How to Protect Wheat in Monsoon | बारिश में गेहूं को कीड़ों से कैसे बचाएं

Last Updated:July 04, 2026, 05:15 IST
How to Protect Wheat in Monsoon: मानसून के मौसम में हवा की नमी और सीलन के कारण घरों में स्टोर किया गया गेहूं खराब होने का खतरा बढ़ जाता है. इससे बचने के लिए गेहूं को ड्रम में भरने से पहले २-३ दिन धूप में अच्छी तरह सुखाना चाहिए. भंडारण के समय सूखी नीम की पत्तियां, तेजपत्ता, सूखी लाल मिर्च या कपूर का इस्तेमाल करने से घुन और कीड़े दूर रहते हैं. गेहूं के ड्रम को सीधे जमीन पर रखने के बजाय स्टैंड पर रखें और महीने में एक बार अनाज की जांच जरूर करें.
मानसून का मौसम जहां एक तरफ गर्मी से राहत लाता है, वहीं दूसरी तरफ हवा में बढ़ती नमी और लगातार बारिश के कारण घर में सालभर के लिए स्टोर करके रखे गए गेहूं में सीलन आने की बड़ी परेशानी भी खड़ी कर देता है. ऐसे में अगर समय रहते सही देखभाल न की जाए तो अनाज में फफूंदी, घुन और अन्य कीड़े लग सकते हैं जिससे पूरा गेहूं खराब हो जाता है. इसलिए इस मौसम में कुछ आसान व पारंपरिक देसी उपाय अपनाकर अनाज को सुरक्षित रखना और खुद को बड़े आर्थिक नुकसान से बचाना बेहद जरूरी हो जाता है.
मानसून का मौसम जहां एक तरफ गर्मी से राहत लाता है, वहीं दूसरी तरफ हवा में बढ़ती नमी और लगातार बारिश के कारण घर में सालभर के लिए स्टोर करके रखे गए गेहूं में सीलन आने की बड़ी परेशानी भी खड़ी कर देता है. ऐसे में अगर समय रहते सही देखभाल न की जाए तो अनाज में फफूंदी, घुन और अन्य कीड़े लग सकते हैं जिससे पूरा गेहूं खराब हो जाता है. इसलिए इस मौसम में कुछ आसान व पारंपरिक देसी उपाय अपनाकर अनाज को सुरक्षित रखना और खुद को बड़े आर्थिक नुकसान से बचाना बेहद जरूरी हो जाता है.
गेहूं को कीड़ों और घुन से बचाने के लिए पुराने समय से इस्तेमाल होने वाले देसी उपाय आज भी बेहद कारगर माने जाते हैं. गेहूं के बीच-बीच में सूखी नीम की पत्तियां डालने से कीड़े नहीं लगते और अनाज लंबे समय तक सुरक्षित रहता है. इसके अलावा तेजपत्ता, सूखी लाल मिर्च या कपूर की कुछ गोलियां अलग कपड़े में बांधकर रखने से भी कीट दूर रहते हैं. इन घरेलू उपायों में किसी प्रकार के रसायन का उपयोग नहीं होता, इसलिए गेहूं की गुणवत्ता और स्वाद पर भी कोई बुरा असर नहीं पड़ता तथा यह परिवार के स्वास्थ्य के लिए भी सुरक्षित रहता है.
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सिर्फ गेहूं को सुरक्षित रखना ही काफी नहीं है, बल्कि जिस स्थान पर उसे रखा गया है, उसकी भी नियमित देखभाल जरूरी है. स्टोर रूम या गोदाम में पानी का रिसाव, सीलन या गंदगी बिल्कुल नहीं होनी चाहिए. यदि कमरे में नमी अधिक रहती है तो समय-समय पर खिड़कियां और दरवाजे खोलकर हवा का आवागमन बनाए रखें. गेहूं के ड्रम को सीधे फर्श पर रखने के बजाय लकड़ी के तख्ते या स्टैंड पर रखें, ताकि नीचे से आने वाली नमी का असर अनाज पर न पड़े और वह लंबे समय तक सुरक्षित बना रहे.
मानसून के दौरान महीने में कम से कम एक बार गेहूं की जांच जरूर करनी चाहिए. यदि कहीं हल्की सी भी सीलन, बदबू, घुन या फफूंदी दिखाई दे तो तुरंत गेहूं को बाहर निकालकर तेज धूप में अच्छी तरह सुखाएं. इसके बाद साफ और सूखे बर्तन में भरकर दोबारा सुरक्षित स्थान पर रखें. कई लोग एक बार गेहूं भरने के बाद पूरे मौसम में उसे नहीं देखते, जिससे नुकसान बढ़ जाता है. समय-समय पर जांच करने से छोटी समस्या भी तुरंत पकड़ में आ जाती है और पूरा अनाज खराब होने से बच जाता है.
मानसून के मौसम में थोड़ी-सी सावधानी और पारंपरिक देसी उपाय अपनाकर घर में स्टोर किए गए गेहूं को आसानी से सुरक्षित रखा जा सकता है. इससे न केवल अनाज की गुणवत्ता लंबे समय तक बनी रहती है, बल्कि परिवार को पूरे साल साफ और स्वस्थ गेहूं मिलता है. साथ ही बार-बार नया गेहूं खरीदने की जरूरत भी नहीं पड़ती और आर्थिक बचत होती है. इसलिए बारिश के इस मौसम में गेहूं के भंडारण पर विशेष ध्यान देना चाहिए, ताकि मेहनत से खरीदा गया अनाज सुरक्षित रहे और किसी प्रकार का नुकसान न हो.
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