पट्टू साड़ी ने दिलाई राष्ट्रीय पहचान, बाड़मेर के बरिंगाराम को मिलेगा हथकरघा पुरस्कार, राष्ट्रपति भवन में होगा सम्मान

Last Updated:August 07, 2026, 11:24 IST
Barmer Weaver Baringaram Wins National Handloom Award: बाड़मेर जिले के सेड़वा स्थित आलिसरों की बस्ती के युवा बुनकर बरिंगाराम को वर्ष 2025 के राष्ट्रीय हथकरघा पुरस्कार के लिए चुना गया है. 7 अगस्त को नई दिल्ली के राष्ट्रपति भवन सांस्कृतिक केंद्र में आयोजित 12वें राष्ट्रीय हथकरघा दिवस समारोह में उन्हें यह सम्मान मिलेगा. बरिंगाराम ने पारंपरिक बाड़मेरी पट्टू साड़ी को आधुनिक डिजाइन और रंगों के साथ नया रूप दिया है. विशेषज्ञों ने अब बाड़मेरी पट्टू को जीआई टैग देने की मांग उठाई है.
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Barmer: भारत-पाकिस्तान अंतरराष्ट्रीय सीमा से सटे राजस्थान के बाड़मेर जिले के सेड़वा क्षेत्र स्थित आलिसरों की बस्ती से निकली पारंपरिक ‘बाड़मेरी पट्टू साड़ी’ अब राष्ट्रीय पटल पर अपनी नई चमक बिखेर रही है. सीमावर्ती गांव के एक साधारण परिवार से आने वाले प्रतिभावान युवा बुनकर बरिंगाराम को वर्ष 2025 के ‘राष्ट्रीय हथकरघा पुरस्कार’ (National Handloom Award) के लिए चुना गया है. नई दिल्ली में आयोजित 12वें राष्ट्रीय हथकरघा दिवस समारोह में राष्ट्रपति के हाथों उन्हें इस प्रतिष्ठित सम्मान से नवाजा जाएगा.
बरिंगाराम एक संयुक्त परिवार में पले-बढ़े हैं, जहां बचपन से ही सिलाई और हथकरघा बुनाई का काम होता आया है. परिवार के बुजुर्गों को करघे पर दिन-रात मेहनत करते देख उन्होंने कम उम्र में ही इस पारंपरिक शिल्पकला की बारीकियां सीख ली थीं. वर्ष 2018 में उन्होंने अपनी पढ़ाई के साथ-साथ पारंपरिक बुनाई को नए दौर की मांग के अनुसार आगे बढ़ाने का संकल्प लिया. शुरुआत में कुर्ते और दुपट्टे तैयार करने के बाद उन्होंने पारंपरिक ‘पट्टू साड़ी’ को ही नवाचार के साथ आगे बढ़ाया. अपने बड़े भाई से प्रेरणा लेकर उन्होंने पारंपरिक डिजाइनों में नए रंग, आधुनिक पैटर्न और आकर्षक बुनाई तकनीकों का प्रयोग किया, जिसने उनकी कला को एक अलग पहचान दी.
वस्त्र मंत्रालय ने किया चयन, बाड़मेरी पट्टू को GI टैग देने की उठी मांगबरिंगाराम ने अपनी विशेष डिजाइन और उत्कृष्ट बुनाई वाली पट्टू साड़ी को भारत सरकार के वस्त्र मंत्रालय के पास राष्ट्रीय पुरस्कार के लिए भेजा था. वस्त्र मंत्रालय ने उनकी उत्कृष्ट शिल्पकला, पारंपरिक तकनीक और नवाचारी डिजाइन के आधार पर इस साड़ी को राष्ट्रीय हथकरघा पुरस्कार के लिए चयनित किया. 7 अगस्त को नई दिल्ली स्थित ‘राष्ट्रपति भवन सांस्कृतिक केंद्र’ में आयोजित 12वें राष्ट्रीय हथकरघा दिवस समारोह में उन्हें सम्मानित किया जाएगा.
जिस गांव की पहचान पहले केवल सीमावर्ती क्षेत्र के रूप में होती थी, आज वही गांव बरिंगाराम के हुनर की बदौलत पूरे देश में चर्चा का विषय बना हुआ है. इस उपलब्धि पर टेक्सटाइल एवं हैंडलूम विशेषज्ञ यशोवर्धन शांडिल्य ने कहा कि बाड़मेर की इस सदियों पुरानी बुनाई कला की अपनी राष्ट्रीय पहचान है. उन्होंने मांग की कि अब बाड़मेरी पट्टू को भौगोलिक संकेतक (GI Tag) मिलना चाहिए ताकि अंतरराष्ट्रीय बाजार में बाड़मेरी पट्टू को एक नई और अलग पहचान मिल सके.
About the Authorvicky Rathore
Vicky Rathore (born July 25, 1994) is a multimedia journalist and digital content specialist currently working with Rajasthan. I have over 8 years of experience in digital media, where I specialize in cr…
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Barmer,Barmer,Rajasthan
First Published :
August 07, 2026, 11:24 IST



