Rajasthan

Chilli Crop Care | Mirch ki fasal me guchha rog se kaise bachaye | safed makkhi control tips

Last Updated:August 21, 2026, 10:03 IST

Chilli Crop Disease: बरसात के मौसम में नमी और मौसम परिवर्तन के कारण मिर्च की फसल पर गुच्छा रोग का खतरा बढ़ गया है. सफेद मक्खी के माध्यम से फैलने वाले इस रोग से पौधों की बढ़वार रुक जाती है और फल छोटे व सिकुड़े रह जाते हैं. कृषि विशेषज्ञों ने लोकल 18 को बताया कि रोग की समय पर पहचान कर मिथाइल डेमेटोन व इमिडाक्लोप्रिड जैसे कीटनाशकों का अनुशंसित मात्रा में छिड़काव करना चाहिए. संक्रमित पौधों को खेत से हटाकर तथा सफेद मक्खी पर नियंत्रण पाकर किसान अपनी फसल को आर्थिक नुकसान से बचा सकते हैं.

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Chilli Crop Disease Care: बरसात के मौसम में मिर्च की फसल उगाने वाले किसानों की चिंताएं बढ़ गई हैं. लगातार हो रही बारिश, खेतों में बनी अत्यधिक नमी और मौसम के उतार-चढ़ाव के कारण मिर्च की फसल में ‘गुच्छा रोग’ (चुरडा-मुरडा या लीफ कर्ल) का खतरा तेजी से मंडराने लगा है. इस रोग के फैलते ही मिर्च के पौधों की सामान्य बढ़वार पूरी तरह रुक जाती है और पौधे कमजोर पड़ने लगते हैं. रोग का सबसे बुरा असर फलों के विकास पर देखने को मिल रहा है, जिससे मिर्च का आकार छोटा और सिकुड़ा हुआ रह जाता है. पैदावार में भारी गिरावट की आशंका से किसानों को बड़े आर्थिक नुकसान का डर सता रहा है.

कृषि विशेषज्ञों के अनुसार, मिर्च की फसल में गुच्छा रोग का प्रसार मुख्य रूप से ‘सफेद मक्खी’ (Whitefly) के माध्यम से होता है. यह मक्खी सबसे पहले संक्रमित पौधों पर बैठकर उनका रस चूसती है और फिर स्वस्थ पौधों तक पहुंचकर वायरस को फैला देती है. देखते ही देखते पूरा खेत इस बीमारी की चपेट में आ जाता है. रोग प्रभावित पौधों में ऊपरी और नई पत्तियां छोटी, मुड़ी हुई तथा एक ही जगह पर एकत्रित होकर गुच्छे जैसी दिखाई देने लगती हैं, जिससे पौधा नए फल बनाने की क्षमता खो देता है.

शुरुआती लक्षणों की पहचान और विशेषज्ञों की राय

कृषि विशेषज्ञ ने लोकल 18 से बातचीत में बताया कि किसान भाई अपने खेतों की नियमित निगरानी करके इस रोग के शुरुआती लक्षणों को आसानी से पहचान सकते हैं. यदि पौधों के ऊपरी हिस्से में पत्तियां और फल एक जगह गुच्छेदार बनने लगें और पौधे का विकास रुक जाए, तो तुरंत सतर्क हो जाना चाहिए. रोग के लक्षण दिखते ही प्राथमिक स्तर पर बचाव और उपचार के उपाय शुरू कर देना ही फसल को बर्बादी से बचाने का एकमात्र तरीका है.

बचाव और नियंत्रण के कारगर उपाय

विशेषज्ञों ने सफेद मक्खी के नियंत्रण और गुच्छा रोग से बचाव के लिए निम्नलिखित उपाय करने की सलाह दी है:

कीटनाशक का प्रयोग: सफेद मक्खी की रोकथाम के लिए कृषि विभाग द्वारा अनुशंसित कीटनाशकों जैसे मिथाइल डेमेटोन (Methyl Demeton) या इमिडाक्लोप्रिड (Imidacloprid) का छिड़काव किया जा सकता है.
विशेषज्ञ की सलाह अनिवार्य: किसी भी रसायन या दवा का छिड़काव करने से पहले स्थानीय कृषि विशेषज्ञ से संपर्क करें और बताई गई निर्धारित मात्रा के अनुसार ही प्रयोग करें.
संक्रमित पौधों को हटाना: खेत की नियमित जांच करें और शुरुआत में ही अत्यधिक रोगग्रस्त पौधों को उखाड़कर खेत से दूर किसी गड्ढे में दबा दें या जला दें.
समय पर नियंत्रण: खेत में सफेद मक्खी की संख्या बढ़ते ही तुरंत कीट नियंत्रण के उपाय अपनाएं ताकि स्वस्थ पौधों को संक्रमण से बचाया जा सके.
About the Authorvicky Rathore

Vicky Rathore (born July 25, 1994) is a multimedia journalist and digital content specialist currently working with Rajasthan. I have over 8 years of experience in digital media, where I specialize in cr…

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Bharatpur,Bharatpur,Rajasthan

First Published :

August 21, 2026, 10:03 IST

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