रेगिस्तान को हरा-भरा बनाएगा बीकानेर कृषि विश्वविद्यालय, तैयार होंगे हजारों ‘थार शोभा खेजड़ी’ के पौधे

Last Updated:June 18, 2026, 06:38 IST
SKRAU Thar Shobha Khejri Plantation: बीकानेर के स्वामी केशवानंद राजस्थान कृषि विश्वविद्यालय (SKRAU) ने मानसून से पहले बड़े पैमाने पर ‘थार शोभा खेजड़ी’ और अन्य फलदार पौधे तैयार करने का अभियान शुरू किया है. कुलगुरु डॉ. राजेंद्र बाबू दुबे ने सभी केवीके और अनुसंधान केंद्रों को गुणवत्तापूर्ण पौधे तैयार करने के निर्देश दिए हैं. थार शोभा खेजड़ी कम पानी और भीषण गर्मी में भी हरी-भरी रहती है और पशुओं के लिए पौष्टिक चारे (लूंग) का मुख्य स्रोत है. इसके साथ ही श्रीगंगानगर केंद्र में किन्नू और माल्टा के पौधे भी तैयार किए जाएंगे. पौधों की सुरक्षा के लिए एक विशेष मॉनिटरिंग सिस्टम भी बनाया जाएगा.
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रेगिस्तान को हरा-भरा करेगी ‘थार शोभा खेजड़ी’
Bikaner: मरुस्थलीय क्षेत्र में हरित आवरण बढ़ाने, जैव विविधता को समृद्ध करने और पर्यावरण संरक्षण को एक नई दिशा देने के उद्देश्य से बीकानेर के स्वामी केशवानंद राजस्थान कृषि विश्वविद्यालय (एसकेआरएयू) ने एक बड़ी पहल की है. विश्वविद्यालय प्रशासन ने आगामी मानसून सीजन को देखते हुए बड़े पैमाने पर ‘थार शोभा खेजड़ी’ सहित विभिन्न उपयोगी और फलदार प्रजातियों के पौधे तैयार करने का एक विशेष अभियान शुरू किया है. इसके तहत विश्वविद्यालय के कुलगुरु ने सभी कृषि विज्ञान केंद्रों (केवीके), अनुसंधान केंद्रों, कृषि महाविद्यालयों और नर्सरियों को एक निश्चित समय सीमा के भीतर उच्च गुणवत्ता वाले पौध उत्पादन का कार्य पूरा करने के कड़े निर्देश जारी किए हैं.
विश्वविद्यालय के कुलगुरु डॉ. राजेंद्र बाबू दुबे ने एक उच्च स्तरीय बैठक में कहा कि मानसून के दौरान होने वाले व्यापक पौधारोपण कार्यक्रमों के लिए मांग के अनुरूप और गुणवत्तापूर्ण पौधे समय पर तैयार किए जाएं. उन्होंने बताया कि विश्वविद्यालय की ओर से प्रत्येक कृषि विज्ञान केंद्र को ‘थार शोभा खेजड़ी’ के पौधे तैयार करने का विशेष लक्ष्य सौंपा गया है. इन पौधों को ग्रामीण क्षेत्रों, किसानों के कृषि फार्मों, अनुसंधान केंद्रों और सार्वजनिक स्थलों पर व्यापक स्तर पर रोपित किया जाएगा, जो आने वाले समय में बीकानेर संभाग सहित पूरे प्रदेश में हरियाली का एक नया अध्याय लिखेगा.
जानिए क्या है ‘थार शोभा खेजड़ी’ की खासियत‘थार शोभा खेजड़ी’ पारंपरिक रेगिस्तानी खेजड़ी की ही एक अत्यंत उन्नत और वैज्ञानिक रूप से विकसित की गई किस्म है, जिसे विशेष रूप से पश्चिमी राजस्थान की कठिन मरुस्थलीय परिस्थितियों के अनुकूल तैयार किया गया है. इसकी सबसे बड़ी और मुख्य विशेषता यह है कि इसमें पत्तियों का घनत्व बहुत अधिक होता है. अधिक पत्तियों के कारण यह सामान्य खेजड़ी की तुलना में कहीं अधिक छायादार, घनी और आकर्षक दिखाई देती है. यह पौधा अत्यंत कम पानी और बिना किसी विशेष रखरखाव के भी तेजी से वृद्धि करता है. इसके अलावा यह भीषण गर्मी, लंबे समय का सूखा और रेतीली मिट्टी जैसी विपरीत परिस्थितियों को भी आसानी से सहन कर सकता है.
पर्यावरण संरक्षण और पशुपालकों के लिए वरदानकृषि विशेषज्ञों के अनुसार, थार शोभा खेजड़ी पर्यावरण की रक्षा करने के साथ-साथ पश्चिमी राजस्थान के पशुपालकों के लिए पौष्टिक चारे का एक बेहद महत्वपूर्ण और बारहमासी स्रोत है. इसकी हरी पत्तियां, जिन्हें स्थानीय राजस्थानी भाषा में ‘लूंग’ कहा जाता है, दुधारू पशुओं के स्वास्थ्य के लिए सर्वोत्तम मानी जाती हैं. इसके अतिरिक्त, यह पेड़ अपनी जड़ों के माध्यम से मिट्टी की उर्वरता (नाइट्रोजन स्थिरीकरण) बढ़ाने, रेतीले टीलों के कटाव को रोकने और वातावरण से कार्बन अवशोषण में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है. यही कारण है कि वैज्ञानिक इसे मरुस्थलीय क्षेत्रों में नई हरित क्रांति का एक बड़ा प्रतीक मान रहे हैं.
किन्नू, माल्टा और अन्य फलदार पौधों का भी होगा उत्पादनविश्वविद्यालय के कुलगुरु ने स्पष्ट किया कि रेगिस्तान के कल्पवृक्ष खेजड़ी के अलावा स्थानीय जलवायु, आवश्यकताओं और किसानों की भारी मांग को ध्यान में रखते हुए मोरिंगा (सहजन), अनार, खजूर, किन्नू, माल्टा और जामुन सहित अन्य कई उपयोगी एवं फलदार पौधों का भी बड़े स्तर पर उत्पादन किया जाएगा. डॉ. दुबे ने श्रीगंगानगर कृषि अनुसंधान केंद्र (एआरएस) को विशेष रूप से किन्नू और माल्टा के उच्च गुणवत्ता वाले प्रमाणित पौधे तैयार करने के निर्देश दिए हैं. उन्होंने कहा कि विश्वविद्यालय द्वारा तैयार किया जाने वाला प्लांटिंग मैटेरियल हमेशा से हमारी पहचान रहा है, इसलिए पौधों की सेहत और उनकी जेनेटिक शुद्धता से किसी भी प्रकार का समझौता नहीं होना चाहिए. किसानों तक रोगमुक्त पौधे पहुँचाना हमारी जिम्मेदारी है.
पौधों के संरक्षण के लिए बनेगा मजबूत मॉनिटरिंग सिस्टमबैठक के दौरान सिर्फ पौधे लगाने पर ही नहीं, बल्कि मानसून के बाद उनकी उत्तरजीविता (सर्वाइवल रेट) बढ़ाने की रणनीति पर भी विस्तार से चर्चा की गई. कुलगुरु ने कहा कि केवल गड्ढे खोदकर पौधे लगा देना ही पर्याप्त नहीं है, बल्कि उनकी नियमित देखभाल, सिंचाई और सुरक्षा करना भी उतना ही महत्वपूर्ण है. पौधों के जीवित रहने की दर को शत-प्रतिशत करने के लिए एक सुदृढ़ और प्रभावी मॉनिटरिंग सिस्टम विकसित किया जाए. इस मानसून में विश्वविद्यालय परिसर और उससे जुड़ी सभी शिक्षण व अनुसंधान इकाइयों में सघन पौधारोपण कर पूरे परिसर को एक आदर्श ग्रीन मॉडल के रूप में प्रस्तुत किया जाएगा.
About the Authorvicky Rathore
Vicky Rathore (born July 25, 1994) is a multimedia journalist and digital content specialist currently working with Rajasthan. I have over 8 years of experience in digital media, where I specialize in cr…और पढ़ें
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