जोधपुर तालाब संरक्षण मुहिम | Jodhpur Guron Ka Talab Eco-Friendly Mission

Last Updated:April 22, 2026, 09:58 IST
Jodhpur Guron Ka Talab Eco-Friendly Mission: जोधपुर के गुरों का तालाब को स्वच्छ बनाने के लिए पर्यावरणविदों ने 2 महीने में 194 नारियल और 200 से अधिक मूर्तियों सहित हजारों किलो पूजन सामग्री को तालाब में विसर्जित होने से बचाया है. एकत्रित सामग्री से खाद और कैरीबैग बनाए जा रहे हैं. 5 विशेष कलशों और सीसीटीवी निगरानी के माध्यम से शहरवासियों को जागरूक किया जा रहा है ताकि जलस्रोत सुरक्षित और जीवित रह सकें.
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Jodhpur Guron Ka Talab Eco-Friendly Mission: राजस्थान के जोधपुर शहर में ऐतिहासिक जलस्रोतों को प्रदूषण मुक्त बनाने की दिशा में एक प्रेरणादायक बदलाव देखने को मिल रहा है. जोधपुर के ‘गुरों का तालाब’ को स्वच्छ रखने के लिए पर्यावरणविदों और जागरूक युवाओं ने मिलकर एक ऐसी मुहिम शुरू की है, जिसने न केवल तालाब के अस्तित्व को बचाया है, बल्कि धार्मिक आस्था और पर्यावरण संरक्षण के बीच एक नया सेतु बनाया है. पिछले 2 महीनों के भीतर तालाब किनारे रखे गए विशेष निस्तारण कलशों में 194 नारियल, 15 किलो से अधिक कपड़े और 200 से ज्यादा मूर्तियाँ व तस्वीरें एकत्रित की गई हैं. इन सामग्रियों को तालाब में विसर्जित करने के बजाय सुरक्षित रूप से एकत्र कर उनका वैज्ञानिक और विधि-विधान से निस्तारण किया जा रहा है, जिससे हजारों किलो कचरा पानी में मिलने से बच गया है.
पर्यावरणविद् पंडित जीवराज श्रीमाली के नेतृत्व में चल रही इस पहल की सबसे बड़ी विशेषता एकत्रित की गई सामग्री का पुन: उपयोग (Recycle) करना है. कलशों से निकले नारियल के छिलकों और गिरी को पीसकर गौशालाओं में चारे के रूप में भिजवाया जा रहा है. वहीं, धार्मिक आयोजनों में चढ़ाए गए लाल-पीले वस्त्रों को धोकर उनसे रोजमर्रा के इस्तेमाल के लिए मजबूत कैरीबैग बनाए गए हैं. पीओपी और मिट्टी से बनी मूर्तियों को तालाब के बाहर एक अलग कुंड बनाकर गलाया गया, जिसकी मिट्टी को अब खाद के रूप में इस्तेमाल किया जा रहा है. तस्वीरों को पानी में भिगोकर, उनमें गोबर और सूखे पुष्प मिलाकर उच्च गुणवत्ता वाली खाद तैयार की जा रही है. यहाँ तक कि बचे हुए कपड़ों से मोबाइल कवर बनाने जैसे रचनात्मक कार्य भी किए जा रहे हैं.
जागरूकता के लिए प्रदर्शनी और सीसीटीवी निगरानीलोगों को जागरूक करने के लिए तालाब के किनारे इन सामग्रियों की एक प्रदर्शनी भी लगाई गई है, ताकि श्रद्धालु देख सकें कि उनके द्वारा विसर्जित सामग्री कैसे जल को प्रदूषित कर रही थी. शिवरात्रि और चैत्र नवरात्र जैसे बड़े पर्वों के बाद बढ़ती सामग्री को देखते हुए अब कलशों की संख्या 3 से बढ़ाकर 5 कर दी गई है. इन कलशों में सूखे पुष्प, पूजन सामग्री और पुरानी धार्मिक किताबों के लिए अलग-अलग खंड बनाए गए हैं. तालाब के चारों ओर सीसीटीवी कैमरे लगाकर मॉनिटरिंग की जा रही है और युवाओं की टीमें लगातार शहरवासियों को समझा रही हैं कि वे अपनी श्रद्धा को जल प्रदूषित करने का जरिया न बनने दें.
भविष्य के लिए एक स्थाई संदेशइस पहल ने यह साबित कर दिया है कि अगर समाज जागरूक हो, तो प्राचीन जलस्रोतों को जीवित रखना मुमकिन है. पंडित जीवराज श्रीमाली ने शहरवासियों से आह्वान किया है कि वे पूजन सामग्री को सीधे जल में प्रवाहित करने के बजाय निर्धारित निस्तारण ड्रमों में ही डालें. इस मुहिम से न केवल तालाब का पानी स्वच्छ और सुरक्षित हुआ है, बल्कि जलीय जीवों के जीवन पर मंडरा रहा खतरा भी कम हुआ है. जोधपुर का यह ‘गुरों का तालाब’ मॉडल अब अन्य जलस्रोतों के संरक्षण के लिए भी एक मार्गदर्शक की भूमिका निभा रहा है, जहाँ आस्था का सम्मान भी है और प्रकृति की सुरक्षा भी.
About the Authorvicky Rathore
Vicky Rathore (born July 25, 1994) is a seasoned multimedia journalist and digital content specialist with 8 years of experience across digital media, social media management, video production, editing, content…और पढ़ें
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Location :
Jodhpur,Jodhpur,Rajasthan
First Published :
April 22, 2026, 09:58 IST



