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पिता की शराब की लत ने बर्बाद किया बचपन, बिकी करोड़ों की प्रॉपर्टीज, 5 रुपये के किराए से चलता था घर

Last Updated:April 22, 2026, 15:17 IST

चमकती दुनिया के पीछे छिपी यह कहानी दर्द और संघर्ष से भरी है. एक समय ऐसा आया जब पिता की शराब की आदत ने पूरे परिवार को बिखेर कर रख दिया. हालात इतने खराब हुए कि करोड़ों की जायदाद बिक गई और घर की आर्थिक स्थिति पूरी तरह डगमगा गई. गुजारा करने के लिए बेहद कम पैसों में दिन काटने पड़े. बचपन की ये मुश्किलें किसी भी बच्चे को तोड़ सकती थीं, लेकिन यहां इन्हीं हालातों ने एक जिद पैदा की, कुछ कर दिखाने की. आगे चलकर यही संघर्ष जिंदगी का सबसे बड़ा सबक बना और उसी ने सफलता की नींव रखी.

नई दिल्ली. चमकती दुनिया के पीछे छिपी ये कहानी किसी फिल्म की नहीं, हकीकत की है… जहां बचपन खेल-कूद में नहीं, बल्कि संघर्ष में बीता. एक वक्त था जब परिवार के पास करोड़ों की प्रॉपर्टी थी, लेकिन पिता की शराब की लत ने सब कुछ धीरे-धीरे छीन लिया. हालात इतने बिगड़े कि आलीशान घर सिमटकर एक कमरे तक रह गया. पेट भरने के लिए घर का हॉल तक किराए पर देना पड़ा, जहां ताश खेलने आने वाले लोगों से मिलने वाले 5 रुपये ही अगले दिन का सहारा बनते थे. कई बार तो ये भी तय नहीं होता था कि अगले दिन खाना मिलेगा या नहीं. घर का माहौल ऐसा हो गया था कि वहां लौटने का मन ही नहीं करता था. ये कहानी सिर्फ गरीबी की नहीं, उस दर्द की है जिसने एक बच्चे को वक्त से पहले बड़ा कर दिया और उसे हालात से लड़ना सिखा दिया.

बॉलीवुड की सफल डायरेक्टर और कोरियोग्राफर फराह खान की जिंदगी जितनी चमकदार आज दिखती है, उसका बचपन उतना ही संघर्षों से भरा रहा है. आज करोड़ों की मालकिन फराह ने अपने बचपन के दिन काफी मुफलिसी में कांटे हैं. एक समय ऐसा भी था जब उनका परिवार आर्थिक तंगी, कर्ज और टूटते रिश्तों के बीच जिंदगी गुजार रहा था. इस मुश्किल दौर की सबसे बड़ी वजह उनके पिता कामरान खान की शराब की लत और लगातार फ्लॉप होता फिल्मी करियर था.

बॉलीवुड में आज फराह खान का नाम इज्जत से लिया जाता है. फराह ने ‘मैं हूं ना’, ‘ओम शांति ओम’ जैसी बड़ी फिल्में बनाईं. लेकिन इनकी सफलता के पीछे एक ऐसा दर्दनाक बचपन है, जिसे सुनकर यकीन करना मुश्किल हो जाता है. यह कहानी है एक ऐसे परिवार की, जिसके पास कभी 5 कमरे और एक बड़ा हॉल था, लेकिन पिता की एक गलती ने सब कुछ तबाह कर दिया.

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फराह के पिता कामरान खान एक एक्टर से फिल्म निर्माता बने थे. एक समय में वह काफी सफल थे, लेकिन उनकी महत्वाकांक्षा ही उनकी सबसे बड़ी कमजोरी बन गई. इसके बाद तो बर्बादी का सिलसिला शुरू हो गया. एक-एक करके कई फिल्में फ्लॉप हुईं और कर्ज का पहाड़ बढ़ता गया. करियर के डूबने के साथ ही उन्होंने शराब का सहारा लेना शुरू कर दिया. धीरे-धीरे यह आदत इतनी बढ़ गई कि इसका असर पूरे परिवार पर पड़ने लगा. आर्थिक हालत खराब होती चली गई और हालात यहां तक पहुंच गए कि परिवार को अपनी एक-एक कर करोड़ों की प्रॉपर्टी बेचनी पड़ी.

कभी पांच कमरों और एक बड़े हॉल में रहने वाला यह परिवार वक्त के साथ सिर्फ एक कमरे और हॉल में सिमटकर रह गया. यह घर भी सिर्फ इसलिए बच पाया क्योंकि वह उनकी मां के नाम पर था. लेकिन यहां भी गुजारा आसान नहीं था. घर चलाने के लिए फराह और उनके परिवार को अजीबो-गरीब तरीके अपनाने पड़े.

फराह ने बताया था कि उनके घर के हॉल को रोज ताश खेलने वाले लोगों को किराए पर दिया जाता था. हर व्यक्ति से 5 रुपये लिए जाते थे और उसी पैसे से अगले दिन का खर्चा चलता था. अगर किसी दिन लोग ताश खेलने नहीं आते थे तो अगले दिन खाने के भी लाले पड़ जाते थे. उन्होंने कहा कि जब दो-तीन लोग ज्यादा आ जाते थे तो उन्हें खुशी होती थी, क्योंकि इससे उन्हें अच्छा खाना, जैसे मटन, मिल पाने की उम्मीद होती थी.

इस आर्थिक तंगी के साथ-साथ घर का माहौल भी उनके लिए बेहद मुश्किल था. पिता की शराब की लत का असर इतना गहरा था कि फराह ने बताया कि उन्हें आज भी उस दौर की गंध याद आती है. वह अक्सर देर तक कॉलेज में रुकती थीं ताकि घर जाने से बच सकें. एक इंटरव्यू में उन्होंने कहा था, ‘मैं शाम 6:30-7 बजे तक कॉलेज में ही रहती थी, क्योंकि घर जाने का मन नहीं करता था.’

जब पिता शराब की लत में डूबे रहते थे, तब मां मेनका ईरानी ने परिवार की बागडोर संभाली. उन्होंने बच्चों को लेकर शराबी पति का घर छोड़ दिया और मुंबई के सीरॉक होटल में नौकरानी (हाउसकीपर) बनकर काम किया. फराह और साजिद ने अपने बचपन के कई साल एक छोटे से स्टोर रूम में गुजारे, लेकिन मां ने उन्हें कभी भूखा नहीं रहने दिया. फराह के मुताबिक, ‘हम भिखारी बन गए थे. मेरे पिता एक कंगाल की तरह मरे.’ जब पिता का निधन हुआ तो उनके पास महज 30 रुपये थे. अंतिम संस्कार के पैसे भी नहीं थे, तब सलीम खान ने मदद की थी.

बाद में फराह और साजिद ने अपनी मेहनत से वह मुकाम हासिल कर लिया है, जिसका सपना उनके पिता देखते रह गए. उन्होंने अपने दम पर इंडस्ट्री में पहचान बनाई और एक सफल कोरियोग्राफर और डायरेक्टर बनीं. मैं हूं ना और ओम शांति ओम जैसी फिल्मों के जरिए उन्होंने खुद को साबित किया. फराह की कहानी इस बात का सबूत है कि हालात कितने भी खराब क्यों न हों, अगर इंसान हिम्मत और मेहनत से काम ले तो वह अपनी जिंदगी को बदल सकता है. यह सिर्फ एक स्टार की कहानी नहीं, बल्कि उस संघर्ष की दास्तान है, जिसने एक साधारण लड़की को बॉलीवुड की बड़ी हस्ती बना दिया.

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April 22, 2026, 15:17 IST

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