Russia Japan Conflict: कूरील द्वीप पर पुतिन की एंट्री से रूस-जापान के बीच बढ़ी टेंशन, ताकाइची बोलीं- बर्दाश्त नहीं करेंगे तांडव

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कूरील द्वीप पर पुतिन की एंट्री से रूस-जापान में टेंशन, ताकाइची बोलीं- बर्दाश्त
Last Updated:August 19, 2026, 12:12 IST
Russia Japan Conflict: रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन की कूरील द्वीप समूह की यात्रा के बाद रूस और जापान के रिश्तों में फिर तनाव बढ़ गया है. पुतिन ने 13 अगस्त को इटुरुप द्वीप का दौरा किया, जिसे जापान नॉर्दन टेरिटरीज का हिस्सा मानता है. जापान की प्रधानमंत्री सनाए ताकाइची ने इस यात्रा को गंभीर और बिल्कुल अस्वीकार्य बताया. इसके जवाब में रूस ने जापानी राजदूत को विदेश मंत्रालय तलब किया और ताकाइची की टिप्पणियों को एंटी-रशियन बताया. कूरील द्वीप विवाद 1945 से दोनों देशों के बीच चला आ रहा है. यूक्रेन युद्ध के बाद जापान के रूस विरोधी प्रतिबंधों और यूक्रेन समर्थन ने भी रिश्तों में दूरी बढ़ाई है.पुतिन की कूरील द्वीप यात्रा के बाद रूस-जापान तनाव बढ़ गया है. (फोटो AP)
Russia Japan Conflict News: रूस और जापान के बीच पुराना कूरील द्वीप विवाद एक बार फिर अचानक सुर्खियों में आ गया है. वजह बनी रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन की उस इलाके की यात्रा, जिस पर जापान आज भी अपना दावा करता है. पुतिन 13 अगस्त को इटुरुप द्वीप पहुंचे. यह यात्रा इसलिए भी अहम थी क्योंकि उनके सत्ता में रहने के दौरान कूरील द्वीप समूह की यह पहली यात्रा थी. जापान ने इसे सामान्य दौरा मानने से साफ इनकार कर दिया. प्रधानमंत्री सनाए ताकाइची ने पुतिन की यात्रा को ‘गंभीर’ और ‘बिल्कुल अस्वीकार्य’ बताया. इसके बाद मामला सिर्फ बयानबाजी तक नहीं रुका. दोनों देशों ने एक-दूसरे के राजनयिकों को तलब किया और पुराना क्षेत्रीय विवाद फिर से रिश्तों के बीच आ खड़ा हुआ.
दरअसल, कूरील द्वीपों का विवाद रूस-जापान संबंधों की सबसे पुरानी गांठों में से एक है. जापान इन्हें नॉर्दन टेरिटरीज कहता है, जबकि रूस इन द्वीपों पर अपना अधिकार मानता है. 1945 में सोवियत संघ ने इन इलाकों पर कब्जा किया था और वहां रहने वाली जापानी आबादी को बाहर कर दिया गया था. इसके बाद से दोनों देशों के बीच इस मुद्दे पर सहमति नहीं बन सकी. अब यूक्रेन युद्ध के बाद पहले से खराब रिश्तों के बीच पुतिन की यात्रा और ताकाइची की तीखी प्रतिक्रिया ने तनाव को एक नई परत दे दी है.
पुतिन की यात्रा से फिर गरमाया कूरील विवाद
न्यूज एजेंसी AFP की रिपोर्ट के अनुसार पुतिन ने इटुरुप द्वीप की यात्रा के दौरान स्थानीय परियोजनाओं का जायजा लिया. रूसी मीडिया के मुताबिक, उन्होंने मछली प्रसंस्करण संयंत्र, अस्पताल और स्कूल का निरीक्षण किया और स्थानीय लोगों से मुलाकात की. मॉस्को के लिए यह दौरा उन इलाकों पर अपने प्रशासन और संप्रभुता को दिखाने का संदेश था. लेकिन टोक्यो ने इसे सीधे अपने क्षेत्रीय दावे को चुनौती के तौर पर देखा. जापान ने रूस के राजदूत को तलब कर विरोध दर्ज कराया.
ताकाइची ने कहा कि नॉर्दन टेरिटरीज ऐतिहासिक रूप से और अंतरराष्ट्रीय कानून के तहत जापान का हिस्सा हैं. उन्होंने पुतिन की यात्रा को ‘बिल्कुल अस्वीकार्य’ बताया. जापानी प्रधानमंत्री के मुताबिक, इस दौरे ने जापान में रूस विरोधी भावना को और मजबूत किया है. उन्होंने यह भी कहा कि इससे मध्यम और लंबी अवधि में दोनों देशों के संबंधों को सुधारना और मुश्किल हो गया है.
रूस ने भी जापान को दिया कड़ा जवाब
जापान के विरोध के बाद रूस ने भी पीछे हटने के बजाय पलटवार किया. मंगलवार को मॉस्को में जापान के राजदूत अकीरा मुतो को रूसी विदेश मंत्रालय तलब किया गया. वह करीब 25 मिनट बाद मंत्रालय से बाहर निकले और मीडिया से कोई टिप्पणी नहीं की. रूसी विदेश मंत्री सर्गेई लावरोव पहले ही ताकाइची की टिप्पणियों को ‘शिष्टाचार की सीमा पार करने वाला’ बता चुके हैं. रूस ने जापान के रुख को ‘एंटी-रशियन’ करार दिया है.
1945 से नहीं सुलझी चार द्वीपों की कहानी
कूरील विवाद सिर्फ आज की राजनीति का मामला नहीं है. इसकी जड़ें द्वितीय विश्व युद्ध के अंतिम दौर तक जाती हैं. दक्षिणी कूरील द्वीपों में इटुरुप, कुनाशीर, शिकोतान और हबोमाई द्वीप शामिल हैं. 1945 में सोवियत संघ ने इन पर कब्जा कर लिया था. जापानी आबादी को भी वहां से निकाल दिया गया. यही विवाद आगे चलकर दोनों देशों के बीच युद्धोत्तर शांति संधि की राह में बड़ी अड़चन बना रहा.
यूक्रेन युद्ध ने बढ़ाई रूस-जापान की दूरी
रूस और जापान के रिश्ते 2022 के बाद और खराब हुए. यूक्रेन पर रूस के पूर्ण पैमाने के हमले के बाद जापान ने G7 देशों के साथ मॉस्को पर प्रतिबंध लगाए. टोक्यो ने यूक्रेन को आर्थिक और गैर-घातक रक्षा सहायता भी दी. जापान ने घरेलू स्तर पर बनाए गए पैट्रियट इंटरसेप्टर मिसाइलों को अमेरिका को निर्यात करने की अनुमति दी है. इससे अमेरिकी भंडार को फिर भरने में मदद मिलती है, जो यूक्रेन को सैन्य सहायता देने के कारण कम हुए हैं.
पुतिन का दौरा क्या जापान के लिए चेतावनी है?
एक्सपर्ट के मुताबिक, पुतिन की कूरील यात्रा को सिर्फ क्षेत्रीय विवाद के नजरिए से देखना अधूरा होगा. इसके पीछे यूक्रेन युद्ध से जुड़ा संदेश भी हो सकता है. जापान धीरे-धीरे अपनी पारंपरिक शांतिवादी रक्षा नीति से आगे बढ़ रहा है और उसकी पश्चिमी देशों तथा नाटो के साथ सुरक्षा सहयोग में भी दिलचस्पी बढ़ी है. ऐसे में कूरील द्वीप की यात्रा टोक्यो को यह संकेत देने का तरीका हो सकती है कि रूस अपनी सुरक्षा और क्षेत्रीय दावों को लेकर पीछे हटने के मूड में नहीं है.
आगे क्या होगा, रिश्तों में और बढ़ेगी दूरी?
फिलहाल रूस और जापान के बीच राजनयिक रिश्तों में गर्माहट लौटने के संकेत कम हैं. कूरील द्वीप विवाद पहले से ही दोनों देशों के बीच बड़ा मुद्दा है और यूक्रेन युद्ध ने इसमें नई कड़वाहट जोड़ दी है. ताकाइची सरकार का रक्षा मामलों में अधिक सक्रिय रुख और रूस का कूरील क्षेत्र में अपनी मौजूदगी मजबूत करने का प्रयास तनाव को और बढ़ा सकता है. ऐसे में पुतिन की यात्रा भले ही एक दिन की रही हो, लेकिन उसका राजनीतिक असर लंबे समय तक रूस-जापान संबंधों पर दिखाई दे सकता है.
About the AuthorSumit KumarSenior Sub Editor
सुमित कुमार हिंदी में सीनियर सब एडिटर के तौर पर काम कर रहे हैं. वे पिछले 4 साल से यहां सेंट्रल डेस्क टीम से जुड़े हुए हैं. उनके पास जर्नलिज्म में मास्टर डिग्री है. हिंदी में काम करने से पहले, उन्ह…
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August 19, 2026, 12:05 IST



