Rajasthan

Nagauri Ashwagandha: नागौर की अश्वगंधा क्यों है सबसे खास? जानिए इसके चमत्कारी औषधीय गुण

Last Updated:July 09, 2026, 08:43 IST

Nagauri Ashwagandha Health Benefits: नागौरी अश्वगंधा अब केवल आयुर्वेदिक औषधि ही नहीं, बल्कि राजस्थान की एक विशिष्ट पहचान भी बन चुकी है. इसकी जड़ों में औषधीय तत्वों की अधिक मात्रा होने के कारण आयुर्वेदिक दवा कंपनियां इसे प्राथमिकता देती हैं. डॉ. विनोद धायल के अनुसार, यह रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने, तनाव कम करने और शरीर को ऊर्जा देने में उपयोगी मानी जाती है. दिसंबर 2025 में GI टैग मिलने से इसकी ब्रांड वैल्यू और विश्वसनीयता बढ़ी है. विशेषज्ञों का मानना है कि इससे किसानों की आय बढ़ेगी और अंतरराष्ट्रीय बाजार में भी नई संभावनाएं खुलेंगी.

राजस्थान के नागौर की मिट्टी में उगने वाली नागौरी अश्वगंधा अपनी उच्च गुणवत्ता और औषधीय गुणों के कारण देशभर में विशेष पहचान रखती है. आयुर्वेदाचार्य डॉ. विनोद धायल के अनुसार, नागौरी अश्वगंधा को अन्य क्षेत्रों में उगाई जाने वाली अश्वगंधा की तुलना में अधिक प्रभावी माना जाता है. इसकी जड़ों में औषधीय तत्वों की मात्रा बेहतर होती है, जिससे आयुर्वेदिक दवाओं में इसकी मांग अधिक रहती है. रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने, तनाव कम करने और शरीर को ऊर्जा प्रदान करने जैसे गुणों के कारण नागौरी अश्वगंधा को आयुर्वेद में बेहद महत्वपूर्ण औषधीय पौधा माना जाता है.

आयुर्वेदाचार्य डॉ. विनोद धायल के अनुसार, नागौर की शुष्क जलवायु, कम वर्षा और रेतीली मिट्टी अश्वगंधा की खेती के लिए बेहद अनुकूल मानी जाती है. इन्हीं प्राकृतिक परिस्थितियों के कारण यहां उगने वाली नागौरी अश्वगंधा की जड़ों में अन्य क्षेत्रों की तुलना में अधिक औषधीय तत्व विकसित होते हैं. इसमें लगभग 8 से 10 प्रतिशत तक विथेनोलाइड्स और एल्केलॉयड्स पाए जाते हैं, जो कई अन्य किस्मों की तुलना में अधिक माने जाते हैं. यही विशेषता इसकी गुणवत्ता, औषधीय प्रभाव और बाजार में मांग को बढ़ाती है.

आयुर्वेदाचार्य डॉ. विनोद धायल ने बताया कि नागौरी अश्वगंधा की जड़ों में स्टार्च की मात्रा अधिक होती है और उनमें प्राकृतिक भंगुरता भी पाई जाती है, जो इसकी गुणवत्ता की महत्वपूर्ण पहचान मानी जाती है. यही कारण है कि इसकी जड़ों को औषधि निर्माण के लिए अधिक उपयुक्त माना जाता है. आयुर्वेदिक दवाएं बनाने वाली कंपनियों में इसकी मांग लगातार बनी रहती है, क्योंकि इससे तैयार उत्पाद अधिक प्रभावी और गुणवत्तापूर्ण माने जाते हैं. इसी विशेषता के कारण नागौरी अश्वगंधा देशभर में अलग पहचान रखती है.

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आयुर्वेद में अश्वगंधा को जीवन शक्ति बढ़ाने वाली प्रमुख औषधीय जड़ी-बूटी माना गया है. आयुर्वेदाचार्य डॉ. विनोद धायल के अनुसार, नागौरी अश्वगंधा का उपयोग शारीरिक कमजोरी दूर करने, मानसिक तनाव कम करने, रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने और मानसिक संतुलन बनाए रखने में किया जाता है. इसे प्राकृतिक ऊर्जा बढ़ाने वाली प्रभावी औषधि भी माना जाता है. नियमित और विशेषज्ञ की सलाह के अनुसार सेवन करने पर यह शरीर को ताकत देने, थकान कम करने तथा समग्र स्वास्थ्य को बेहतर बनाए रखने में सहायक हो सकती है.

नागौरी अश्वगंधा को दिसंबर 2025 में भौगोलिक संकेतक (GI) टैग मिलने के बाद इसकी पहचान को राष्ट्रीय स्तर पर नई मजबूती मिली है. इस सम्मान ने इसकी विशिष्ट गुणवत्ता और भौगोलिक पहचान को आधिकारिक मान्यता प्रदान की है. GI टैग मिलने से नागौरी अश्वगंधा की ब्रांड वैल्यू बढ़ी है, जिससे किसानों और उत्पादकों को भी लाभ मिलने की उम्मीद है. साथ ही देशभर में इसकी मांग और बाजार में विश्वसनीयता को भी नई पहचान मिली है.

जीआई टैग मिलने का सबसे बड़ा लाभ यह है कि अब नकली या गलत नाम से बेची जाने वाली अश्वगंधा पर रोक लगाने में मदद मिलेगी. इससे असली नागौरी अश्वगंधा की पहचान सुरक्षित रहेगी और उसकी विशिष्टता बनी रहेगी. किसानों को उनकी उपज का बेहतर मूल्य मिलने की संभावना बढ़ेगी, जबकि उपभोक्ताओं को प्रमाणिक और गुणवत्तापूर्ण उत्पाद उपलब्ध हो सकेंगे. इससे स्थानीय उत्पादकों और आयुर्वेदिक उद्योग दोनों को लाभ मिलने की उम्मीद है.

विशेषज्ञों का मानना है कि GI टैग मिलने के बाद नागौरी अश्वगंधा की मांग देश के साथ-साथ अंतरराष्ट्रीय बाजार में भी बढ़ने की संभावना है. इससे नागौर के किसानों को बेहतर कीमत और नए बाजार मिल सकते हैं. साथ ही राजस्थान की यह पारंपरिक औषधीय फसल वैश्विक स्तर पर अपनी अलग पहचान मजबूत कर सकती है. बढ़ती मांग से निर्यात के अवसर भी बढ़ेंगे, जिससे स्थानीय कृषि अर्थव्यवस्था और औषधीय उत्पादों के क्षेत्र को नया प्रोत्साहन मिलने की उम्मीद है.

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