Rajasthan

चावल के एक दाने पर रचा इतिहास! उदयपुर के डॉ. इकबाल सक्का ने बनाया तिरंगा ताजिया, देखकर रह जाएंगे हैरान

Last Updated:June 20, 2026, 14:29 IST

Udaipur Hindi News: उदयपुर के प्रसिद्ध स्वर्ण शिल्पी डॉ. इकबाल सक्का ने अपनी अद्भुत सूक्ष्म कला का एक और शानदार उदाहरण प्रस्तुत किया है. उन्होंने चावल के एक छोटे से दाने के आकार में तिरंगा ताजिया तैयार कर सभी को आश्चर्यचकित कर दिया. यह कलाकृति उनकी बारीक कारीगरी, धैर्य और रचनात्मकता का अनूठा नमूना मानी जा रही है. माइक्रो आर्ट के क्षेत्र में अपनी विशेष पहचान रखने वाले डॉ. सक्का पहले भी कई अनोखी कलाकृतियां बनाकर चर्चा में रह चुके हैं. तिरंगे के रंगों से सजे इस लघु ताजिए ने कला प्रेमियों और स्थानीय लोगों का ध्यान आकर्षित किया है. उनकी यह रचना न केवल कला कौशल का प्रदर्शन करती है, बल्कि सांस्कृतिक सौहार्द और राष्ट्रीय भावना का संदेश भी देती है.

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उदयपुर: उदयपुर के अंतरराष्ट्रीय ख्याति प्राप्त स्वर्ण शिल्पी डॉ. इकबाल सक्का ने एक बार फिर अपनी बेमिसाल कला का प्रदर्शन करते हुए विश्व का सबसे छोटा सोने-चांदी का तिरंगा ताजिया तैयार किया है. यह ताजिया इतना सूक्ष्म है कि इसका आकार लगभग एक चावल के दाने के बराबर है.डॉ. सक्का की इस अनूठी कृति को देखकर हर कोई हैरान है. डॉ. सक्का द्वारा बनाए गए इस विशेष ताजिये को एक छोटी सी नाव के अंदर सजाया गया है. नॉर्मल आखो से इसे देख पाना मुश्किल है, लेकिन लेंस की सहायता से देखने पर इसमें बेहद बारीकी से तैयार किया गया सोने का गुंबद, दो-खंड कठड़ा और छतरी स्पष्ट दिखाई देती है. इतनी छोटी जगह में इतनी सुंदर और सटीक कारीगरी करना अपने आप में एक बड़ी उपलब्धि मानी जा रही है.

इस ताजिये की खास बात यह भी है कि इसे पानी से भरे एक पात्र में नाव के साथ तैरते हुए प्रदर्शित किया गया है. यह दृश्य मोहर्रम की पारंपरिक सवारी का प्रतीक माना जा रहा है. पानी में तैरती नाव और उसके भीतर सजा तिरंगा ताजिया लोगों का विशेष आकर्षण बन रहा है. डॉ. इकबाल सक्का ने बताया कि वे हर वर्ष मोहर्रम के अवसर पर कुछ नया और अनोखा बनाने का प्रयास करते हैं. इसी परंपरा को आगे बढ़ाते हुए इस वर्ष उन्होंने विश्व का सबसे छोटा तिरंगा ताजिया तैयार किया है. इस कृति को बनाने में उन्हें काफी समय और धैर्य लगा. सूक्ष्म स्तर पर सोने और चांदी की कारीगरी करना बेहद चुनौतीपूर्ण कार्य था, लेकिन उन्होंने इसे सफलतापूर्वक पूरा किया.

ताजिये को सलामी भी दी जाएगीउन्होंने बताया कि हर वर्ष की तरह इस वर्ष भी मोहर्रम के अवसर पर उदयपुर शहर में निकलने वाले पारंपरिक छड़ियों के जुलूस के दिन इस विश्व के सबसे छोटे तिरंगे ताजिये की नाव में सवारी निकाली जाएगी. शहर की ऐतिहासिक और पारंपरिक छड़ियों के साथ इस ताजिये को सलामी भी दी जाएगी.

कलाकृति को देखने के लिए बड़ी संख्या में पहुंचे लोगइस अनोखी कलाकृति को देखने के लिए बड़ी संख्या में लोग पहुंच रहे हैं. शहरवासियों का कहना है कि डॉ. सक्का ने अपनी अद्भुत कला और रचनात्मकता से एक बार फिर उदयपुर का नाम रोशन किया है. चावल के दाने जितने छोटे आकार में तैयार किया गया यह तिरंगा ताजिया न केवल कला का उत्कृष्ट नमूना है, बल्कि धार्मिक आस्था, सांस्कृतिक विरासत और राष्ट्रीय एकता का भी सुंदर प्रतीक है.

About the AuthorJagriti Dubey

Hi, I am Jagriti Dubey, a media professional with 6 years of experience in social media and content creation. I started my career with an internship at Gbn 24 news channel in 2019 and have worked with many repu…और पढ़ें

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