बाड़मेर के गांवों में महिलाओं का कमाल, न मशीन, न फैक्ट्री… हाथों के हुनर से तैयार कर रहीं साड़ी-सूट

Last Updated:August 09, 2026, 07:56 IST
Rajasthan Traditional Handicrafts: बाड़मेर की तपती थार की रेत में महिलाओं के हाथों का हुनर अब पारंपरिक हस्तकला को नई पहचान दे रहा है. बदलते समय और बाजार की मांग के साथ यहां की हस्तकला में भी बड़ा बदलाव आया है. पहले जहां कारीगर छोटे और सीमित उत्पाद तैयार करते थे, वहीं अब साड़ी, बेडशीट, पिलो कवर, कुर्ता और सलवार-सूट जैसे उपयोगी उत्पाद भी तैयार किए जा रहे हैं. इन उत्पादों में बाड़मेर की पारंपरिक कला और स्थानीय डिजाइन की झलक साफ दिखाई देती है. खास बात यह है कि महिलाएं घर और गांव में रहकर घरेलू कामकाज के साथ इस हुनर को आगे बढ़ा रही हैं. खारा राठौड़ान की गुड्डी देवी बताती हैं कि कटाई और डिजाइन का काम बेहद मेहनत वाला है और कई बार लगातार काम करने से हाथों में छाले तक पड़ जाते हैं. इसके बावजूद महिलाएं अपने हुनर और परिवार की जरूरतों के लिए लगातार मेहनत कर रही हैं.
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बाड़मेर. थार की तपती रेत में जहां जिंदगी जीना आसान नहीं होता है, वहां की महिलाओं के हाथों का हुनर हजारों सपनों को आकार दे रहा है. कभी बाड़मेर की हस्तकला में गिने-चुने और छोटे उत्पाद ही तैयार होते थे, लेकिन समय के साथ इस कला ने ऐसी करवट ली है कि अब साड़ी, बेडशीट, पिलो कवर, कुर्ता, सलवार-सूट सहित कई उत्पाद तैयार किए जा रहे हैं. बाड़मेर की पारंपरिक हस्तकला अब बदलते बाजार के साथ नए रूप में लोगो को खूब रास आ रही है.
पहले जहां कारीगर छोटे और सीमित उत्पाद तैयार करते थे वहीं अब ग्राहकों की पसंद के अनुसार बड़े और उपयोगी उत्पाद बनाए जा रहे हैं. साड़ी हो या बेडशीट, पिलो कवर हो या कुर्ता-सलवार सूट हर उत्पाद में स्थानीय कला की झलक नजर आती है. सबसे खास बात यह है कि डिजाइन जितना आकर्षक नजर आता है, उसे तैयार करने के पीछे उतनी ही मेहनत छिपी होती है.
घर पर रहकर भी महिलाएं कर सकती हैं तैयार
महिलाएं इसे अपने घर और गांव में रहकर इसे तैयार कर सकती हैं. घरेलू कामकाज के बीच समय निकालकर वे हस्तकला तैयार करती हैं. बाड़मेर जिले के खारा राठौड़ान निवासी गुड्डी देवी बताती हैं कि कटाई और डिजाइन का काम बेहद मेहनत वाला होता है. लगातार काम करने से हाथों में छाले पड़ जाते हैं. कई बार घंटों तक एक ही डिजाइन पर मेहनत करनी पड़ती है लेकिन परिवार की जरूरतें और अपने हुनर को आगे बढ़ाने का जुनून उन्हें रुकने नहीं देता है.
बदलते समय के साथ बदली बाड़मेर की हस्तकला
समय के साथ लोगों की पसंद बदली तो बाड़मेर के कारीगरों ने भी अपनी कला को नए उत्पादों से जोड़ा है. यही वजह है कि पारंपरिक हस्तकला अब केवल सजावटी सामान तक सीमित नहीं रही है. महिला दस्तकार मगी बताती है कि पहले हम छोटे-छोटे सामान ही बनाते थे लेकिन अब साड़ी, बेडशीट, पिलो कवर, कुर्ता और सलवार-सूट जैसे कई उत्पाद तैयार करते हैं. इससे काम भी बढ़ा और हमारी कमाई का जरिया भी.About the Authorदीप रंजन सिंह Content Producer
दीपरंजन सिंह लगभग एक दशक से पत्रकारिता के फिल्ड से जुड़े हुए हैं. वह अभी न्यूज18 हिंदी के राजस्थान डिजिटल डेस्क से जुड़े हैं, जहां वे बतौर कंटेंट प्रोड्यूसर अपनी सेवाएं दे रहे हैं. पिछले लगभग एक दशक से सक्रिय पत…
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Barmer,Rajasthan
First Published :
August 09, 2026, 07:56 IST



