गर्मी चरम पर, फिर भी कूलर बिक्री सुस्त! जानिए क्यों बदल रहा है लोगों का कूलिंग पसंद का ट्रेंड

Last Updated:April 22, 2026, 09:24 IST
Jaipur Hindi News: भीषण गर्मी के बावजूद कूलर बाजार में उम्मीद के मुताबिक तेजी नहीं देखी जा रही है. व्यापारी बताते हैं कि इस बार कूलरों की डिमांड सामान्य से कम है, जिससे बिक्री प्रभावित हुई है. खास बात यह है कि जहां पहले लोहे के कूलर ज्यादा पसंद किए जाते थे, अब उपभोक्ता तेजी से प्लास्टिक कूलरों की ओर रुख कर रहे हैं. हल्के वजन, कम कीमत और बेहतर डिजाइन इसकी प्रमुख वजहें हैं. बदलते उपभोक्ता रुझान और बाजार की स्थिति छोटे व्यापारियों के लिए चिंता का कारण बनती जा रही है.
ख़बरें फटाफट
जयपुर: राजस्थान में भीषण गर्मी का दौर चल रहा हैं कई जिलों में 40° सेल्सियस तक तापमान पहुंच चका हैं गर्मी का हाल ये हैं की इंसानों से लेकर पशु-पक्षी भी भीषण गर्मी में परेशान हैं सुबह 8 बजे से शाम 5 बजे तक पूरे दिन गर्मी का सामना अभी लोगों को पड़ रहा हैं ऐसे ही भीषण गर्मी में अगर कुछ समय के लिए कूलर,पंखा और एसी की ठंडक मिल जाती हैं, तो सुकून मिलता हैं जैसे-जैसे अब गर्मी बढ़ेगी वैसे ही अब बाजारों में कूलरों की डिमांड भी बढ़ेगी. लेकिन फिलहाल गर्मी के सीजन के पहले महिने में कूलरों की इतनी डिमांड नहीं हैं, जिसके चलते बाजारों में भी कूलरों के व्यापारी गर्मी और व्यापार दोनों से परेशान हैं. लोकल-18 ने जयपुर के बाजारों में पहुंच कर गर्मियों में कूलर की डिमांड को लेकर बात की तो व्यापारी इमामुद्दीन बताते हैं की अमूमन मार्च महिने से ही गर्मी की आहट शुरू हो जाती हैं.
लोगों में कूलरों की डिमांड बढ़ने लगती हैं लेकिन इस बार अप्रैल महिना खत्म होने को आया हैं लेकिन लोगों में गर्मी के हिसाब से कूलरों की अभी जयपुर के बाजारों में इतनी डिमांड नहीं हैं जिसके चलते कूलर व्यापारियों को नुकसान हो रहा हैं क्योंकि कूलरों का व्यापार सिर्फ गर्मियों के सीज़न में चलता हैं लेकिन सीज़न के बावजूद भी लोगों में कूलरों की डिमांड वैसी नहीं हैं जैसी होनी चाहिए. इमामुद्दीन का कहना हैं कि कूलरों की सबसे ज्यादा ब्रिकी गर्मियों के शुरुआती महिने में ही होती हैं लेकिन इस बार सिर्फ से 5% ही कूलरों की डिमांड हैं लेकिन अब अप्रैल-मई के माह में उन्हें उम्मीद हैं की गर्मी और बढ़ेगी और जिसके बाद लोगों में कलूरों की डिमांड तेजी से बढ़ेगी.
गर्मी के बावजूद पैसों के चलते नहीं खरीद लोग कूलर लोकल-18 से बात करते हुए इमामुद्दीन बताते हैं की इस साल मौसम में परिवर्तन के चलते इस बार गर्मी के सीजन की शुरुआत ही मार्च महिने के बजाए अप्रैल से शुरू हुई हैं लेकिन हर साल अप्रैल माह तक कूलरों की बंपर डिमांड शुरू हो जाती थी अप्रैल के महिने में हर छोटी-बड़ी दुकानों में रोजाना 10 से 15 कूलर बिक जाते थे लेकिन इस बार बाजार में मंदी के चलते हर दिन सिर्फ एक्के-दूक्के कूलरों की डिमांड हैं गर्मी के अलावा एक कारण यह भी हैं की लोगों के पास अब पैसों की समस्या बढ़ गई हैं इसलिए भी लोग कूलर नहीं खरीद रहे हैं क्योंकि बाजारों में कूलरों की कीमत ही 5 हजार से लेकर 30 हजार तक हैं जिनमें प्लास्टिक से लेकर लौहे के कूलरों की सबसे ज्यादा डिमांड रहती हैं.
अभी जयपुर में भीषण गर्मी के बावजूद भी लोगों में कूलरों की खरीदारी का वैसा रूझान नहीं हैं जैसा होना चाहिए. लेकिन फिर भी अब अप्रैल-मई के महिने अगर गर्मी और बढ़ती हैं तो कूलरों की अच्छी ब्रिकी होने की उम्मीद हैं. इमामुद्दीन बताते हैं कूलर व्यापारियों के लिए कूलरों का व्यापार ऐसा हैं जिसके लिए वह सालभर मेहनत करते हैं और गर्मियों के 2-3 महिने में अच्छा व्यापार करते हैं इसके अलावा किसी अन्य मौसम में कूलरों की न के बराबर डिमांड रहती हैं.
लौहे के बजाए प्लास्टिक के कूलरों की बढ़ी हैं लोगों में डिमांड लोकल-18 से बात करते हुए इमामुद्दीन बताते हैं कि गर्मियों में वैसे तो लौहे और प्लास्टिक दोनों की प्रकार के कूलरों की खूब डिमांड रहती हैं लेकिन कुछ सालों से लोगों में लौहे के कूलर के बजाए प्लास्टिक के कूलरों की डिमांड बढ़ी हैं क्योंकि लौहे के कूलरों में खारे पानी से जंग लगती हैं जिसके चलते वह जल्दी गलने गलता हैं और लौहे के कूलरों में करंट लगने का खतरा होने के चलते इसकी डिमांड अब कम हुई हैं जिसके चलते स्थानीय कूलरों के कारीगरों के व्यापार पर असर पड़ रहा हैं जो खासतौर पर जयपुर में लौहे के कूलर बनाते हैं.
वहीं प्लास्टिक के कूलरों की डिमांड बढ़ी हैं क्योंकि प्लास्टिक के कुलर कम स्थान घेरकर अच्छी हवा देते हैं और इनके तकनीकी फिचर के चलते इनकी डिमांड लौहे के कूलरों के मुकाबले ज्यादा हैं. हालांकि प्लास्टिक के कूलर भी 2-3 साल में खराब हो जाते हैं. गर्मियों में अगर ठंडक भरी सूकन की हवा की बात करें तो प्लास्टिक के बजाए लौहे का कूल ज्यादा ठंडी हवा देता हैं इसलिए आज भी लोगों में लौहे के कूलरों की भी खूब डिमांड हैं क्योंकि इसके अलग-अलग पाट्स खराब भी हो जाते हैं तो बाजारों में बिल्कुल सस्ती कीमत में उपलब्ध रहते हैं.
About the AuthorJagriti Dubey
With more than 6 years above of experience in Digital Media Journalism. Currently I am working as a Content Editor at News 18 in Rajasthan Team. Here, I am covering lifestyle, health, beauty, fashion, religion…और पढ़ें
न्यूजलेटर
अब ईमेल पर इनसाइड स्टोरीज
खबरों के पीछे की खबर अब आपके इनबॉक्स में
सबमिट करें
Location :
Jaipur,Rajasthan
First Published :
April 22, 2026, 09:24 IST



