड़ से प्रभावित करता है और फल को पूरी तरह नष्ट कर देता है.

इन समस्याओं से परेशान होकर किसानों ने धीरे-धीरे मूंगफली की खेती से दूरी बना ली और विकल्प के रूप में सरसों की ओर रुख किया. सरसों की खेती में कम जोखिम बेहतर उत्पादन और बाजार में अच्छी कीमत मिलने से किसानों का भरोसा इस फसल पर बढ़ता गया. इसके अलावा बेहतर सिंचाई सुविधाएं नई कृषि तकनीकों का उपयोग और बदलते मौसम के अनुसार फसलों का चयन भी इस बदलाव के प्रमुख कारण रहे हैं. अब किसान पारंपरिक खेती की बजाय ऐसी फसलों को प्राथमिकता दे रहे हैं, जो कम लागत में अधिक लाभ दें. भरतपुर की खेती में यह बदलाव समय के साथ किसानों की समझदारी और परिस्थितियों के अनुसार लिए गए फैसलों का परिणाम है. हालांकि इस परिवर्तन ने पारंपरिक फसलों को पीछे जरूर धकेला है लेकिन किसानों की आर्थिक स्थिति को मजबूत करने में अहम भूमिका भी निभाई है.

About the AuthorMonali Paul

नमस्ते मेरा नाम मोनाली है, पेशे से पत्रकार हूं, ख़बरें लिखने का काम है. लेकिन कैमरे पर समाचार पढ़ना बेहद पसंद है. 2016 में पत्रकारिता में मास्टर्स करने के बाद पांच साल कैमरे पर न्यूज़ पढ़ने के साथ डेस्क पर खबरे…

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Bharatpur,Rajasthan

First Published :

August 09, 2026, 11:02 IST

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