Rajasthan

रिटायरमेंट के बाद भी देशसेवा! जितेंद्र सिंह मुफ्त में तैयार कर रहे जवान, 100 से अधिक युवा पहन चुके हैं वर्दी

झुंझुनूं. राजस्थान का झुंझुनूं जिला लंबे समय से वीर सैनिकों की धरती के रूप में अपनी पहचान बनाए हुए है. यहां के गांव-ढाणियों से बड़ी संख्या में युवा भारतीय सेना में भर्ती होकर देश की सेवा करते रहे हैं. इसी गौरवशाली परंपरा को आगे बढ़ा रहे हैं सुलताना क्षेत्र के पूर्व सैनिक जितेंद्र सिंह. वर्ष 2021 में भारतीय सेना से रिटायर होने के बाद उन्होंने आरामदायक जीवन चुनने के बजाय युवाओं को सेना में भर्ती कराने का संकल्प लिया. आज वे पूरी तरह निःशुल्क प्रशिक्षण दे रहे हैं.

युवाओं को सेना में जाने के लिए तैयार कर रहे हैं और उनमें अनुशासन, आत्मविश्वास तथा देशभक्ति की भावना जागृत कर रहे हैं. पूर्व सैनिक जितेंद्र सिंह बताते हैं कि उनका परिवार पीढ़ियों से भारतीय सेना से जुड़ा रहा है. बचपन से ही घर में देशभक्ति और अनुशासन का माहौल मिलने के कारण उन्होंने भी सेना में भर्ती होकर देश सेवा की. सेना में रहते हुए भी जब वे छुट्टियों पर गांव आते थे, तब युवाओं को सेना भर्ती की तैयारी करवाते थे. रिटायरमेंट के बाद उन्होंने इसी कार्य को अपना मिशन बना लिया.

युवाओं को रोजाना दे रहे निःशुल्क प्रशिक्षण

जितेंद्र सिंह का कहना है कि ग्रामीण क्षेत्रों के कई प्रतिभाशाली युवा आर्थिक तंगी के कारण महंगी कोचिंग का खर्च नहीं उठा पाते. सेना भर्ती की तैयारी के नाम पर निजी संस्थानों में हजारों रुपये की फीस ली जाती है, जिससे गरीब परिवारों के बच्चों का सपना अधूरा रह जाता है. इसी समस्या को देखते हुए उन्होंने युवाओं को पूरी तरह निःशुल्क प्रशिक्षण देने का फैसला किया. वे प्रतिदिन सुबह करीब साढ़े चार बजे मैदान पहुंच जाते हैं. प्रशिक्षण की शुरुआत वार्मअप और फिटनेस एक्सरसाइज से होती है. इसके बाद युवाओं को लंबी दौड़, रनिंग टाइमिंग, बीम, पुशअप, लंबी कूद और सेना भर्ती से जुड़ी अन्य शारीरिक गतिविधियों का अभ्यास कराया जाता है.

सप्ताह में छह दिन नियमित प्रशिक्षण देते हैं

शाम के समय खेल गतिविधियों के साथ मानसिक मजबूती, अनुशासन और सेना भर्ती प्रक्रिया की जानकारी भी दी जाती है. सप्ताह में छह दिन नियमित प्रशिक्षण होता है, जबकि रविवार को अवकाश रखा जाता है. उनके इस प्रयास का सकारात्मक परिणाम अब साफ दिखाई देने लगा है. वर्तमान में प्रतिदिन करीब 30 से 40 युवा उनके प्रशिक्षण शिविर में पहुंचते हैं. इनमें बड़ी संख्या ऐसे युवाओं की है, जो आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों से आते हैं. प्रशिक्षु युवाओं का कहना है कि जितेंद्र सिंह केवल ट्रेनर नहीं, बल्कि प्रेरणास्रोत और मार्गदर्शक भी हैं. वे सेना के जीवन, अनुशासन और चयन प्रक्रिया के बारे में व्यावहारिक अनुभव साझा करते हैं, जिससे युवाओं का आत्मविश्वास बढ़ता है.

100 से अधिक युवा भारतीय सेना में हो चुके हैं चयनित

जितेंद्र सिंह के मार्गदर्शन में अब तक 100 से अधिक युवा भारतीय सेना में चयनित हो चुके हैं. उनका मानना है कि सेना की वर्दी केवल एक नौकरी नहीं, बल्कि देश के प्रति सबसे बड़ा सम्मान और जिम्मेदारी है. वे कहते हैं कि अब भले ही वे खुद सीमा पर तैनात नहीं हैं, लेकिन देश की सुरक्षा के लिए नए जवान तैयार करना भी उतनी ही बड़ी सेवा है. उनका यह मिशन आज झुंझुनूं ही नहीं, बल्कि पूरे राजस्थान के युवाओं के लिए प्रेरणा का स्रोत बन चुका है.

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