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‘या अल्लाह, रसगुल्ला’ डायलॉग पर भारती सिंह-शेखर सुमन को राहत, हटा धार्मिक भावनाएं आहत करने का आरोप, FIR रद्द

Last Updated:May 01, 2026, 07:48 IST

बॉम्बे हाईकोर्ट ने भारती सिंह और शेखर सुमन पर धार्मिक भावनाएं आहत करने के आरोप वाली एफआईआर रद्द कर दी है. भारती और शेखर के खिलाफ 2010 में यह एफआईआर दर्ज हुई थी. हाईकोर्ट ने कहा स्टैंडअप कॉमेडी को अपराध नहीं माना जा सकता. भारती ने कॉमेडी शो में परफॉर्मेंस के दौरान “या अल्लाह! रसगुल्ला! दही भल्ला!” कहा था, जिसे बाद में होस्ट शेखर ने दोहराया था.

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'या अल्लाह, रसगुल्ला' डायलॉग पर भारती सिंह-शेखर सुमन को राहत, FIR रद्दZoomभारती सिंह और शेखर सुमन के खिलाफ एफआईआर रद्द.

मुंबई: कॉमेडियन भारती सिंह और एक्टर शेखर सुमन के खिलाफ दर्ज एफआईआर को रद्द कर दिया. इन दोनों पर सोनी एंटरटेनमेंट चैनल पर प्रसारित एक कॉमेडी शो के दौरान धार्मिक भावनाएं आहत करने का आरोप था. बॉम्बे हाईकोर्ट ने कहा कि इस मामले में ऐसा कुछ भी नहीं है, जिसे क्राइम कहा जाए. स्टैंडअप कॉमेडी को गंभीर भाषण की तरह नहीं आंका जाना चाहिए. भारती और शेखर के खिलाफ साल 2010 में एफआईआर दर्ज की गई थी. इसमें भारती और शेखर के अलावा एक स्क्रिप्ट राइटर को आरोपी बनाया गया था.

यह एफआईआर रजा अकादमी के एक प्रतिनिधि की शिकायत पर दर्ज की गई थी. शिकायत में कहा गया था कि भारती सिंह ने कॉमेडी शो ‘कॉमेडी सर्कस का जादू’ में कुरान की एक आयत पर मजाक किया था, जिसे शेखर सुमन ने को-होस्ट किया था और यह इस्लाम के लिए आपत्तिजनक था. शिकायतकर्ता के अनुसार, शेखर ने भी भारती के बाद वही आयत दोहराई थी. टाइम्स ऑफ इंडिया के मुताबिक, भारती ने परफॉर्मेंस के दौरान कहा था,”या अल्लाह! रसगुल्ला! दही भल्ला!”

भारती सिंह, शेखर सुमन और अन्य आरोपियों पर भारतीय दंड संहिता की धारा 295 (किसी धर्म के अपमान की नीयत से पूजा स्थल को नुकसान पहुंचाना या अपवित्र करना) और 34 (सामान्य इरादा) के तहत मामला दर्ज किया गया था. भारती सिंह और शेखर सुमन के वकील नितिन प्रधान ने दलील दी कि दोनों केवल जज और परफॉर्मिंग आर्टिस्ट की भूमिका निभा रहे थे, ऐसे में पुलिस जांच पूरी तरह से अनावश्यक, अनुचित और अवांछनीय थी. उन्होंने कहा, “यह कार्यक्रम हल्के-फुल्के मनोरंजन के लिए था और इसमें किसी भी वर्ग या समुदाय की धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुंचाने या अपमानित करने की कोई मंशा नहीं थी.”

भारती सिंह-शेखर सुमन का मकसद लोगों को हंसाना

अतिरिक्त लोक अभियोजक मेघा बजोरिया ने कहा कि आरोपों की गंभीरता को देखते हुए, याचिकाकर्ताओं ने कथित अपराध किया है या नहीं, यह ट्रायल के दौरान जांचा जाएगा. हालांकि, जस्टिस अमित बोरकर की सिंगल बेंच ने एफआईआर को खारिज करते हुए कहा कि ऐसे कार्यक्रमों में परफॉर्मर और जज का मकसद लोगों को हंसाना होता है और वे किसी धार्मिक समूह के खिलाफ घोषणा करने वाले वक्ता की स्थिति में नहीं होते.

बॉम्बे हाईकोर्ट ने भारती सिंह-शेखर सुमन के पक्ष में सुनाया फैसला

बॉम्बे हाईकोर्ट ने स्पष्ट किया कि दोनों पर जो भूमिका आरोपित की गई है, वह शिकायतकर्ता द्वारा लगाए गए आरोपों के दायरे में लाने के लिए बहुत दूर की कौड़ी है और उनके खिलाफ कोई ऐसा सबूत नहीं मिला जिससे उनकी जानबूझकर या दुर्भावनापूर्ण मंशा साबित हो. बेंच ने कहा, “यह परफॉर्मेंस थिएटर की तरह थी, जिसका उद्देश्य मनोरंजन था. इससे अपने आप कोई आपराधिकता पैदा नहीं होती.” कोर्ट ने कहा कि उनके खिलाफ आपराधिक कार्यवाही जारी रखना प्रक्रिया का दुरुपयोग होगा.

About the Authorरमेश कुमारSenior Sub Editor

रमेश कुमार, सितंबर 2021 से बतौर सीनियर सब एडिटर न्यूज18 हिंदी डिजिटल से जुड़े हैं. एंटरटेनमेंट डेस्क पर काम कर रहे हैं. समय-समय पर विधानसभा-लोकसभा चुनाव पर भी काम करते हैं. इससे पहले हिंदीरश (पिंकविला) में एंटर…और पढ़ें

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