Rajasthan

PM Fasal Bima Yojana: किसान भाई ध्यान दें, जरूरी खबर! वरना नुकसान के बाद नहीं मिलेगा पैसा, 31 जुलाई तक करें आवेदन

Nagaur: खरीफ सीजन की खेती पूरी तरह से मौसम के मिजाज पर निर्भर होने के कारण हमेशा से काफी जोखिम भरी मानी जाती है. ऐसे में प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना किसानों के लिए एक मजबूत आर्थिक सुरक्षा कवच का काम करती है. समय पर अपनी फसलों का बीमा कराने और सभी आवश्यक दस्तावेजों को पूरी तरह सही रखने से प्राकृतिक आपदाओं के कारण होने वाले भारी नुकसान की स्थिति में किसान को बड़ी राहत मिल सकती है. इससे किसान आर्थिक संकट से बच जाता है और अपनी अगली फसल की तैयारी भी बेहद आसानी से कर सकता है.

एग्रीकल्चर एक्सपर्ट बजरंग सिंह ने बताया कि राजस्थान में आज भी बड़ी संख्या में ऐसे किसान हैं जो सही जानकारी के अभाव या अपने दस्तावेजों में छोटी-मोटी त्रुटियों के कारण फसल बीमा योजना का पूरा लाभ नहीं उठा पाते हैं. कई बार किसानों की फसल समय पर बीमित ही नहीं हो पाती है, जबकि कुछ मामलों में बीमा होने के बावजूद भी उन्हें नुकसान का पूरा क्लेम नहीं मिल पाता है. बैंक खाते की पासबुक, [Aadhaar Redacted] कार्ड, जनाधार लिंकिंग, गिरदावरी रिकॉर्ड या भूमि संबंधी अन्य राजस्व दस्तावेजों में गड़बड़ी होना इसके प्रमुख कारण माने जाते हैं. इसका बड़ा नुकसान किसानों को तब उठाना पड़ता है जब सूखा, ओलावृष्टि, जलभराव, भयानक बाढ़ या कीट प्रकोप से उनकी पूरी फसल खराब हो जाती है.

बिना ऋण वाले किसानों के लिए 31 जुलाई है अंतिम तिथिजिन किसानों ने किसी भी मान्यता प्राप्त बैंक से फसली ऋण यानी केसीसी (KCC) लिया हुआ है, उनका फसल बीमा सामान्यतः बैंक द्वारा स्वतः ही कर दिया जाता है. फिर भी ऐसे ऋणी किसानों को अपने बैंक रिकॉर्ड में दर्ज की गई फसल की जानकारी को एक बार अवश्य जांच लेना चाहिए. वहीं दूसरी ओर बिना ऋण वाले गैर-ऋणी किसान अपने नजदीकी ई-मित्र केंद्र, संबंधित बैंक, अधिकृत वित्तीय संस्थानों या सीधे फसल बीमा पोर्टल के माध्यम से ऑनलाइन आवेदन कर सकते हैं. इस बार खरीफ फसलों के लिए बीमा आवेदन करने की अंतिम तिथि 31 जुलाई निर्धारित की गई है.

खेत में बोई गई फसल और बीमा रिकॉर्ड का मिलान है बेहद जरूरीएग्रीकल्चर एक्सपर्ट के अनुसार किसानों द्वारा की जाने वाली सबसे बड़ी गलती यह होती है कि उनके खेत में वास्तव में बोई गई फसल और बीमा के आवेदन में दर्ज की गई फसल का नाम अलग-अलग होता है. ऐसी विसंगति की स्थिति में फसल का नुकसान होने पर भी बीमा क्लेम पूरी तरह से अटक सकता है. इसलिए आवेदन करने के बाद मिलने वाली रसीद को हमेशा सुरक्षित रखना चाहिए और उसमें दर्ज की गई फसल की जानकारी की गहनता से जांच करनी चाहिए. यदि किसी तकनीकी कारणवश फसल का नाम गलत दर्ज हो गया है तो किसान भाई आगामी 29 जुलाई तक उसमें आवश्यक संशोधन करवा सकते हैं. फसल बीमा का लाभ सुचारू रूप से प्राप्त करने के लिए किसान का बैंक खाता सक्रिय होना चाहिए, मोबाइल नंबर चालू होना चाहिए तथा गिरदावरी, भूमि रिकॉर्ड और खसरा विवरण भी बिल्कुल अपडेट होना चाहिए.

खरीफ और बागवानी की कुल 23 फसलें हैं बीमा के दायरे में शामिलप्रधानमंत्री फसल बीमा योजना के तहत सूखा, लंबे समय तक वर्षा का अभाव, अत्यधिक जलभराव, बाढ़, ओलावृष्टि, चक्रवात, प्राकृतिक आग, आकाशीय बिजली गिरना तथा कीट एवं रोग प्रकोप जैसी गंभीर परिस्थितियों में होने वाले नुकसान को कवर किया जाता है. कुछ विशेष मामलों में बुवाई नहीं होने या आंशिक बुवाई होने पर भी वित्तीय सहायता का प्रावधान है. इस खरीफ सीजन में बाजरा, ज्वार, मक्का, मूंग, मोठ, ग्वार, उड़द, चंवला, अरहर, तिल, सोयाबीन, कपास, धान और मूंगफली सहित कुल 23 प्रमुख फसलें बीमा के दायरे में शामिल हैं. इसके अलावा हरी मिर्च, प्याज, टमाटर, टिंडा, अरंडी, अनार, संतरा, खजूर, किन्नू और मेहंदी जैसी बागवानी फसलों को भी बीमित श्रेणी में रखा गया है, हालांकि अधिसूचित फसलों की यह सूची जिलेवार अलग-अलग हो सकती है.

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