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Lawrence Bishnoi Extradition: लॉरेंस बिश्‍नोई को मांग रहा यूएस… कानून में कौन सा पेच, जो बांधेगा सरकार के हाथ

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बिश्‍नोई को मांग रहा यूएस… कानून में वो कौन सा पेच? जो बांधेगा सरकार के हाथ

Last Updated:July 10, 2026, 19:44 IST

Lawrence Bishnoi Extradition: अमेरिकी खुफिया एजेंसियों ने ऑपरेशन हार्ड बॉल के तहत जेल में बंद गैंगस्टर लॉरेंस बिश्नोई पर अंतरराष्ट्रीय आपराधिक नेटवर्क चलाने, सुपारी देकर हत्या और ड्रग्स तस्करी का संगीन आरोप लगाया है. इस अभियोग के बाद अमेरिका बिश्नोई के प्रत्यर्पण की मांग करने की तैयारी में है. हालांकि, भारत में बिश्नोई पर चल रहे दर्जनों मुकदमों और विदेश मंत्रालय के विशेषाधिकार के चलते इस प्रत्यर्पण को रोकना या टालना पूरी तरह नई दिल्ली के हाथ में है.बिश्‍नोई को मांग रहा यूएस... कानून में वो कौन सा पेच? जो बांधेगा सरकार के हाथZoomअमेरिका भारत से लॉरेंस बिश्‍नोई के प्रत्‍यर्पण की मांग कर सकता है.

अंडरवर्ल्ड में उस समय जबरदस्त भूचाल आ गया था जब हाल ही में अमेरिकी खुफिया एजेंसियों ने सलाखों के पीछे बंद भारत के सबसे खूंखार गैंगस्टर लॉरेंस बिश्नोई को नामजद किया। अमेरिका की फेडरल ग्रैंड जूरी ने ऑपरेशन हार्ड बॉल के तहत लॉरेंस बिश्नोई पर भारत की जेल के भीतर से ही एक ट्रांसनेशनल क्रिमिनल नेटवर्क चलाने का आरोप लगाते हुए चार्जशीट दाखिल की. इस कार्रवाई के बाद वाशिंगटन अब औपचारिक रूप से लॉरेंस बिश्नोई के प्रत्यर्पण की मांग भारत करने की तैयारी में है. लेकिन सवाल यह उठता है कि क्या सुपरपावर अमेरिका की इस जिद के आगे भारत घुटने टेकेगा? इस हाई-प्रोफाइल मामले ने भारत और अमेरिका के बीच द्विपक्षीय कानूनी समझौतों को कड़े टेस्ट के मुहाने पर लाकर खड़ा कर दिया है, जहां अंतिम फैसला पूरी तरह से नई दिल्ली के हाथों में है.

अमेरिका के गंभीर आरोप और डुअल क्रिमिनलिटी का पेंचअमेरिकी ग्रैंड जूरी ने लॉरेंस बिश्नोई पर संगठित अपराध, सुपारी देकर हत्या, जबरन वसूली और बड़े पैमाने पर नशीले पदार्थों की तस्करी जैसे बेहद गंभीर आरोप लगाए हैं. अंतरराष्ट्रीय कानून के नजरिए से देखा जाए तो ये सभी हरकतें भारत के भारतीय न्याय संहिता (BNS) और विभिन्न आतंकवाद विरोधी कड़े कानूनों के तहत भी संगीन अपराध की श्रेणी में आती हैं. यही वजह है कि दोनों देशों के बीच कानूनी शब्दों में अंतर होने के बावजूद, अंतरराष्ट्रीय प्रत्यर्पण के लिए जरूरी ‘डुअल क्रिमिनलिटी’ (दोनों देशों में अपराध होना) की तकनीकी शर्त यहां पूरी होती दिखाई दे रही है.

भारत के पास है ‘ब्रह्मास्त्र’लॉरेंस बिश्नोई को अमेरिका सौंपने की राह में सबसे बड़ा कानूनी रोड़ा भारत में उसके खिलाफ चल रहे मुकदमों का अंबार है. भारतीय कानून और संप्रभुता के तहत नई दिल्ली के पास अमेरिकी अनुरोध को ठुकराने या अनिश्चितकाल के लिए टालने के कई पुख्ता रास्ते मौजूद हैं:

लंबित भारतीय मामले: लॉरेंस बिश्नोई वर्तमान में भारत के कई राज्यों में हत्या, बड़े पैमाने पर रंगदारी और आतंकवाद विरोधी अभियानों से जुड़े दर्जनों हाई-प्रोफाइल मामलों में मुख्य आरोपी है. क्षेत्रीय अधिकार की प्राथमिकता: भारतीय अदालतों के पास विदेशी धरती पर कस्टडी सौंपने से पहले अपनी घरेलू जमीन पर हुए अपराधों के लिए मुकदमा चलाने का प्राथमिक और संप्रभु अधिकार सुरक्षित है. स्थगन खंड: दोनों देशों के बीच हुई संधि भारत सरकार को यह विशेष अधिकार देती है कि वह घरेलू मुकदमों के पूरा होने और उसके बाद मिलने वाली जेल की सजा काटने तक प्रत्यर्पण की कार्यवाही को पूरी तरह रोक सकती है.पॉलिटिकल एक्सेप्शन और अंतिम शक्ति

भारत-अमेरिका प्रत्यर्पण संधि में पेंचभले ही भारत-अमेरिका प्रत्यर्पण संधि में हत्या, बंधक बनाना और ड्रग्स तस्करी जैसे अपराधों को राजनीतिक अपराध की श्रेणी से बाहर रखा गया है लेकिन कानूनी टीमें अक्सर इन मामलों के पीछे के कूटनीतिक और राजनीतिक इरादों को चुनौती देती हैं. सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि संधि के मुताबिक नागरिकता के आधार पर प्रत्यर्पण से इनकार नहीं किया जा सकता लेकिन अंतिम फैसला अदालतों के बजाय पूरी तरह से कार्यपालिका के अधीन होता है.

मजिस्‍ट्रेट का आदेश भी काट सकती है सरकारअगर भारत की कोई मजिस्ट्रेट अदालत कानूनी तौर पर अमेरिकी प्रत्यर्पण के अनुरोध को हरी झंडी दे भी देती है तो भी अंतिम आत्मसमर्पण वारंट को मंजूर या नामंजूर करने का पूर्ण अधिकार भारत के विदेश मंत्रालय (MEA) के पास सुरक्षित है. राष्ट्रीय सुरक्षा, देश की संप्रभुता और कूटनीतिक हितों को ध्यान में रखते हुए यह पूरी तरह तय माना जा रहा है कि नई दिल्ली इस संवेदनशील गैंगस्टर को आने वाले लंबे समय तक भारतीय जेलों के सुरक्षित नेटवर्क के भीतर ही रखने वाली है.

About the AuthorSandeep GuptaChief Sub Editor

डिजिटल पत्रकारिता में खबरों की गहरी समझ रखने वाले संदीप गुप्ता वर्तमान में इंडिया में बतौर चीफ सब-एडिटर अपनी सेवाएं दे रहे हैं. 16 वर्षों से सुदीर्घ पत्रकारीय सफर में इन्होंने अपनी कलम से जटिल विषयों को …और पढ़ें

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