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500 साल पुराने कैमल महामाया मंदिर का चमत्कार I sikar news I rajasthan news

Last Updated:July 07, 2026, 14:01 IST

सीकर के खंडेला क्षेत्र के गुरारा गांव में अरावली की तलहटी में स्थित 500 साल पुराना कैमल महामाया माता मंदिर आस्था का प्रमुख केंद्र है. बच्चों की माता के नाम से प्रसिद्ध इस मंदिर में बच्चों की तुतलाहट, गूंगापन और अन्य समस्याओं के दूर होने की मान्यता है. कदम के प्राचीन पेड़ और विशेष पूजा परंपराओं से जुड़े इस धाम में राजस्थान सहित कई राज्यों से श्रद्धालु पहुंचते हैं.

सीकर. जिले के खंडेला क्षेत्र की अरावली पहाड़ियों की तलहटी में बसे गुरारा गांव में 500 साल पुराना कैमल महामाया माता का एक चमत्कारी मंदिर मौजूद है. कैमल महामाया को बच्चों की माता के नाम से जाना जाता है. मान्यता है कि यहां विशेष पूजा अर्चना करने से बच्चों की तुतलाहट, गूंगापन और सामान्य लकवा जैसी समस्या दूर हो जाती है. यही कारण है कि इस मंदिर में बड़ों से ज्यादा बच्चे अधिक दिखाई देते हैं, मंदिर के पुजारी ने बताया कि प्रत्येक वर्ष भादवा शुद्धि की सप्तमी को कैमल महामाया माता का वार्षिक मेला लगता है.

पुजारी ने बताया कि यहां पर करीब 500 साल पुराना कदम का पेड़ मौजूद है. विवाहिता इस कदम के पेड़ के नीचे से निकाल कर माता की परिक्रमा कर धोक लगती है. मान्यता है कि ऐसा करने से विवाहिता को मातृत्व का आशीर्वाद मिलता है और देवी खुद उनके बच्चों की रक्षा करती है. उन्होंने बताया कि इस मंदिर में केवल सीकर जिले से ही नहीं बल्कि राजस्थान सहित अन्य प्रदेशों से भी भक्त आते हैं.

चबूतरे पर महामाया माता थी विराजमानगुरारा गांव के 70 वर्षीय बुजुर्ग रामकिशोर ने बताया कि करीब 500 साल पहले एक कदम के पेड़ के नीचे चबूतरे पर महामाया माता विराजमान थी. वहां पर कीचड़ भरा रहता था इस कीचड़ में से माता की परिक्रमा कर महिलाएं मनौती मांगती थी. जैसे जैसे माता की महिमा बढ़ती गई वैसे वैसे भक्तों और भामाशाहों ने मिलकर उसी स्थान पर भव्य मंदिर बना है. उन्होंने बताया कि किसी महिला के बच्चा नहीं हो रहा होता है तो भादवा शुद्धि की छठ की रात्रि में विशेष पूजा अर्चना होती है, जिसमें महिला रात को माता और कदम के पेड़ की फेरी लगाती है.

गोशाला में 564 गायों की होती है सेवाइस गांव में गायों को सेवा के लिए महामाया गोशाला भी बनाई गई है. इसकी स्थापना 7 जुलाई 2011 को काठिया बाबा विश्वस्वरूप दास महाराज ने करवाई थी. खास बात ये है इसके निर्माण के समय एक भामाशाह ने उन्हें एक गाय दी थी. इसके 7 दिन बाद उनके पास 70 गाएं आ गई, अब गोशाला में 564 गोमाता की सेवा की जा रही है. मंदिर में आने वाले दान और भामाशाहों की मदद से इस गोशाला का संचालन होता है.

About the AuthorMonali Paul

नमस्ते मेरा नाम मोनाली है, पेशे से पत्रकार हूं, ख़बरें लिखने का काम है. लेकिन कैमरे पर समाचार पढ़ना बेहद पसंद है. 2016 में पत्रकारिता में मास्टर्स करने के बाद पांच साल कैमरे पर न्यूज़ पढ़ने के साथ डेस्क पर खबरे…और पढ़ें

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Sikar,Rajasthan

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