Rajasthan

हल्दीघाटी विजय को 450 वर्ष हुए पूरे, आज मेवाड़ बन रहा भव्य आयोजन का गवाह

Last Updated:June 17, 2026, 11:50 IST

Maharana Pratap Jayanti: वीर शिरोमणि महाराणा प्रताप की 486वीं जयंती और हल्दीघाटी विजय के 450 वर्ष पूरे होने पर उदयपुर में भव्य आयोजन हो रहे हैं. महलों का सुख छोड़ मातृभूमि के लिए संघर्ष करने वाले प्रताप के इतिहास को याद करने गांधी ग्राउंड में आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत और सीएम भजनलाल शर्मा पहुंचे, जहाँ लोगों का हल्दीघाटी की मिट्टी से तिलक किया गया. वहीं, मोती मगरी पर प्रताप के वंशज डॉ. लक्ष्यराज सिंह मेवाड़ ने विशेष पूजन किया.

उदयपुर. भारतीय इतिहास के आकाश में वीर शिरोमणि महाराणा प्रताप एक ऐसे देदीप्यमान नक्षत्र हैं, जिनका नाम आते ही स्वाभिमान, राष्ट्रनिष्ठा और अदम्य साहस की जीती-जागती तस्वीर सामने आ जाती है. आज उनकी 486वीं पावन जयंती के अवसर पर पूरा देश उनके गौरवशाली इतिहास को नमन कर रहा है. महाराणा प्रताप का जीवन महज़ एक राजा का संघर्ष नहीं, बल्कि विदेशी आक्रांताओं के खिलाफ मातृभूमि की संप्रभुता को अक्षुण्ण रखने की एक महागाथा है.

उन्होंने महलों के ऐश-ओ-आराम को ठुकराकर जंगलों की खाक छानना मंजूर किया, घास की रोटियां खाईं, लेकिन कभी दिल्ली के शासक अकबर की अधीनता स्वीकार नहीं की. उनका यही दृढ़ संकल्प और स्वतंत्रता के प्रति उनका अगाध प्रेम आज सदियों बाद भी हर भारतीय के रगों में देशभक्ति का संचार करता है.

मेवाड़ के इतिहास का सबसे स्वर्णिम और रोंगटे खड़े कर देने वाला अध्याय है हल्दीघाटी का युद्ध, जिसकी विजय के आज पूरे 450 वर्ष पूरे हो रहे हैं. यह महज़ दो सेनाओं की लड़ाई नहीं थी, बल्कि यह सीमित संसाधनों और असीमित हौसलों का महासंग्राम था. जब मुगल सेनापति मानसिंह के नेतृत्व में एक विशाल टिड्डी दल मेवाड़ को कुचलने आया, तब महाराणा प्रताप ने अपने मुट्ठी भर भील योद्धाओं और वफादार सैनिकों के साथ वह पराक्रम दिखाया कि मुगलों के पैर उखड़ गए.

Add as Preferred Source on Google

चेतक पर सवार होकर जब प्रताप हवा से बातें करते हुए दुश्मन के खेमे में घुसते थे, तो साक्षात महाकाल का रूप नजर आते थे. इतिहास के इस महान मोड़ पर उनकी रणनीतिक कुशलता और वीरता का लोहा पूरी दुनिया मानती है, जिसकी गूंज आज 450 साल बाद भी हल्दीघाटी के कण-कण में समाहित है.

महाराणा प्रताप के इसी अदम्य इतिहास और हल्दीघाटी विजय के 450 वर्ष पूरे होने के ऐतिहासिक उपलक्ष्य में उदयपुर के गांधी ग्राउंड में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) की ओर से एक विराट कार्यक्रम का आयोजन किया जा रहा है. इस महाधिवेशन में आरएसएस के सरसंघचालक डॉ. मोहन भागवत और राजस्थान के मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा मुख्य रूप से शामिल हुए हैं. कार्यक्रम में पूरे मेवाड़ और देश के कोने-कोने से 35 हजार से अधिक राष्ट्रभक्त इस महान इतिहास को नमन करने पहुंचे हैं.

शौर्य की इस पावन गाथा को जीवंत रखने के लिए गांधी ग्राउंड में आने वाले हर एक आगंतुक का हल्दीघाटी की उस वीर प्रसूता माटी से तिलक किया जा रहा है, जिसने कभी मुगलों के खून से अपनी प्यास बुझाई थी. मुख्यमंत्री की अगवानी के लिए  प्रभारी मंत्री हेमंत मीणा, चित्तौड़गढ़ सांसद सीपी जोशी और उदयपुर सांसद मन्नालाल रावत समेत कई दिग्गज मौजूद रहे.

इतिहास की इस गौरवशाली कड़ी को जीवित रखते हुए उदयपुर के मोती मगरी स्मारक पर भी श्रद्धा और गौरव का एक अनूठा संगम देखने को मिला. महाराणा प्रताप के सीधे वंशज और मेवाड़ के पूर्व राजपरिवार के सदस्य डॉ. लक्ष्यराज सिंह मेवाड़ ने चेतक पर सवार वीर प्रताप की भव्य अश्वारूढ़ प्रतिमा पर विधि-विधान से विशेष पूजा-अर्चना की.

न्यूज़18 को गूगल पर अपने पसंदीदा समाचार स्रोत के रूप में जोड़ने के लिए यहां क्लिक करें। राजस्थान की ताजा खबरें पढ़ने के लिए क्लिक करें|

Source link

Related Articles

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Back to top button

Uh oh. Looks like you're using an ad blocker.

We charge advertisers instead of our audience. Please whitelist our site to show your support for Nirala Samaj