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Pali Temple | Famous Shiv Temple | पाली का सोमनाथ मंदिर: 900 साल पुराना शिवधाम, सावन में उमड़ती है लाखों श्रद्धालुओं की आस्था

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सुल्तानों के निशाने पर था गुजरात, तब पाली में क्यों रखी गई इस शिवलिंग की नींव?

Last Updated:July 09, 2026, 21:46 IST

Pali Somnath Temple In Sawan Month: राजस्थान के पाली शहर में स्थित सोमनाथ महादेव मंदिर केवल एक प्राचीन शिवालय नहीं, बल्कि इतिहास, आस्था और स्थापत्य कला का अनूठा संगम माना जाता है. करीब 900 वर्ष पहले चालुक्य वंश के राजा कुमारपाल सोलंकी द्वारा निर्मित यह मंदिर आज भी अपनी भव्यता और धार्मिक महत्व के लिए प्रसिद्ध है. स्थानीय मान्यताओं और ऐतिहासिक संदर्भों के कारण इसे ‘पाली का सोमनाथ’ भी कहा जाता है. मंदिर की सबसे बड़ी पहचान गर्भगृह में सदियों से निरंतर प्रज्वलित अखंड ज्योत है, जिसके दर्शन के लिए वर्षभर श्रद्धालु पहुंचते हैं. सावन के महीने में यहां विशेष पूजा-अर्चना, आकर्षक श्रृंगार और भव्य धार्मिक आयोजन होते हैं. देश के विभिन्न राज्यों के साथ-साथ विदेशों से भी विशेष फूल मंगवाकर भगवान शिव का अलौकिक श्रृंगार किया जाता है. प्राचीन नागर शैली की वास्तुकला, पत्थरों पर बारीक नक्काशी और मंदिर से जुड़ी ऐतिहासिक कथाएं इसे धार्मिक पर्यटन का प्रमुख केंद्र बनाती हैं. सावन के दौरान यह मंदिर आस्था, संस्कृति और विरासत का जीवंत संगम बन जाता है, जहां हर दिन हजारों श्रद्धालु भगवान शिव के दर्शन के लिए पहुंचते हैं.

पाली. सावन का महीना यानी शिव भक्ति का वो समंदर जिसमें पूरा देश सराबोर है. लेकिन आज हम आपको किसी आम शिव मंदिर की कहानी नहीं सुनाने जा रहे बल्कि आज हम आपको लेकर चलेंगे मारवाड़ के उस ऐतिहासिक केंद्र में, जिसे ‘पाली का सोमनाथ’ कहा जाता है. एक ऐसा मंदिर, जिसका इतिहास सिर्फ पूजा-पाठ से नहीं, बल्कि भारत के उस सुलगते दौर से जुड़ा है जब विदेशी आक्रांताओं की नज़रें हमारे मंदिरों पर टिकी थीं. इतिहास की किताबों में आपने पढ़ा होगा कि गुजरात के सोमनाथ मंदिर पर महमूद गजनवी से लेकर कई सुल्तानों ने हमले किए. लेकिन क्या आप जानते हैं कि जब गुजरात का वो मूल मंदिर संकट में था, ठीक उसी दौर में यानी 12वीं सदी में गुजरात के चालुक्य राजा कुमारपाल सोलंकी ने पाली में इस सोमनाथ मंदिर की स्थापना क्यों की थी?

महमूद गजनवी के आक्रमण का साक्षी; गर्भगृह के पत्थरों पर आज भी हैं घावइस मंदिर का इतिहास बेहद संघर्षपूर्ण रहा है. इतिहास के जानकारों के अनुसार, जब क्रूर आक्रांता महमूद गजनवी ने गुजरात के प्रसिद्ध सोमनाथ मंदिर को लूटा और उसे खंडित किया, तब उसने पाली के इस सोमनाथ मंदिर पर भी बेरहमी से आक्रमण किया था. गजनवी की सेना ने मंदिर को भारी नुकसान पहुँचाने की कोशिश की, मूर्तियों को खंडित किया और मंदिर के वैभव को नष्ट करना चाहा. लेकिन शिव की महिमा और स्थानीय वीरों के प्रतिरोध के आगे विदेशी आक्रांता इस मंदिर के अस्तित्व को पूरी तरह मिटा नहीं पाए. आज भी मंदिर के गर्भगृह और स्तंभों पर उस आक्रमण के चोट के निशान देखे जा सकते हैं, जो इसके अदम्य इतिहास की गवाही देते हैं.

लगभग 900 वर्ष पुराना इतिहासपाली के इस सोमनाथ महादेव मंदिर का निर्माण विक्रम संवत 1209 लगभग 900 वर्ष पूर्व गुजरात के चालुक्य वंश के प्रतापी राजा कुमारपाल सोलंकी ने करवाया था. राजा कुमारपाल भगवान शिव के परम भक्त थे. मंदिर का स्थापत्य नागर शैली का एक बेजोड़ नमूना है. इसके पत्थरों पर की गई नक्काशी, प्राचीन स्तंभ और इसकी बनावट सैलानियों और शोधकर्ताओं को अपनी ओर आकर्षित करती है. कई उतार-चढ़ाव देखने के बाद भी यह मंदिर आज भी अपने मूल स्वरूप को संजोए हुए सीना ताने खड़ा है.

सदियों से प्रज्वलित अखंड ज्योत; चमत्कार और अटूट विश्वाससोमनाथ महादेव मंदिर की सबसे बड़ी विशेषताओं में से एक है यहाँ गर्भगृह में जलने वाली अखंड ज्योत. मान्यता है कि यह ज्योत सदियों से बिना रुके, लगातार प्रज्वलित हो रही है. इस अखंड दीपक को देखने और इसके दर्शन मात्र से ही भक्तों के कष्ट दूर हो जाते हैं. स्थानीय लोगों का मानना है कि इस अखंड ज्योत में साक्षात महादेव का वास है, और सावन के महीने में इस ज्योत के दर्शन का महत्व कई गुना बढ़ जाता है.

सावन में होता है विशेष अलौकिक श्रृंगार, देश-विदेश से आते हैं फूलआगामी सावन मास को लेकर मंदिर मंडल और भक्तों द्वारा विशेष तैयारियां शुरू कर दी गई हैं. सावन के प्रत्येक सोमवार को भगवान सोमनाथ का अलौकिक और भव्य श्रृंगार किया जाता है. इस विशेष अंगी और श्रृंगार के लिए भारत के कोने-कोने (जैसे बेंगलुरु, दिल्ली, कोलकाता) के साथ-साथ विदेशों से भी खास और दुर्लभ फूल मंगवाए जाते हैं. रंग-बिरंगे और सुगंधित विदेशी फूलों से जब महादेव का दरबार सजता है, तो पूरा माहौल शिवमय और दिव्य हो जाता है. इस अदभुत नजारे को देखने के लिए सावन में लाखों की संख्या में श्रद्धालु यहाँ पहुँचते हैं.

About the AuthorAnand Pandey

आनंद पाण्डेय वर्तमान में हिंदी (राजस्थान डिजिटल) में बतौर कंटेंट प्रोड्यूसर अपनी सेवाएं दे रहे हैं. पिछले 5 वर्षों से सक्रिय पत्रकारिता के क्षेत्र में अपनी पहचान बनाते हुए उन्होंने राजनीति, अपराध और लाइफ…और पढ़ें

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