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अब आग नहीं बनेगी मौत का जाल! IIT जोधपुर की स्मार्ट टेक्नोलॉजी पहले ही देगी खतरे की चेतावनी

Last Updated:July 09, 2026, 12:09 IST

IIT Jodhpur Smart Safety: IIT जोधपुर के वैज्ञानिक डॉ. पी. रवि प्रकाश के नेतृत्व में एक एडवांस्ड फायर सेफ्टी टेक्नोलॉजी विकसित कर रहे हैं, जो आग लगने से पहले जोखिम का आकलन करेगी और आग के बाद इमारतों की मजबूती की जांच करेगी. इस तकनीक में बिल्डिंग इंफॉर्मेशन मॉडलिंग (BIM), डिजिटल ट्विन्स और IoT जैसे कंप्यूटेशनल टूल्स का उपयोग किया गया है. इससे इमारतों के डिजाइन से लेकर उनकी पूरी उम्र तक की डिजिटल निगरानी संभव होगी, जिससे भविष्य में आग लगने के बाद बिल्डिंग ढहने जैसे बड़े हादसों को रोका जा सकेगा.

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Jodhpur: देशभर में लगातार सामने आ रहे बिल्डिंग आग हादसों के बीच अब जोधपुर से एक ऐसी तकनीक विकसित की जा रही है, जो भविष्य में बड़ी तबाही को रोकने में अहम भूमिका निभा सकती है. IIT जोधपुर के वैज्ञानिक ऐसी एडवांस्ड फायर सेफ्टी टेक्नोलॉजी पर काम कर रहे हैं, जो आग लगने से पहले ही जोखिम का सटीक आकलन करेगी. यह तकनीक आग के दौरान इमारत के ढांचे के व्यवहार का विश्लेषण करेगी और आग बुझने के बाद यह बताएगी कि भवन कितना सुरक्षित बचा है.

फायर सेफ्टी के पारंपरिक नियमों से आगे बढ़ते हुए IIT जोधपुर की यह रिसर्च अब आग के बाद इमारतों की वास्तविक मजबूती को समझने पर केंद्रित है. सिविल एवं इंफ्रास्ट्रक्चर इंजीनियरिंग विभाग के असिस्टेंट प्रोफेसर डॉ. पी. रवि प्रकाश के नेतृत्व में शोधकर्ताओं की टीम ओपन-सोर्स डिजिटल प्लेटफॉर्म और एडवांस्ड कंप्यूटेशनल टूल विकसित कर रही है. परफॉर्मेंस-बेस्ड स्ट्रक्चरल फायर इंजीनियरिंग के तहत शोधकर्ता यह अध्ययन कर रहे हैं कि भीषण आग के दौरान और उसके बाद पूरी इमारत का ढांचा किस तरह प्रतिक्रिया देता है. इसके जरिए इंजीनियर पहले से ही संभावित संरचनात्मक नुकसान का अनुमान लगा सकेंगे, कमजोर हिस्सों की पहचान कर सकेंगे और भवनों के डिजाइन को अधिक सुरक्षित बना सकेंगे.

एडवांस्ड कंप्यूटेशनल मॉडल से नुकसान का सटीक आकलनशोध के दौरान ऐसे एडवांस्ड कंप्यूटेशनल मॉडल विकसित किए गए हैं, जो इमारत के भीतर आग के फैलाव का सिमुलेशन करने में सक्षम हैं. ये मॉडल अलग-अलग परिस्थितियों में स्ट्रक्चरल कंपोनेंट्स के व्यवहार का विश्लेषण करने और आग के बाद हुए नुकसान का सटीक आकलन करते हैं. यह तकनीक भविष्य में किसी भी आग हादसे के बाद इमारत की सुरक्षा का तेजी से मूल्यांकन करने और बड़े हादसों का जोखिम कम करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है. इसकी मदद से इंजीनियर, नीति निर्माता और आपदा प्रबंधन एजेंसियां किसी इमारत के ढहने की आशंका का पहले से आकलन कर सकेंगी.

डिजाइन से लेकर पूरी उम्र तक रहेगा डिजिटल कंट्रोलIIT जोधपुर की यह रिसर्च केवल फायर सेफ्टी तक सीमित नहीं है, बल्कि इमारतों के पूरे जीवनचक्र को अधिक सुरक्षित, स्मार्ट और टिकाऊ बनाने की दिशा में भी काम कर रही है. इसके लिए शोधकर्ता बिल्डिंग इंफॉर्मेशन मॉडलिंग (BIM), डिजिटल ट्विन्स, इंटरनेट ऑफ थिंग्स (IoT) और ज्योग्राफिक इंफॉर्मेशन सिस्टम (GIS) जैसी अत्याधुनिक डिजिटल तकनीकों को एकीकृत कर रहे हैं.

इन तकनीकों की मदद से भवनों का वर्चुअल मॉडल तैयार किया जा सकेगा, जिससे निर्माण गुणवत्ता की लगातार निगरानी होगी. साथ ही सस्टेनेबिलिटी का सटीक आकलन किया जा सकेगा और समय रहते संभावित खराबी की पहचान कर मेंटेनेंस की योजना बनाई जा सकेगी. इससे इंजीनियर और संबंधित एजेंसियां किसी भी इमारत के डिजाइन, निर्माण और पूरी सर्विस लाइफ के दौरान उसकी सुरक्षा व प्रदर्शन का बेहतर प्रबंधन कर सकेंगी.

About the Authorvicky Rathore

Vicky Rathore (born July 25, 1994) is a multimedia journalist and digital content specialist currently working with Rajasthan. I have over 8 years of experience in digital media, where I specialize in cr…और पढ़ें

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