7 साल की उम्र में थामा रैकेट, अब KVS नेशनल में जीता गोल्ड; कोटा की तुहिन बादल ने बढ़ाया मान

Last Updated:July 08, 2026, 13:26 IST
Tuhin Badal KVS National Gold Medalist: कोटा के केंद्रीय विद्यालय नंबर 1 की छात्रा तुहिन बादल ने बैडमिंटन में बड़ी उपलब्धि हासिल की है. उन्होंने KVS नेशनल प्रतियोगिता में गोल्ड मेडल जीतकर शहर का गौरव बढ़ाया है. 7 साल की उम्र से खेल शुरू करने वाली तुहिन रोज़ाना 5 घंटे कड़ी मेहनत करती हैं. खेल और पढ़ाई के बीच संतुलन बनाने में उन्हें अपने स्कूल और परिवार का पूरा समर्थन मिलता है. अब उनका सपना नेशनल स्तर पर पदक जीतकर देश का नाम रोशन करना है.
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Tuhin Badal KVS National Gold Medalist: खेल के मैदान में जब जज्बा और मेहनत एक साथ मिल जाएं, तो सफलता कदम चूमती है. ऐसा ही कुछ कर दिखाया है कोटा के केंद्रीय विद्यालय नंबर 1 की होनहार छात्रा तुहिन बादल ने. तुहिन ने बैडमिंटन के मैदान पर अपनी प्रतिभा का लोहा मनवाते हुए केंद्रीय विद्यालय संगठन (KVS) की नेशनल प्रतियोगिता में गोल्ड मेडल अपने नाम किया है. इसके साथ ही उन्होंने अंडर-17 कैटेगरी में भी स्वर्ण पदक जीतकर कोटा शहर का नाम पूरे देश में रोशन किया है.
अंडर-15 कैटेगरी में खेलने वाली तुहिन की इस शानदार सफलता के पीछे उनकी कड़ी दिनचर्या और अनुशासन है. वे रोज़ाना सुबह 5 से 6 बजे तक ग्राउंड पर पसीना बहाती हैं. इसके बाद शाम को 4 से 8 बजे तक रघुराई स्पोर्ट्स कॉम्प्लेक्स में कड़ा अभ्यास करती हैं. तुहिन अपनी इस सफलता का श्रेय अपने कोच अंकित अरोरा और साक्षी श्रीवास्तव को देती हैं. उनकी कुशल देखरेख में ही वे अपने खेल को निरंतर निखार रही हैं.
7 साल की उम्र से शुरू हुआ सफरतुहिन ने महज़ 7 साल की उम्र में बैडमिंटन रैकेट थाम लिया था, जब उनके पिता उन्हें पहली बार बैडमिंटन अकादमी लेकर गए थे. एक खिलाड़ी के तौर पर पढ़ाई और खेल के बीच संतुलन बनाना हमेशा से उनके लिए एक बड़ी चुनौती रहा है. तुहिन बताती हैं कि उनका पूरा दिन बेहद व्यस्त रहता है, लेकिन स्कूल के शिक्षकों और क्लास टीचर के बेहतरीन सपोर्ट की वजह से वे खेल और पढ़ाई दोनों को बखूबी संभाल पा रही हैं. खेल के कारण अटेंडेंस कम होने के बावजूद स्कूल प्रशासन उन्हें हमेशा आगे बढ़ने के लिए प्रेरित करता है.
माता-पिता और बहन बने संबलबैडमिंटन को आज भी एक महंगा खेल माना जाता है, लेकिन तुहिन के माता-पिता ने उनके सपनों के आड़े कभी भी आर्थिक तंगी को नहीं आने दिया. तुहिन का कहना है कि समाज में अक्सर लड़कियों को आगे बढ़ने में कई दिक्कतों का सामना करना पड़ता है, लेकिन उनके मम्मी-पापा ने हमेशा उन्हें ढाल बनकर सपोर्ट किया. इसके साथ ही उनकी बड़ी बहन तनिषा बादल इस पूरे सफर में उनकी सबसे बड़ी मोटिवेटर रही हैं.
देश के लिए मेडल जीतना है अगला लक्ष्यअपनी इस बड़ी कामयाबी से उत्साहित तुहिन अब यहीं रुकने वाली नहीं हैं. उनकी नजरें अब और भी ऊंचे मुकाम पर टिकी हैं. तुहिन का अगला लक्ष्य नेशनल लेवल पर और भी कई मेडल जीतकर देश का नाम पूरी दुनिया में रोशन करना है. कोटा की इस बेटी ने साबित कर दिया है कि यदि हौसले बुलंद हों, तो छोटी सी उम्र में भी बड़े लक्ष्यों को प्राप्त किया जा सकता है.
About the Authorvicky Rathore
Vicky Rathore (born July 25, 1994) is a multimedia journalist and digital content specialist currently working with Rajasthan. I have over 8 years of experience in digital media, where I specialize in cr…और पढ़ें
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