पासपोर्ट ऑफिसर से मसीहा तक! 350 भारतीयों को विदेशी संकट से उबारा, जानिए कौन हैं रिटायर्ड IFS विवेक जैफ

जयपुर. विदेशों में फंसे भारतीयों के लिए राजस्थान के सीकर निवासी और रिटायर्ड आईएफएस अधिकारी विवेक जैफ किसी मसीहा से कम नहीं हैं. अपने लंबे राजनयिक अनुभव का उपयोग करते हुए वह रिटायरमेंट के बाद भी प्रवासी भारतीयों की मदद में जुटे हुए हैं. अब तक वह करीब 350 ऐसे भारतीयों को सुरक्षित स्वदेश वापस लाने में मदद कर चुके हैं, जो विभिन्न कारणों से विदेशों में परेशानियों का सामना कर रहे थे.
विवेक जैफ भारतीय विदेश सेवा के वरिष्ठ अधिकारी रह चुके हैं और अपने कार्यकाल के दौरान उन्होंने कई देशों में भारत का प्रतिनिधित्व किया. विशेष रूप से खाड़ी देशों में उनकी सेवाएं असाधारण रही हैं. इसके अलावा वह जयपुर में पासपोर्ट अधिकारी के रूप में भी जिम्मेदारी निभा चुके हैं. मूल रूप से सीकर जिले के निवासी विवेक जैफ ने रिटायरमेंट के बाद समाजसेवा का एक ऐसा रास्ता चुना, जो आज सैकड़ों परिवारों के लिए उम्मीद की किरण बन गया है.
अब तक 350 लोग अपने परिवारों के पास लौट चुके हैं
दरअसल, राजस्थान के शेखावाटी क्षेत्र से बड़ी संख्या में युवा रोजगार और व्यवसाय के लिए खाड़ी देशों सहित अन्य विदेशी देशों में जाते हैं. इनमें से कई लोग एजेंटों की धोखाधड़ी, पासपोर्ट संबंधी समस्याओं, वीजा विवाद, नौकरी से जुड़े विवादों या स्थानीय कानूनों की जानकारी के अभाव में मुश्किलों में फंस जाते हैं. कई बार ऐसे लोगों के पास न तो सही कानूनी सलाह होती है और न ही किसी सरकारी तंत्र तक पहुंच.
ऐसी परिस्थितियों में विवेक जैफ अपने अनुभव और संपर्कों का उपयोग कर लोगों की सहायता करते हैं. वह जरूरतमंद भारतीयों को उचित मार्गदर्शन देते हैं, संबंधित अधिकारियों से संपर्क स्थापित कराते हैं और उन्हें सुरक्षित भारत वापस लाने के प्रयास करते हैं. उनकी पहल से अब तक करीब 350 लोग अपने परिवारों के पास लौट चुके हैं.
भविष्य में टीम बनाने की योजना पर कर रहे हैं काम
विवेक जैफ का कहना है कि विदेशों में फंसे लोगों की संख्या काफी अधिक है और हर जरूरतमंद तक उनकी पहुंच नहीं हो पाती. इसलिए वह भविष्य में एक छोटी टीम बनाने की योजना पर काम कर रहे हैं, ताकि ज्यादा से ज्यादा लोगों की मदद की जा सके. उनका मानना है कि विदेशों में मुश्किलों का सामना कर रहे भारतीयों को सही जानकारी और समय पर सहायता मिल जाए तो कई समस्याओं का समाधान आसानी से हो सकता है.
निःस्वार्थ भाव से विवेक जैफ कर रहे हैं सेवा
सबसे खास बात यह है कि विवेक जैफ यह सेवा पूरी तरह निःस्वार्थ भाव से कर रहे हैं. वह किसी से कोई शुल्क नहीं लेते और इसे समाज के प्रति अपनी जिम्मेदारी मानते हैं. रिटायरमेंट के बाद जहां अधिकांश लोग आरामदायक जीवन बिताना पसंद करते हैं, वहीं विवेक जैफ़ ने अपने अनुभव और ज्ञान को जरूरतमंद लोगों की सेवा में लगाकर एक प्रेरणादायक उदाहरण पेश किया है. उनकी यह पहल न केवल प्रवासी भारतीयों के लिए सहारा बन रही है, बल्कि समाज में सेवा और समर्पण की नई मिसाल भी कायम कर रही है.



