Sahjan Farming in Jhunjhunu | झुंझुनूं में सहजन की खेती से बंपर मुनाफा

Last Updated:August 09, 2026, 13:15 IST
Sahjan Farming in Jhunjhunu: झुंझुनूं जिले में कृषि विज्ञान केंद्र आबूसर के सहयोग से सहजन की खेती किसानों के लिए वरदान साबित हो रही है. कम पानी और कम लागत में तैयार होने वाला यह पौधा फलियों और पत्तियों दोनों से बंपर मुनाफा दे रहा है. बाजला के किसान चुन्नीलाल सहजन की फलियां दिल्ली मंडी में बेचकर सालाना 8-10 लाख रुपये कमा रहे हैं, वहीं कसेरू के मूलचंद सूखी पत्तियों से 1 लाख रुपये की अतिरिक्त आय प्राप्त कर रहे हैं. केवीके किसानों को मात्र 20 रुपये में सहजन के पौधे और वैज्ञानिक प्रशिक्षण उपलब्ध करा रहा है.
Jhunjhunu News: राजस्थान के शुष्क और कम पानी वाले इलाकों में खेती करना किसानों के लिए लगातार चुनौती बना हुआ है. ऐसे में सहजन की खेती किसानों के लिए नई उम्मीद बनकर सामने आई है. कम पानी, कम लागत और लंबे समय तक उत्पादन देने वाला यह पौधा किसानों की आय बढ़ाने का बेहतर जरिया बन रहा है. झुंझुनूं जिले में कृषि विज्ञान केंद्र आबूसर के प्रयासों के बाद कई किसान पारंपरिक फसलों के साथ सहजन की खेती अपनाकर अच्छी कमाई कर रहे हैं. खास बात यह है कि कृषि विज्ञान केंद्र इस बार किसानों और आमजन को महज 20 रुपए में सहजन का पौधा उपलब्ध करा रहा है. इससे अधिक से अधिक लोगों को सहजन की खेती के लिए प्रोत्साहित करने और कम पानी में बेहतर आमदनी का विकल्प उपलब्ध कराने की कोशिश की जा रही है.
सहजन को केवल सब्जी देने वाला पौधा समझना अब पुरानी बात हो गई है. इसकी पत्तियों और फलियों की बाजार में अच्छी मांग है. सहजन की पत्तियों में प्रोटीन, विटामिन ए, सी और ई के साथ कैल्शियम, आयरन, पोटेशियम तथा एंटीऑक्सीडेंट पाए जाते हैं. इसी वजह से इसे सुपरफूड और चमत्कारी वृक्ष भी कहा जाता है. न्यूट्रियंस के लिहाज से भी सहजन बहुत खास माना जाता है. यही वजह है कि ग्रामीण क्षेत्रों में इसकी खेती और पत्तियों से तैयार उत्पादों को लेकर किसानों की दिलचस्पी लगातार बढ़ रही है.
कृषि विज्ञान केंद्र आबूसर ने सहजन की खेती को बढ़ावा देने के लिए विशेष अभियान शुरू किया है. इस अभियान के तहत इस वर्ष करीब 5 हजार सहजन के पौधे तैयार किए गए हैं. किसानों, आम नागरिकों और महिला समूहों को ये पौधे केवल 20 रुपए प्रति पौधे की दर से उपलब्ध करवाए जा रहे हैं. केवीके आबूसर (झुंझुनूं) के अध्यक्ष डॉ. दयानंद ने बताया कि केवीके का उद्देश्य सिर्फ पौधे बांटना नहीं, बल्कि किसानों को सहजन की वैज्ञानिक खेती से जोड़ना है. इसके लिए उन्नत किस्म, पौधरोपण, सिंचाई, पोषक तत्व प्रबंधन और कीट-रोग नियंत्रण की
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झुंझुनूं के बाजला गांव निवासी किसान चुन्नीलाल खीचड़ सहजन (मोरिंगा) की खेती अपनाकर हर साल 8 से 10 लाख रुपये की शानदार कमाई कर रहे हैं. पिछले पांच सालों से सहजन की व्यावसायिक खेती कर रहे चुन्नीलाल ने अपने खेत में करीब 5 हजार पौधे लगा रखे हैं, जिनसे प्राप्त फलियों को वे दिल्ली की मंडी में बेचते हैं. पानी की कम खपत और बाहरी मंडियों में बेहतरीन मांग के कारण सहजन की खेती उनके लिए पारंपरिक फसलों की तुलना में कहीं अधिक मुनाफा देने वाला विकल्प साबित हो रही है.
झुंझुनूं के कसेरू गांव निवासी किसान मूलचंद ने बड़े पैमाने पर सहजन (मोरिंगा) की खेती अपनाई है. उनके खेत में करीब 20 हजार पौधे लगे हुए हैं. वे मुख्य रूप से सहजन की पत्तियों को सुखाकर बाजार में बेचते हैं. बाजार में सूखी पत्तियों की अच्छी मांग के चलते उन्हें 100 से 150 रुपये प्रति किलो तक का भाव मिल जाता है. हर छह महीने में पत्तियों की बिक्री से उन्हें हर साल करीब 1 लाख रुपये की अतिरिक्त आय हो रही है.
केवीके आबूसर के अध्यक्ष डॉ. दयानंद के अनुसार, सहजन (मोरिंगा) की सबसे बड़ी खासियत यह है कि एक बार पौधरोपण करने के बाद इससे कई सालों तक लगातार उत्पादन लिया जा सकता है. राजस्थान जैसे शुष्क और कम पानी वाले इलाकों के लिए यह फसल किसानों के लिए बेहद उपयोगी और वरदान साबित हो रही है, क्योंकि इसे पारंपरिक फसलों की तुलना में बहुत कम पानी की आवश्यकता होती है. बाजार में सहजन की हरी फलियों और पोषक तत्वों से भरपूर पत्तियों की मांग सालभर बनी रहती है. यही कारण है कि किसान इसे अपने खेत की मेड़, बगीचे या बड़े स्तर पर व्यावसायिक रूप से लगाकर आसानी से बेहतरीन अतिरिक्त आय हासिल कर सकते हैं.
कृषि विज्ञान केंद्र (केवीके) आबूसर, झुंझुनूं के अध्यक्ष डॉ. दयानंद ने बताया कि केंद्र किसानों की आय में वृद्धि करने और जलवायु अनुकूल कृषि को प्रोत्साहित करने के उद्देश्य से सहजन (मोरिंगा) की खेती को बढ़ावा दे रहा है. इसके तहत किसानों को सहजन के पौधे उपलब्ध कराने के साथ-साथ वैज्ञानिक उत्पादन तकनीक, सही पौधरोपण और फसल प्रबंधन की विस्तृत जानकारी भी दी जा रही है. उन्होंने बताया कि केवीके में करीब 5 हजार सहजन के पौधे तैयार किए गए हैं, जिन्हें किसानों और आम नागरिकों को वितरित किया जा रहा है.
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August 09, 2026, 13:15 IST



