5 प्रसूताओं की मौत केस में बड़ा खुलासा, जांच में फेल मिली डिलीवरी की यह दवा, बिक्री पर रोक

Last Updated:July 08, 2026, 09:34 IST
Kota Maternal Death Case: कोटा के न्यू मेडिकल कॉलेज अस्पताल में प्रसूताओं की मौत के मामले की जांच में बड़ा खुलासा हुआ है. डिलीवरी के दौरान इस्तेमाल की गई डायनोप्रोस्टोन जेल का बैच नंबर H-084 गुणवत्ता जांच में फेल पाया गया है. ड्रग कंट्रोल विभाग ने 17 मई को इसका सैंपल लेकर जयपुर लैब भेजा था, जहां यह मानकों पर खरा नहीं उतरा. इसके बाद पूरे राजस्थान में इस बैच की बिक्री और वितरण पर तत्काल रोक लगा दी गई. विभाग ने कोटा के नयापुरा स्थित एमसीडीडब्ल्यू स्टोर से इसी बैच के 1117 पैकेट भी जब्त किए हैं. संबंधित निर्माता कंपनी के खिलाफ औषधि एवं प्रसाधन सामग्री अधिनियम के तहत कार्रवाई शुरू कर दी गई है. हालांकि अधिकारियों ने स्पष्ट किया है कि दवा और प्रसूताओं की मौत के बीच संबंध की पुष्टि अभी नहीं हुई है. मामले की जांच जारी है और अंतिम रिपोर्ट के बाद ही स्थिति स्पष्ट होगी.
ख़बरें फटाफट
कोटा के न्यू मेडिकल कॉलेज अस्पताल में प्रसूताओं की मौत के मामले की जांच में बड़ा खुलासा हुआ है
कोटा. राजस्थान के कोटा स्थित न्यू मेडिकल कॉलेज अस्पताल में प्रसूताओं की मौत के मामले में जांच के दौरान बड़ा खुलासा हुआ है. डिलीवरी के दौरान इस्तेमाल की गई डायनोप्रोस्टोन जेल का एक बैच गुणवत्ता जांच में फेल पाया गया है. इसके बाद ड्रग कंट्रोल विभाग ने पूरे राजस्थान में इस बैच की बिक्री और वितरण पर तत्काल रोक लगा दी है. हालांकि, अभी यह आधिकारिक रूप से नहीं कहा गया है कि इसी दवा की गुणवत्ता प्रसूताओं की मौत का कारण बनी. मामले की जांच अभी जारी है.
बताया जा रहा है कि ड्रग कंट्रोल विभाग ने 17 मई को कोटा के न्यू मेडिकल कॉलेज अस्पताल से डायनोप्रोस्टोन जेल के बैच नंबर H-084 का सैंपल लिया था. इस सैंपल को जांच के लिए जयपुर स्थित राज्य औषधि परीक्षण प्रयोगशाला भेजा गया. लैब की रिपोर्ट में यह बैच निर्धारित गुणवत्ता मानकों पर खरा नहीं उतरा. रिपोर्ट मिलने के बाद विभाग ने तत्काल कार्रवाई करते हुए पूरे प्रदेश में इस बैच की बिक्री और वितरण पर रोक लगाने के आदेश जारी कर दिए.
ड्रग कंट्रोल विभाग ने 1117 पैकेट किए जब्त
ड्रग कंट्रोल विभाग की टीम ने कार्रवाई करते हुए कोटा के नयापुरा स्थित एमसीडीडब्ल्यू स्टोर से इसी बैच के 1117 पैकेट जब्त कर लिए. विभाग के अधिकारियों का कहना है कि संबंधित निर्माता कंपनी के खिलाफ औषधि एवं प्रसाधन सामग्री अधिनियम के प्रावधानों के तहत वैधानिक कार्रवाई शुरू कर दी गई है. साथ ही यह भी पता लगाया जा रहा है कि यह बैच राज्य के किन-किन अस्पतालों और चिकित्सा संस्थानों तक पहुंचा था.
पांच प्रसूताओं की मौत के बाद मामला सूर्खियों में आया
यह मामला उस समय सुर्खियों में आया था, जब कोटा के न्यू मेडिकल कॉलेज अस्पताल में प्रसव के बाद पांच प्रसूताओं की मौत हो गई थी. इन मौतों के बाद स्वास्थ्य विभाग ने पूरे मामले की जांच शुरू कराई थी. प्रारंभिक जांच में इलाज की प्रक्रिया, दवाओं की गुणवत्ता, संक्रमण, चिकित्सकीय प्रोटोकॉल और अस्पताल की व्यवस्थाओं सहित कई पहलुओं को जांच के दायरे में रखा गया था. राज्य सरकार ने विशेषज्ञों की टीम गठित कर मामले की विस्तृत जांच के निर्देश दिए थे. अस्पताल प्रशासन से भी पूरे घटनाक्रम की रिपोर्ट मांगी गई थी.
प्रसव पीड़ा के लिए डायनोप्रोस्टोन जेल का होता है प्रयोग
जांच के दौरान यह भी सामने आया कि जिन प्रसूताओं की मौत हुई थी, उन्हें प्रसव प्रक्रिया के दौरान इसी बैच नंबर H-084 की डायनोप्रोस्टोन जेल दी गई थी. इसके बाद दवा का नमूना जांच के लिए भेजा गया था. अब लैब रिपोर्ट में बैच के गुणवत्ता परीक्षण में फेल होने के बाद जांच और अधिक महत्वपूर्ण हो गई है. डायनोप्रोस्टोन जेल का उपयोग प्रसव पीड़ा शुरू कराने और गर्भाशय ग्रीवा को प्रसव के लिए तैयार करने में किया जाता है. यह प्रसूति चिकित्सा में व्यापक रूप से इस्तेमाल होने वाली दवा है. ऐसे में इसके किसी बैच का गुणवत्ता परीक्षण में असफल होना स्वास्थ्य व्यवस्था के लिए गंभीर चिंता का विषय माना जा रहा है.
ड्रग कंट्रोल विभाग अलग-अलग स्तर पर कर रहे हैं जांच
फिलहाल स्वास्थ्य विभाग और ड्रग कंट्रोल विभाग पूरे मामले की अलग-अलग स्तर पर जांच कर रहे हैं. अधिकारियों का कहना है कि प्रसूताओं की मौत और दवा की गुणवत्ता के बीच किसी प्रत्यक्ष संबंध पर अंतिम निष्कर्ष जांच पूरी होने के बाद ही सामने आएगा. यदि जांच में किसी स्तर पर लापरवाही या नियमों के उल्लंघन की पुष्टि होती है, तो संबंधित व्यक्तियों और कंपनी के खिलाफ नियमानुसार सख्त कार्रवाई की जाएगी.
About the Authordeep ranjan
दीप रंजन सिंह 2016 से मीडिया में जुड़े हुए हैं. हिंदुस्तान, दैनिक भास्कर, ईटीवी भारत और डेलीहंट में अपनी सेवाएं दे चुके हैं. 2022 से हिंदी में अपनी सेवाएं दे रहे हैं. एजुकेशन, कृषि, राजनीति, खेल, लाइफस्ट…और पढ़ें
न्यूजलेटर
अब ईमेल पर इनसाइड स्टोरीज
खबरों के पीछे की खबर अब आपके इनबॉक्स में
सबमिट करें



