अरबपति ने बिना पूछे खोद डाली आदिवासियों की जमीन, कोर्ट दिलवाएगा ₹14353192500 का हर्जाना

विकास और औद्योगीकरण की अंधी दौड़ में अक्सर आदिवासियों के जल, जंगल और जमीन की बलि चढ़ा दी जाती है. ऑस्ट्रेलिया की एक अदालत ने एक ऐसा ऐतिहासिक फैसला सुनाया है, जिसने दुनिया भर की बड़ी खनन कंपनियों की नींद उड़ा दी है. करीब दो दशक (20 साल) तक चली एक लंबी कानूनी लड़ाई के बाद, फेडरल कोर्ट ने दिग्गज खनन कंपनी फोर्टेस्क्यू को यिंडजिबरंडी समुदाय को 150 मिलियन ऑस्ट्रेलियाई डॉलर (₹76,55,28,26,24,000) का रिकॉर्ड मुआवजा देने का आदेश दिया है.
अदालत ने पाया कि कंपनी ने जमीन के असली और पारंपरिक मालिकों से पूछे बिना ही उनके इलाके में अंधाधुंध खनन किया. यह फैसला आसान भाषा में उन सभी बड़ी कंपनियों के लिए एक कड़ा संदेश है जो नियमों को ताक पर रखकर मनमानी करते हैं.
क्या है पूरा विवाद? बिना पूछे कैसे शुरू हुआ काम?
अरबपति एंड्रयू फॉरेस्ट द्वारा बनाई गई लौह अयस्क कंपनी फोर्टेस्क्यू ने 2013 में पश्चिमी ऑस्ट्रेलिया के पिलबारा क्षेत्र में स्थित ‘सोलोमन हब’ में खनन शुरू किया था. कंपनी ने राज्य सरकार और एक लोकल ग्रुप से तो इजाजत ले ली, लेकिन उन्होंने ‘यिंडजिबरंडी न्गुरा एबोरिजिनल कॉरपोरेशन’ से कोई सहमति नहीं ली. यह वही संस्था है जिसे कोर्ट ने इस इलाके का असली और इकलौता मालिक माना है.
जस्टिस स्टीफन बर्ली ने मंगलवार को अपने फैसले में कहा कि फोर्टेस्क्यू को सांस्कृतिक नुकसान (Cultural Loss) के लिए 150 मिलियन डॉलर और आर्थिक नुकसान के लिए 100,000 डॉलर चुकाने होंगे. यह ऑस्ट्रेलिया के मूल निवासी कानूनों (Native Title Laws) के तहत अब तक का सबसे बड़ा मुआवजा है.
80 अरब डॉलर की कमाई, लेकिन आदिवासियों की ‘नो-एंट्री’
पर्थ से लगभग 1500 किलोमीटर दूर स्थित यह खदान कंपनी के लिए सोने की खान साबित हुई है. जब से काम शुरू हुआ है, इस खदान ने कंपनी को करीब ₹76,55,28,26,24,000 की बंपर कमाई करवाई है. काम इतना फैला कि 135 वर्ग किलोमीटर से ज्यादा जमीन पर बाड़ लगा दी गई, जहां अब खुद यिंडजिबरंडी लोग भी नहीं जा सकते.
खूब पैसे छाप रही हैं कंपनियां
जस्टिस बर्ली ने कहा, ‘खदान में 24 घंटे और सातों दिन काम चलता है, जिससे कंपनी और सरकार दोनों खूब पैसा छाप रहे हैं.’ उन्होंने माना कि आदिवासियों का अपनी जमीन से जो गहरा और आत्मीय रिश्ता था, वह इस खनन से पूरी तरह खत्म हो गया. कोर्ट को बताया गया कि काम के दौरान 240 विरासतों को उनकी जगह से हटा दिया गया और 140 पवित्र सांस्कृतिक स्थलों को हमेशा के लिए मिट्टी में मिला दिया गया.
यिंडजिबरंडी समुदाय के एक गवाह मिडलटन चीदी ने अपना दर्द बयां करते हुए कोर्ट को बताया: ‘खदान ने हमसे हमारा सब कुछ छीन लिया है – हमारा घर चला गया, हमारी आत्माएं चली गईं, पानी खत्म हो गया, गुफाएं ढह गईं, और हमारे पूर्वजों की हड्डियों को खदान की क्रशर मशीनों में पीस दिया गया.’
इसे ‘मूंगफली’ क्यों कह रहे हैं?
इतना बड़ा जुर्माना लगने के बाद भी यिंडजिबरंडी समुदाय के लोग बेहद निराश हैं. दरअसल, समुदाय ने 1.8 अरब डॉलर (₹76,55,28,26,24,000) के मुआवजे की मांग की थी. उनका तर्क था कि यह खदान की कुल कमाई का सिर्फ एक प्रतिशत हिस्सा है और 250 से ज्यादा सांस्कृतिक स्थलों की तबाही के बदले यह मांग बिल्कुल जायज है. दूसरी तरफ, कंपनी सिर्फ 8 मिलियन डॉलर देकर मामला रफा-दफा करना चाहती थी.
एक बुजुर्ग महिला वेंडी ह्यूबर्ट ने इस मुआवजे को फोर्टेस्क्यू की अथाह कमाई के सामने सिर्फ ‘मूंगफली’ करार दिया. कोर्ट के बाहर जूडिथ कोपिन नाम की महिला ने पत्रकारों से कहा, ‘वे हमारी जमीन को मुफ्त में खोदते हैं और बदले में हमें ठेंगा मिलता है. वे हमारी जमीन से टनों सामान ले जाते हैं और हमारे हाथ क्या आता है? कुछ नहीं.’ समुदाय के नेता माइकल वुडले ने साफ कर दिया है कि उनकी यह लड़ाई अभी खत्म नहीं हुई है. उन्होंने कहा, ‘हम यहां तक आकर रुकने वाले नहीं हैं, हम जीवन भर लड़ते आए हैं और आगे भी लड़ेंगे.’
कोर्ट ने फोर्टेस्क्यू कंपनी पर इतना बड़ा जुर्माना क्यों लगाया है? फेडरल कोर्ट ने कंपनी पर 150 मिलियन डॉलर का जुर्माना इसलिए लगाया है क्योंकि उन्होंने यिंडजिबरंडी समुदाय की सहमति के बिना उनकी जमीन पर खनन किया और उनके 140 से ज्यादा पवित्र स्थलों को नष्ट कर दिया.
यिंडजिबरंडी समुदाय इस 150 मिलियन डॉलर के ऐतिहासिक फैसले से निराश क्यों है? समुदाय इस फैसले से इसलिए निराश है क्योंकि उन्होंने 1.8 अरब डॉलर की मांग की थी. कंपनी ने इस खदान से 80 अरब डॉलर की भारी भरकम कमाई की है, ऐसे में समुदाय को यह मुआवजा ‘मूंगफली के दाने’ के समान लग रहा है.
इस खदान के कारण आदिवासियों को क्या नुकसान उठाना पड़ा? खनन की वजह से आदिवासियों के 240 विरासत स्थलों को हटा दिया गया और 140 सांस्कृतिक स्थलों को क्रशर मशीनों में नष्ट कर दिया गया. इसके अलावा, 135 वर्ग किलोमीटर जमीन पर बाड़ लगाकर उन्हें उनके ही घर से बेदखल कर दिया गया.
ऑस्ट्रेलिया के मूल निवासी भूमि कानून (Native Title Laws) क्या हैं? यह ऑस्ट्रेलिया का वह कानूनी ढांचा है जो वहां के मूल निवासियों (आदिवासियों) के उन जमीनों पर अधिकारों को मान्यता देता है, जहां उनके पूर्वज हजारों सालों से रहते आए हैं.



