Rajasthan

डिजिटल अरेस्ट का खौफ, कोर्ट की फर्जी सुनवाई और 55 लाख साफ, सीकर में रिटायर्ड बैंककर्मी से बड़ा साइबर फ्रॉड

सीकर. राजस्थान के सीकर में साइबर ठगों ने डिजिटल अरेस्ट का डर दिखाकर 65 वर्षीय रिटायर्ड बैंक कर्मचारी से 55 लाख रुपये की ठगी कर ली. आरोपियों ने खुद को पुलिस, ईडी और न्यायिक अधिकारी बताकर दो दिनों तक वीडियो कॉल पर कथित पूछताछ की. इतना ही नहीं, उन्हें कोर्ट का दृश्य और कथित जज तक दिखाया गया. डर और दबाव में आकर बुजुर्ग ने 55 लाख रुपये आरोपियों के बताए खातों में ट्रांसफर कर दिए. ठगी का एहसास होने पर पीड़ित ने सीकर साइबर पुलिस थाने में मामला दर्ज कराया है.

पुलिस अब पूरे नेटवर्क की जांच में जुट गई है. पीड़ित महावीर प्रसाद शर्मा ने पुलिस को बताया कि 1 जुलाई को उनके व्हाट्सएप पर एक कॉल आया. कॉल करने वाले ने खुद को पुलिस अधिकारी बताते हुए कहा कि उनके नाम से जारी एक मोबाइल सिम का इस्तेमाल आपत्तिजनक मैसेज और विज्ञापन भेजने में हो रहा है. साथ ही दावा किया गया कि दिल्ली के दरियागंज थाने में उनके खिलाफ 24 मुकदमे दर्ज हैं और उन्हें तुरंत थाने पहुंचना होगा.

मनी लॉन्ड्रिंग केस में फंसाने का डर दिखाया

जब महावीर प्रसाद ने किसी भी सिम और मुकदमे से इनकार किया तो ठगों ने नया झांसा दिया. उन्होंने कहा कि उनके खिलाफ मनी लॉन्ड्रिंग का मामला दर्ज है. आरोपियों ने दावा किया कि उनके नाम से जुड़े एक केनरा बैंक खाते में 6.80 करोड़ रुपये का संदिग्ध लेनदेन मिला है और मामला अब प्रवर्तन निदेशालय (ED) को सौंप दिया गया है. इसके बाद उन्हें ऑनलाइन ही गिरफ्तार किए जाने की बात कही गई.

वीडियो कॉल पर दिखाया कोर्ट और कथित जज

आरोपियों ने वीडियो कॉल पर एक अन्य व्यक्ति को अधिकारी बताकर पूछताछ शुरू कराई. महावीर प्रसाद को सुप्रीम कोर्ट जैसा परिसर दिखाया गया. इसके बाद कथित जज के सामने ऑनलाइन सुनवाई कराई गई और फैसला सुनाया गया कि उनकी संपत्ति और बैंक खातों को जब्त किया जा रहा है तथा उनकी जमानत भी खारिज कर दी गई है. इस पूरी कहानी को इतने वास्तविक तरीके से पेश किया गया कि पीड़ित पूरी तरह डर गए.

दो दिन तक रखा डिजिटल अरेस्ट, किसी को बताने से किया मना

ठगों ने महावीर प्रसाद को दो दिन तक एक कमरे में रहने और किसी से संपर्क नहीं करने के निर्देश दिए. उन्हें कहा गया कि यह राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़ा मामला है और यदि उन्होंने किसी को जानकारी दी तो उनके खिलाफ राष्ट्रीय सुरक्षा कानून के तहत भी कार्रवाई होगी. साथ ही जमानत के लिए 78.98 लाख रुपये जमा कराने का दबाव बनाया गया.

दो किस्तों में 55 लाख रुपये कर दिए ट्रांसफर

डर के माहौल में महावीर प्रसाद ने 2 जुलाई को 30 लाख रुपये और 3 जुलाई को 25 लाख रुपये आरोपियों के बताए बैंक खातों में ट्रांसफर कर दिए. बाद में जब उन्हें अपने साथ हुई ठगी का एहसास हुआ तो उन्होंने सीकर साइबर पुलिस थाने में रिपोर्ट दर्ज कराई.

साइबर पुलिस ने शुरू की जांच

पुलिस ने मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है. बैंक खातों, मोबाइल नंबरों, वीडियो कॉल और डिजिटल ट्रांजैक्शन की जांच की जा रही है. साइबर पुलिस ने लोगों से अपील की है कि कोई भी पुलिस, ईडी, सीबीआई या अदालत वीडियो कॉल पर डिजिटल अरेस्ट नहीं करती और न ही जांच के नाम पर किसी से रुपये ट्रांसफर करवाती है. ऐसे किसी भी संदिग्ध कॉल की सूचना तुरंत साइबर हेल्पलाइन 1930 या नजदीकी साइबर पुलिस थाने को दें.

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