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Jeera Mandi Price: अमेरिका-ईरान तनाव का सीधा असर! सांचौर में जीरे के दाम 200 से नीचे, किसानों में मची हाहाकार

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वैश्विक तनाव बना किसानों की परेशानी! सांचौर जीरा मंडी में भाव टूटे, बढ़ी चिंता

Last Updated:April 25, 2026, 10:02 IST

Jalor Hindi News: सांचोर की जीरा मंडियों में इन दिनों भारी मंदी देखने को मिल रही है, जिसका असर किसानों पर सीधा पड़ रहा है. अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते तनाव के कारण बाजार में अनिश्चितता बढ़ी है, जिससे जीरे के भाव गिरकर 200 रुपये प्रति किलो से नीचे पहुंच गए हैं. किसानों को उनकी फसल का उचित मूल्य नहीं मिल पा रहा है, जिससे आर्थिक चिंता बढ़ गई है. किसानों और किसानों दोनों में असमंजस की स्थिति बनी हुई है और भविष्य को लेकर अनिश्चितता कायम है.

सांचौर क्षेत्र की कृषि मंडियों में इन दिनों जीरे को लेकर भारी निराशा का माहौल देखने को मिल रहा है. अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अमेरिका और ईरान के बीच चल रहे तनाव का असर अब स्थानीय बाजारों तक पहुंच गया है. विदेशी बाजारों में मांग घटने के कारण जीरे की कीमतों में लगातार गिरावट आ रही है, जिससे किसानों और व्यापारियों दोनों को आर्थिक नुकसान झेलना पड़ रहा है.

भारत से जीरे का बड़ा हिस्सा विदेशों में निर्यात होता है, जिसमें ईरान जैसे देशों की अहम भूमिका रही है. लेकिन युद्ध जैसे हालातों के कारण निर्यात प्रक्रिया प्रभावित हुई है. इसका सीधा असर सांचौर की मंडियों पर पड़ा है, जहां पहले अच्छी डिमांड रहने के कारण किसानों को बेहतर भाव मिलते थे, लेकिन अब स्थिति पूरी तरह बदल चुकी है.

स्थानीय मंडियों में भी इस मंदी का असर साफ नजर आ रहा है. व्यापारियों के अनुसार पिछले दो सालों से जीरे के कारोबार में सुस्ती बनी हुई है. मंडियों में पहले जैसी चहल-पहल अब देखने को नहीं मिलती, जिससे छोटे व्यापारियों पर भी आर्थिक दबाव बढ़ गया है.

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किसान रामनिवास विश्नोई जैसे कई किसान बताते हैं कि इस बार खेतों में जीरे की पैदावार अच्छी हुई थी, लेकिन बाजार में दाम गिरने से उनकी मेहनत बेकार हो गई. उनका कहना है कि अगर इसी तरह भाव गिरते रहे, तो आने वाले समय में जीरे की खेती करना मुश्किल हो जाएगा और किसान दूसरी फसलों की ओर रुख करेंगे.

पिछले कुछ महीनों से जीरे के भाव 200 रुपए प्रति किलो से नीचे बने हुए हैं, जो किसानों के लिए चिंता का बड़ा कारण है. खेती की लागत लगातार बढ़ रही है, लेकिन इसके मुकाबले फसल का उचित मूल्य नहीं मिल पा रहा है. यही वजह है कि कई किसान अब जीरे की खेती से दूरी बनाने का मन बना रहे हैं.

किसान संगठनों और व्यापारियों का मानना है कि यदि जल्द ही सरकार द्वारा कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया, तो यह संकट और गहरा सकता है. उन्होंने जीरे के लिए न्यूनतम समर्थन मूल्य बढ़ाने और निर्यात को बढ़ावा देने की मांग की है, ताकि किसानों को उनकी मेहनत का सही मूल्य मिल सके और वे इस आर्थिक संकट से उबर सकें.

First Published :

April 25, 2026, 10:02 IST

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