Making Of Lac Bangles I kota news I rajasthan news I कोटा में बनने वाली लाख की चूड़ियां

Last Updated:June 17, 2026, 21:10 IST
Making Of Lac Bangles: भारतीय महिलाओं के श्रृंगार में विशेष स्थान रखने वाली लाख की चूड़ियां आज भी कोटा के कारीगरों के हाथों से पारंपरिक तरीके से तैयार की जा रही हैं. चापड़ी को गर्म करने से लेकर रंग मिलाने, आकार देने और आकर्षक डिजाइन बनाने तक की पूरी प्रक्रिया हाथों से की जाती है. तेज गर्मी और भट्ठियों की तपिश के बीच कारीगर अपनी वर्षों पुरानी कला को जीवित रखे हुए हैं. उनकी मेहनत और हुनर से तैयार होने वाली ये चूड़ियां न केवल महिलाओं की खूबसूरती बढ़ाती हैं, बल्कि राजस्थान की समृद्ध हस्तशिल्प परंपरा की पहचान भी हैं.
कोटा. रंग-बिरंगी लाख की चूड़ियां भारतीय महिलाओं के श्रृंगार का महत्वपूर्ण हिस्सा मानी जाती हैं. शादी-विवाह, तीज-त्योहार और अन्य विशेष अवसरों पर लाख के चूड़ों की मांग सबसे अधिक रहती है. इन खूबसूरत चूड़ियों को तैयार करने के पीछे कारीगरों की वर्षों की मेहनत, अनुभव और पारंपरिक कला छिपी होती है. कोटा में आज भी कई परिवार पीढ़ियों से लाख की चूड़ियां बनाने के व्यवसाय से जुड़े हुए हैं और हाथों से इनका निर्माण कर रहे हैं. लाख के चूड़े बनाने वाले कारीगर मोहम्मद फारूक बताते हैं कि इस प्रक्रिया की शुरुआत कच्चे माल से होती है. चूड़ी बनाने के लिए उपयोग में आने वाला कच्चा माल, जिसे स्थानीय भाषा में चापड़ी कहा जाता है, जयपुर से मंगवाया जाता है. इस कच्चे माल को सबसे पहले बड़ी कढ़ाई में डालकर गर्म किया जाता है. गर्म होने पर यह मुलायम हो जाता है, जिसके बाद इसमें जरूरत के अनुसार विभिन्न रंग मिलाए जाते हैं. रंग मिलाने के बाद इस सामग्री को लगातार पकाया और तैयार किया जाता है ताकि उसका रंग और गुणवत्ता बेहतर हो सके. इसके बाद तैयार सामग्री को आकार देने की प्रक्रिया शुरू होती है. कारीगर इसे हाथों की सहायता से लंबी डंडियों के रूप में तैयार करते हैं. फिर इन डंडियों को दोबारा गर्म कर गोल आकार दिया जाता है और धीरे-धीरे चूड़ी का स्वरूप तैयार किया जाता है.
इसके बाद डिजाइनिंग का काम किया जाता है. बाजार की मांग और फैशन के अनुसार साधारण, डिजाइनर और विभिन्न रंगों की चूड़ियां बनाई जाती हैं. मोहम्मद फारूक बताते हैं कि उनका परिवार करीब 45 वर्षों से इस व्यवसाय से जुड़ा हुआ है. उन्होंने कहा कि लाख की चूड़ियां बनाना बेहद मेहनत और धैर्य का काम है. गर्मी के मौसम में भी कारीगरों को लगातार गर्म कढ़ाइयों और भट्टियों के सामने काम करना पड़ता है. लगभग 55 से 60 डिग्री तापमान के बीच यह कार्य किया जाता है. इसके बावजूद कारीगर अपनी कला को जीवित रखने के लिए पूरी लगन से काम करते हैं. एक दिन में कारीगर करीब 120 जोड़ी चूड़ियां तैयार कर लेते हैं. वहीं कारीगर अब्दुल रशीद बताते हैं कि लाख की चूड़ी बनाने की प्रक्रिया कई चरणों में पूरी होती है. सबसे पहले चापड़ी को गर्म करके दांडी तैयार की जाती है. इसके बाद उस दांडी को गलाकर गोल आकार दिया जाता है, फिर उसमें रंग मिलाए जाते हैं और अलग-अलग आकार की चूड़ियां बनाई जाती हैं. चूड़ियों को अंतिम रूप देने के बाद उन पर डिजाइन और सजावट का कार्य किया जाता है. पूरी तरह तैयार होने के बाद इन्हें दुकानों पर बिक्री के लिए भेज दिया जाता है.
अब्दुल रशीद के अनुसार इस पूरे काम में किसी प्रकार की मशीन का उपयोग नहीं किया जाता. चूड़ी बनाने से लेकर डिजाइन तैयार करने तक का हर चरण हाथों से किया जाता है. यही कारण है कि लाख की चूड़ियों में कारीगरों की कला और मेहनत साफ दिखाई देती है. चूड़ियों को आकर्षक बनाने के लिए करीब 10 से 15 प्रकार के रंगों का उपयोग किया जाता है. सीजन और ग्राहकों की पसंद के अनुसार नए डिजाइन भी तैयार किए जाते हैं. आज आधुनिक मशीनों और फैक्ट्री उत्पादों के दौर में भी लाख की चूड़ियों की लोकप्रियता बनी हुई है. पारंपरिक तरीके से तैयार होने वाली ये चूड़ियां न केवल महिलाओं के श्रृंगार को बढ़ाती हैं, बल्कि राजस्थान की समृद्ध हस्तशिल्प कला और कारीगरों की मेहनत का भी प्रतीक हैं.
About the AuthorMonali Paul
नमस्ते मेरा नाम मोनाली है, पेशे से पत्रकार हूं, ख़बरें लिखने का काम है. लेकिन कैमरे पर समाचार पढ़ना बेहद पसंद है. 2016 में पत्रकारिता में मास्टर्स करने के बाद पांच साल कैमरे पर न्यूज़ पढ़ने के साथ डेस्क पर खबरे…और पढ़ें
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