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14 दिन में बनती थी सिर्फ एक सेकंड की फिल्म, रिलीज होते ही निकली महाब्लॉकबस्टर, कहानी ने जीता दिल

Last Updated:June 24, 2026, 20:47 IST

हर सफल फिल्म के पीछे डायरेक्ट का विजन, उसका धैर्य और पूरी यूनिट का अथक प्रयास होता है. 14 दिन में अगर सिर्फ एक सेकंड की फिल्म बने तो ऐसी मूवी के निर्माण में कितनी मेहनत करनी पड़ी होगी, इसका अंदाजा लगाना आसान नहीं. बस एक गलती पर डायरेक्टर की पूरी मेहनत बर्बाद हो जाती थी. लंबे प्रयास के बाद जब फिल्म रिलीज हुई तो इतिहास रच दिया. फिल्म महाब्लॉकबस्टर साबित हुई. फिल्म की कहानी सबको पता था लेकिन इसका प्रजेंटेशन कुछ ऐसा था कि हर किसी को दीवाना बना लिया.

साल था 2019. एआई का दौर भारत में शुरू नहीं हुआ था, तब डायरेक्टर अश्विन कुमार के मन में एक फिल्म बनाने का आइडिया आया. उन्होंने फिल्म पर रिसर्च करना शुरू किया. रिसर्च-डेलपमेंट और फिल्म को बनाने में 6 साल का समय लगा. इस फिल्म को बनाने में कितना अथक प्रयास करना पड़ा इसका अंदाजा आप इस बात से लगा सकते कि 14 दिन में सिर्फ एक सेकंड की रील तैयार होती थी. जो रील तैयार होती थी, अगर वो पसंद नहीं आई तो फिर से 14 दिन मेहनत करनी पड़ती थी. जब फिल्म रिलीज हुई तो हिंदी सिनेमा के स्वर्णिम इतिहास में अपना नाम दर्ज कराया. जी हां!, हम 2025 में रिलीज एनिमेटेड मूवी ‘महावतार नरसिम्हा’ की बात कर रहे हैं.

अक्सर किसी फिल्म के फ्लॉप होने पर यह तर्क दिया जाता है कि मूवी की कहानी घिसी-पिटी थी. बहुत ही प्रिटेक्बल थी. अगर किसी फिल्म की कहानी सबको पता हो और फिर भी फिल्म बॉक्स ऑफिस पर सुपर ब्लॉकबस्टर साबित हो तो इसे क्या कहा जाएगा. फिल्म का प्रस्तुतिकरण मायने रखता है. कहानी का प्रजेंटेंशन, संवाद, स्क्रीनप्ले जितना अच्छा होगा, फिल्म दर्शकों के दिल-दिमाग में उतना ही असर छोड़ेगी. ऐसा ही कुछ ‘महावतार नरसिम्हा’ के साथ हुआ.

‘महावतार नरसिम्हा’ 25 जुलाई 2025 को भारत में रिलीज हुई थी. डायरेक्टर अश्विनी कुमार थे. स्क्रिप्ट विष्णु पुराण-नरसिंह पुराण और श्रीमद्भागवत पुराण से ली गई थी. तीनों पुराण की कहानियों को राइटर जयपर्णा दास ने कुछ इस अंदाज में लिखा था कि पहले ही सीन से फिल्म दर्शकों पर पकड़ बना लेती है. डायलॉग्स रुद्र प्रताप घोष ने लिखे थे.

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इस फिल्म का प्रोडक्शन क्लीम प्रोडक्शन के बैनर तले किया गया था. प्रोड्यूसर शिल्पा धवन, कुशल देसाई और चैतन्य देसाई थे. होम्बले फिल्म्स के प्रजेंटेटर थे. यह फिल्म महावतार सिनेमैटिक यूनिवर्स की पहली कड़ी है. होम्बले फिल्म्स ने इससे पहले ‘केजीएफ’, ‘सलार’ और ‘कांतारा’ जैसी फिल्में बनाई हैं.

इस फिल्म को बनाने में डायरेक्टर अश्विन कुमार को बहुत मेहनत करनी पड़ी. फिल्म का एक सेकंड बनाने में करीब दो हफ्ते का समय लग जाता था. अश्विनी कुमार ने अपने एक इंटरव्यू में कहा था कि एक इमेज को रेंडर होने में 4-10 घंटे को समय लगता था. इस तरह से 1 सेकेंड का वीडियो बनाने में 2 हफ्ते का समय लग जाता था. करीब 1 सेकेंड से 10 सेकेंड का वीडियो तैयार होता था. जब वो पसंद नहीं आता था तो आप फिर से वही प्रोसेस करते थे. यानी ये वाला काम पूरा जीरो हो जाता था.

‘महावतार नरसिम्हा’ फिल्म की कहानी दर्शकों के लिए नई नहीं थी. नया तो इसका प्रजेंटेंशन. डायलॉग, भक्त प्रह्लाद का कैरेक्टर. दरअसल, असुर राजा हिरण्यकश्यप को भगवान विष्णु के नरसिंह अवतार ने मारा था. उसने ब्रह्मा से वरदान हासिल किया था कि कि ना तो दिन-रात, न घर के अंदर-बाहर, न किसी अस्त्र-शस्त्र से, न मनुष्य-पशु द्वारा मारा जा सकता था. भगवान नरसिंह ने उसे चौखट पर गोधूलि के समय मारा था. यह कहानी सबको पता है लेकिन फिर भी ‘महावतार नरसिम्हा’ में डायरेक्टर अश्विन कुमार ने जिस तरह से फिल्म बनाई, उस पर दर्शक मंत्रमुग्ध हो गए.

‘महावतार नरसिम्हा’ फिल्म का बजट करीब 15-20 करोड़ रुपये था. यह भारत की सबसे ज्यादा कमाई करने वाली पहली एनिमेटेड फिल्म है. मूवी ने 350 करोड़ से भी ज्यादा की कमाई की. फिल्म बॉक्स ऑफिस पर महाब्लॉकबस्टर साबित हुई . फिल्म का कोई प्रमोशन नहीं किया गया. ‘महावतार नरसिम्हा’ ऐसे समय आई थी जब ‘सैयारा’ का जादू युवाओं के सिर पर चढ़कर बोल रहा था, फिर भी इस फिल्म ने वो कर दिखाया, जिसकी कल्पना किसी ने नहीं की थी. 

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