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Alwar News: देशभर की मंडियों में अपनी रंगत, तीखापन और विशिष्ट स्वाद के लिए पहचान रखने वाली खैरथल की लाल प्याज आज भी क्षेत्र के किसानों की आय का मजबूत आधार बनी हुई है. हालांकि, बदलते मौसम, बाजार की अनिश्चितता और आधुनिक खेती प्रणाली ने इस पारंपरिक फसल की खेती को नई चुनौतियों और बदलावों से गुजरने पर मजबूर कर दिया है.
खैरथल तिजारा जिले के किशनगढ़ बास, खैरथल, तिजारा, कोटकासिम, हरसोली सहित आसपास के गाँवों की उपजाऊ दोमट मिट्टी और अनुकूल मौसम लाल प्याज की खेती के लिए आदर्श माने जाते हैं. यही कारण है कि यहां की प्याज देशभर में अपने चमकीले लाल रंग, तीखे स्वाद और लंबे समय तक सुरक्षित रहने की क्षमता के कारण अलग पहचान बनाए हुए है. स्थानीय मिट्टी के गुण और किसानों का अनुभव इस फसल को विशेष बनाते हैं.
खेती में कई आधुनिक तकनीकें तेजी से जुड़ीबीते वर्षों में प्याज की खेती में कई आधुनिक तकनीकें तेजी से जुड़ी हैं. किसान अब पारंपरिक किस्मों के साथ हाइब्रिड, उच्च-उत्पादक एवं रोग-प्रतिरोधी किस्मों का उपयोग कर रहे हैं. रिप सिंचाई, मल्चिंग, ड्रिप सिस्टम और संतुलित उर्वरक पद्धति अपनाने से उत्पादन क्षमता में सुधार देखने को मिला है. साथ ही मशीनीकरण ने श्रम पर निर्भरता घटाई है, हालांकि छोटी जोत वाले किसानों के लिए महंगी मशीनें अब भी बड़ी चुनौती बनी हुई हैं.
प्याज किसानों के सामने सबसे बड़ी समस्या बढ़ती लागत, बाजार में अचानक कीमतों का गिरना और पर्याप्त भंडारण सुविधाओं की कमी है. खैरथल क्षेत्र में आधुनिक कोल्ड-स्टोरेज न होने के कारण हर साल बड़ी मात्रा में प्याज खराब हो जाती है, जिससे किसानों की आय पर सीधा असर पड़ता है.कई किसान बताते हैं कि उत्पादन भले बढ़ रहा है, लेकिन बाजार की अनिश्चितता और लागत वृद्धि ने लाभ को सीमित कर दिया है.
इन चुनौतियों के बावजूद खैरथल की लाल प्याज की राष्ट्रीय स्तर पर मजबूत पकड़ बनी हुई है. यहां की मंडियों से प्रतिदिन बड़ी मात्रा में प्याज उत्तर भारत की प्रमुख थोक मंडियों में भेजी जाती है, जहां इसकी चमक और गुणवत्ता के कारण तेजी से बिक्री होती है.
खैरथल की लाल प्याज को राष्ट्रीय ब्रांडविशेषज्ञों का मानना है कि यदि क्षेत्र में प्याज ग्रेडिंग-पैकिंग सेंटर, आधुनिक भंडारण सुविधाओं, कृषि मशीनरी बैंक और किसानों को सीधे बाजारों से जोड़ने की व्यवस्था विकसित की जाए, तो न केवल किसानों की आय में बड़ी बढ़ोतरी होगी बल्कि खैरथल की लाल प्याज को राष्ट्रीय ब्रांड के रूप में और मजबूत पहचान मिल सकेगी.



