इस देश की वायुसेना में सिर्फ एक हवाई जहाज़, जानिए कैसे करता है अपनी हवाई सुरक्षा

Last Updated:June 16, 2026, 17:30 IST
क्या आप जानते हैं कि यूरोप में एक ऐसा देश भी है जिसकी वायुसेना में सिर्फ एक ही विमान है? उसकी वायुसेना में फिलहाल सिर्फ एक Airbus A400M Atlas सैन्य विमान है, 52 साल बाद उसे नया विमान मिला था, पूरी कहानी
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दुनिया की बड़ी सैन्य शक्तियों की बात होती है तो अमेरिका, रूस, चीन और भारत जैसे देशों का नाम सामने आता है, जिनकी वायुसेनाओं में सैकड़ों लड़ाकू विमान मौजूद हैं. लेकिन क्या आप जानते हैं कि यूरोप में एक ऐसा देश भी है जिसकी वायुसेना में सिर्फ एक ही विमान है?
यह देश है “लक्ज़मबर्ग (Luxembourg)”. पश्चिमी यूरोप में स्थित यह छोटा सा देश क्षेत्रफल और जनसंख्या दोनों के लिहाज से दुनिया के सबसे छोटे देशों में गिना जाता है. दिलचस्प बात यह है कि इसकी वायुसेना के पास केवल एक सैन्य विमान है, जिसके कारण इसे दुनिया की सबसे छोटी वायु सेनाओं में शामिल किया जाता है. लेकिन पिछले कुछ वर्षों में देश ने अपनी हवाई क्षमताओं का विस्तार किया है.
आखिर कौन सा है वह विमान?2020 में आधिकारिक रूप से स्थापित एयर कंपोनेंट (Air Component) में फिलहाल एक Airbus A400M Atlas सैन्य परिवहन विमान शामिल है, जिसे दुनिया के सबसे आधुनिक सैन्य परिवहन विमानों में गिना जाता है. यह विमान ब्रसेल्स के पास स्थित मेल्सब्रोक एयर बेस (Melsbroek Air Base) में तैनात है. हैरानी की बात यह है कि वर्तमान में लक्ज़मबर्ग की सशस्त्र सेनाओं के पास अपना कोई समर्पित सैन्य एयरबेस नहीं है.
इसके अलावा लक्ज़मबर्ग ने दो Airbus H145M सैन्य हेलीकॉप्टर, एक Airbus A330 MRTT (Multi Role Tanker Transport) विमान और कई मानव रहित विमान (UAVs) भी खरीदे हैं. आने वाले वर्षों में देश सामरिक एयरलिफ्ट और समुद्री निगरानी के लिए अतिरिक्त विमान और हेलीकॉप्टर खरीदने की भी योजना बना रहा है.
52 साल बाद फिर मिला अपना विमानदिलचस्प बात यह है कि लक्ज़मबर्ग ने 1968 में अपने अंतिम तीन Piper PA-18 Super Cub विमानों को सेवा से हटा दिया था. इसके बाद देश के पास कोई सैन्य विमान नहीं बचा. वर्ष 2001 में सरकार ने एक A400M खरीदने का फैसला किया, लेकिन कार्यक्रम में देरी के कारण इसकी डिलीवरी अक्टूबर 2020 में हुई. यानी लक्ज़मबर्ग को अपना नया सैन्य विमान पाने के लिए पूरे 52 साल इंतजार करना पड़ा.
लड़ाकू विमान क्यों नहीं हैं?लक्ज़मबर्ग की आबादी करीब 7 लाख के आसपास है और उसका क्षेत्रफल भी बेहद छोटा है. ऐसे में देश को बड़े पैमाने पर लड़ाकू विमानों की जरूरत नहीं पड़ती. इसके अलावा लक्ज़मबर्ग NATO (नॉर्थ अटलांटिक ट्रीटी ऑर्गनाइजेशन) का सदस्य है. किसी भी बाहरी खतरे की स्थिति में NATO के अन्य सदस्य देश उसकी सुरक्षा में मदद करते हैं. यही कारण है कि लक्ज़मबर्ग ने अपनी रक्षा नीति को सीमित लेकिन आधुनिक सैन्य क्षमताओं पर केंद्रित रखा है. देश साइबर सुरक्षा, सैन्य उपग्रहों और अंतरराष्ट्रीय अभियानों में सहयोग पर अधिक ध्यान देता है.
About the AuthorMohit Chauhan
Mohit Chauhan is an Editorial Researcher with over eight years of experience in digital and television journalism, specializing in Defence, Weapons, International Relations, and Strategic Military Affairs. He c…और पढ़ें
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