उदयपुर की खुशी मेवाड़ की पहली महिला फाइटर पायलट, 23 साल की उम्र में बनी वायुसेना में फ्लाइंग ऑफिसर

Last Updated:June 15, 2026, 20:01 IST
झीलों की नगरी उदयपुर की 23 वर्षीय खुशी गंभीर ने भारतीय वायुसेना में फ्लाइंग ऑफिसर बनकर मेवाड़ का नाम रोशन किया है. AFCAT और SSB जैसी कठिन चयन प्रक्रिया को पहले ही प्रयास में पार करने वाली खुशी मेवाड़ की पहली महिला फाइटर पायलट बनी हैं. हैदराबाद में कठोर प्रशिक्षण पूरा करने के बाद उन्होंने यह उपलब्धि हासिल की. उनकी सफलता क्षेत्र की बेटियों के लिए प्रेरणा बन गई है और पूरे मेवाड़ में गर्व का माहौल है.
उदयपुर. झीलों की नगरी उदयपुर की बेटी खुशी ने भारतीय वायुसेना में फ्लाइंग ऑफिसर बनकर मेवाड़ का नाम पूरे देश में रोशन किया है. खुशी ने अपनी मेहनत, लगन और प्रतिभा के दम पर यह उपलब्धि हासिल करते हुए मेवाड़ की पहली महिला फाइटर पायलट बनने का गौरव प्राप्त किया है. उनकी इस सफलता से पूरे क्षेत्र में खुशी और गर्व का माहौल है. शहर के सेक्टर-14 निवासी खुशी ने भारतीय वायुसेना का कठिन प्रशिक्षण सफलतापूर्वक पूरा करने के बाद फ्लाइंग ऑफिसर के पद पर नियुक्ति प्राप्त की है. महज 23 वर्ष की उम्र में यह मुकाम हासिल कर उन्होंने क्षेत्र की बेटियों के लिए एक नई मिसाल पेश की है. परिवार, रिश्तेदारों और शहरवासियों ने उनकी इस उपलब्धि पर खुशी जताते हुए उन्हें शुभकामनाएं दी हैं. खुशी के पिता सुरेंद्र पाल गंभीर होटल व्यवसाय से जुड़े हुए हैं, जबकि उनकी माता नीलू गंभीर गृहिणी हैं. परिवार ने शुरू से ही खुशी को अपने सपनों को पूरा करने के लिए प्रोत्साहित किया. इसी का परिणाम है कि आज उन्होंने देश की प्रतिष्ठित सैन्य सेवाओं में अपना स्थान बनाया है.
माता-पिता के साथ-साथ अपनी बड़ी बहन को देती है श्रेय
खुशी ने अपनी स्कूली शिक्षा तीतरड़ी स्थित सेंट मैरिज स्कूल से 12वीं तक पूरी की. इसके बाद उन्होंने बीएन विश्वविद्यालय, उदयपुर से बीसीए की पढ़ाई की और गोल्ड मेडल हासिल किया. पढ़ाई के साथ-साथ उन्होंने राष्ट्रीय कैडेट कोर (एनसीसी) की गतिविधियों में भी सक्रिय भागीदारी निभाई और 6 राज एनसीसी से ‘सी’ प्रमाणपत्र प्राप्त किया. भारतीय वायुसेना में चयन के लिए खुशी ने एयरफोर्स कॉमन एडमिशन टेस्ट (AFCAT) दिया और पहले ही प्रयास में परीक्षा उत्तीर्ण कर अपनी प्रतिभा का परिचय दिया. इसके बाद उन्होंने देहरादून में आयोजित सर्विस सिलेक्शन बोर्ड (एसएसबी) इंटरव्यू भी सफलतापूर्वक पास किया. चयन प्रक्रिया के बाद हैदराबाद में कठोर और चुनौतीपूर्ण पायलट प्रशिक्षण पूरा कर उन्होंने फ्लाइंग ऑफिसर बनने का सपना साकार किया.खुशी की उपलब्धियों की सूची यहीं समाप्त नहीं होती. उनका चयन गणतंत्र दिवस परेड के लिए भी हो चुका है, जो किसी भी युवा के लिए गर्व की बात मानी जाती है खुशी अपनी सफलता का श्रेय अपने माता-पिता के साथ-साथ अपनी बड़ी बहन मुस्कान को देती हैं, जिन्होंने हर कदम पर उनका मार्गदर्शन और हौसला बढ़ाया. मेवाड़ की पहली महिला फाइटर पायलट बनने के साथ ही खुशी ने यह साबित कर दिया है कि दृढ़ संकल्प और मेहनत के बल पर कोई भी लक्ष्य हासिल किया जा सकता है. उनकी सफलता क्षेत्र की हजारों बेटियों को बड़े सपने देखने और उन्हें पूरा करने की प्रेरणा दे रही है.
About the AuthorMonali Paul
नमस्ते मेरा नाम मोनाली है, पेशे से पत्रकार हूं, ख़बरें लिखने का काम है. लेकिन कैमरे पर समाचार पढ़ना बेहद पसंद है. 2016 में पत्रकारिता में मास्टर्स करने के बाद पांच साल कैमरे पर न्यूज़ पढ़ने के साथ डेस्क पर खबरे…और पढ़ें
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