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Black vs White Chickpeas: काला चना या काबुली चना? जानिए ब्लड शुगर कंट्रोल करने, वजन घटाने और प्रोटीन के लिए कौन बेस्ट!

Last Updated:August 13, 2026, 14:53 IST

Black Chickpeas Vs White Chickpeas Health Benefits: भारतीय रसोई में चने का इस्तेमाल सदियों से होता आ रहा है. चाहें सुबह का उबला नाश्ता हो, चटपटी चाट या फिर संडे स्पेशल छोले-भटूरे—चना हर घर की पहली पसंद है. लेकिन जब बात सेहत, फिटनेस और डाइट गोल्स की आती है, तो अक्सर लोग इस उलझन में पड़ जाते हैं कि ‘काला चना (Desi Chana)’ ज्यादा फायदेमंद है या फिर ‘सफेद काबुली चना (Kabuli Chana)’? आइए, आसान भाषा में समझते हैं कि दोनों में से आपकी सेहत के लिए कौन सा बेहतर है.

प्रोटीन किसमें अधिक है: अगर आप जिम जाते हैं या अपना प्रोटीन इनटेक बढ़ाना चाहते हैं, तो आपके लिए अच्छी खबर यह है कि प्रोटीन के मामले में दोनों ही चने बेहतरीन स्रोत हैं. वैज्ञानिक अध्ययनों और न्यूट्रिशन डेटा के अनुसार, काले और सफेद चने में प्रोटीन की मात्रा लगभग बराबर होती है. हालांकि, उगाने की स्थितियों और किस्म के आधार पर काले चने में थोड़ा सा ज्यादा प्रोटीन मिल सकता है, लेकिन व्यावहारिक रूप से दोनों में कोई खास बड़ा अंतर नहीं है. इसलिए प्रोटीन गोल के लिए आप दोनों में से किसी का भी चुनाव कर सकते हैं.

फाइबर और गट के लिए : अगर आपका मकसद वजन कम करना या लंबे समय तक पेट भरा रखना है, तो काला चना बाजी मार लेता है. काले चने का छिलका मोटा और सख्त होता है, जिसमें भरपूर मात्रा में फाइबर (Insoluble Fiber) पाया जाता है. यह फाइबर भोजन को धीरे-धीरे पचाता है, जिससे आपको बार-बार भूख नहीं लगती और अवांछित स्नैकिंग से बचाव होता है.

डायबिटीज मरीजों के लिए काला चना बेस्ट: डायबिटिक पेशेंट्स के लिए काला चना ज्यादा फायदेमंद माना जाता है. इसके डार्क छिलके में एंटी-ऑक्सीडेंट्स और पॉलीफेनॉल्स की मात्रा अधिक होती है. उच्च फाइबर और कम ग्लाइसेमिक इंडेक्स (Low GI) के कारण काला चना खाने के बाद शरीर में ब्लड शुगर का स्तर अचानक नहीं बढ़ता. काबुली चना भी लो-जीआई श्रेणी में आता है, लेकिन डायबिटीज मैनेजमेंट में काले चने का रिस्पॉन्स थोड़ा बेहतर देखा गया है.

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दिल को दुरुस्त रखने में कौन आगे? दिल की सेहत को बनाए रखने में दोनों ही चने मददगार हैं, क्योंकि ये प्रोसेस्ड मीट और रिफाइंड कार्ब्स का एक बेहतरीन विकल्प हैं. हालांकि, काले चने के डार्क छिलके में ज्यादा फ्लेवोनॉइड्स और एंटी-ऑक्सीडेंट बायो-एक्टिव कम्पाउंड्स होते हैं. इसका उच्च फाइबर शरीर में खराब कोलेस्ट्रॉल (LDL) को कम करने में मदद करता है, जिससे दिल की बीमारियों का खतरा घटता है.

माइक्रोन्यूट्रिएंट्स और आयरन किसमें ज्‍यादा: विटामिन्स और मिनरल्स की बात करें, तो काले चने में आयरन (Iron) और अन्य आवश्यक मिनरल्स का स्तर काबुली चने की तुलना में थोड़ा अधिक होता है. जिन लोगों को एनीमिया या हीमोग्लोबिन की कमी की शिकायत रहती है, उनके लिए काले चने का सेवन एक नेचुरल बूस्टर की तरह काम करता है.

काबुली चना पचाने में आसान : जिन लोगों का पाचन तंत्र संवेदनशील (Sensitive Gut) है या जिन्हें बहुत जल्दी ब्लोटिंग और गैस की समस्या हो जाती है, उनके लिए काबुली (सफेद) चना बेहतर विकल्प है. काबुली चने का छिलका पतला होता है और पकने के बाद यह काफी मुलायम हो जाता है, जिससे इसे पचाना पेट के लिए आसान होता है.

वजन घटाने में कौन सा मददगार: वजन घटाने की जर्नी में दोनों ही चने आपकी मदद कर सकते हैं, लेकिन काले चने का उच्च फाइबर और धीमी पाचन प्रक्रिया इसे थोड़ा सा बढ़त दिलाती है. हालांकि, मुख्य बात यह है कि आप इसे कैसे पकाते हैं. अगर आप काबुली चना भी कम तेल-मसाले या सलाद के रूप में खाते हैं, तो वह भी वेट लॉस में उतना ही कारगर होगा.

आपके लिए कौन सा चना है सबसे सही? अगर आपका लक्ष्य वजन घटाना, ब्लड शुगर कंट्रोल करना और आयरन इनटेक बढ़ाना है, तो आपको अपनी डाइट में काले चने को प्राथमिकता देनी चाहिए. वहीं, अगर आपको पचने में दिक्कत होती है या आप क्रीमी, स्वादिष्ट और हल्की डाइट पसंद करते हैं, तो सफेद काबुली चना आपके लिए बेस्ट है. सबसे सही तरीका यह है कि आप अपनी डाइट में दोनों को संतुलित रूप से शामिल करें! (डिस्क्लेमर: यह जानकारी केवल सामान्य जागरूकता और अध्ययन के लिए है. किसी भी स्वास्थ्य या डाइट संबंधी बदलाव के लिए डॉक्टर या न्यूट्रिशनिस्ट से सलाह ज़रूर लें.)

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August 13, 2026, 14:53 IST

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