150 का ऐसा सिक्का जो आम नहीं, धौलपुर के निजी संग्रहालय में छुपा है आज़ादी का संघर्ष

Last Updated:December 25, 2025, 16:34 IST
Dhaulpur News : धौलपुर के अजय गर्ग के संग्रहालय में वंदे मातरम के 150 वर्ष पर भारत सरकार द्वारा जारी 150 रुपये का स्मारक सिक्का संग्रह प्रेमियों के लिए आकर्षण का केंद्र है. इस 150 रुपये के स्मारक सिक्के के एक तरफ राष्ट्रीय चिन्ह अशोक स्तंभ के साथ सत्यमेव जयते अंकित है.
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धौलपुर. राजस्थान के धौलपुर में मुद्रा और डाक टिकट संग्रहकर्ता अजय गर्ग के निजी संग्रहालय में भारत सरकार द्वारा जारी वंदे मातरम के 150 वर्ष पूर्ण होने पर जारी किया गया 150 रुपये का स्मारक सिक्का सुरक्षित रखा गया है. यह सिक्का सामान्य चलन का नहीं बल्कि एक दुर्लभ स्मारक सिक्का है, जो भारतीय स्वतंत्रता संग्राम और राष्ट्रीय भावना का प्रतीक माना जाता है. अजय गर्ग के संग्रहालय में मौजूद यह सिक्का संग्रह प्रेमियों के लिए विशेष आकर्षण का केंद्र बना हुआ है.
इस 150 रुपये के स्मारक सिक्के के एक तरफ राष्ट्रीय चिन्ह अशोक स्तंभ के साथ सत्यमेव जयते अंकित है. वहीं दूसरी तरफ अंग्रेज अफसरों को भारतीयों पर गोली चलाते हुए दर्शाया गया है, जो स्वतंत्रता संग्राम के संघर्ष और बलिदान को दर्शाता है. यह सिक्का भारतीय इतिहास के उस दौर की याद दिलाता है, जब देश आजादी के लिए संघर्ष कर रहा था. भारत सरकार द्वारा यह 32 ग्राम वजनी सिक्का कॉपर, निकल और जिंक से निर्मित किया गया है.
वंदे मातरम और राष्ट्रीय भावनामुद्रा संग्रहकर्ता अजय गर्ग बताते हैं कि यह सिक्का बंकिम चंद्र चट्टोपाध्याय द्वारा वर्ष 1875 में लिखे गए राष्ट्रगीत वंदे मातरम के 150 वर्ष पूरे होने के उपलक्ष्य में जारी किया गया है. उनका कहना है कि वंदे मातरम केवल एक गीत नहीं, बल्कि स्वतंत्रता आंदोलन की आत्मा है. इस सिक्के पर अंकित दृश्य हमारे वीर सेनानियों के बलिदान को सजीव रूप में प्रस्तुत करता है और युवाओं में जोश, जज्बा और देशप्रेम की भावना को मजबूत करता है.
डाक टिकट और स्मारक सिक्कों का महत्वअजय गर्ग बताते हैं कि इससे पहले भी भारत सरकार वंदे मातरम विषय पर डाक टिकट जारी कर चुकी है. देशप्रेम से जुड़े विषयों पर सिक्के और डाक टिकट जारी होना हर भारतीय के लिए गर्व की बात है. उनका कहना है कि जब इस तरह के स्मारक सिक्के और डाक टिकट संग्रह में शामिल होते हैं तो न केवल संग्रह की शोभा बढ़ती है, बल्कि देशभक्ति की भावना भी और प्रबल होती है.
युवाओं और बच्चों के लिए प्रेरणाअजय गर्ग आगे कहते हैं कि जब वे दुर्लभ सिक्कों और डाक टिकटों की प्रदर्शनी लगाते हैं तो बड़ी संख्या में बच्चे इन्हें देखने आते हैं. इससे बच्चों को भारत की विरासत, इतिहास और परंपरा के बारे में जानकारी मिलती है. उनके अनुसार ये सिक्के और डाक टिकट केवल धातु या कागज के टुकड़े नहीं, बल्कि भारत के गौरवशाली इतिहास और संस्कृति के प्रतीक हैं.
रिकॉर्ड और समर्पणअजय गर्ग बताते हैं कि उनके संग्रह में वर्ष 1964 से अब तक भारत सरकार द्वारा जारी सभी स्मारक सिक्के और डाक टिकट सुरक्षित मौजूद हैं. मुद्रा और डाक टिकट संग्रह के क्षेत्र में उनके नाम इंडिया बुक ऑफ रिकॉर्ड्स, लिम्का बुक ऑफ रिकॉर्ड्स सहित कई राष्ट्रीय रिकॉर्ड दर्ज हैं. यह उनके समर्पण और वर्षों की मेहनत का प्रमाण है.
About the AuthorAnand Pandey
नाम है आनंद पाण्डेय. सिद्धार्थनगर की मिट्टी में पले-बढ़े. पढ़ाई-लिखाई की नींव जवाहर नवोदय विद्यालय में रखी, फिर लखनऊ में आकर हिंदी और पॉलीटिकल साइंस में ग्रेजुएशन किया. लेकिन ज्ञान की भूख यहीं शांत नहीं हुई. कल…और पढ़ें
Location :
Dhaulpur,Rajasthan
First Published :
December 25, 2025, 16:34 IST
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150 का ऐसा सिक्का जो आम नहीं, धौलपुर के संग्रहालय में छुपा है आज़ादी का संघर्ष



