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हर सुबह फोन चेक करने वालों के लिए सद्गुरु की खास सलाह, पहले खुद को दें 20 सेकंड, दिनभर बनी रहेगी चेहरे पर मुस्कान

Morning Habits: सुबह का पहला पल अक्सर पूरे दिन का मूड तय कर देता है. कई लोग जैसे ही आंखें खोलते हैं, सबसे पहले अपना फोन ढूंढ़ने लगते हैं. नोटिफिकेशन, मैसेज और सोशल मीडिया की दुनिया में कदम रखने से पहले शायद ही कोई यह सोचता हो कि दिन की शुरुआत खुद से भी की जा सकती है. इसी आदत पर आध्यात्मिक गुरु सद्गुरु ने हाल ही में एक दिलचस्प बात साझा की है. उनका कहना है कि सुबह जागने के बाद फोन नहीं, बल्कि मुस्कुराहट तलाशनी चाहिए. सुनने में यह बेहद साधारण लगता है, लेकिन इसके पीछे छिपा संदेश जीवन को देखने का नजरिया बदल सकता है.

सुबह की शुरुआत किससे करते हैं आप?आज की तेज रफ्तार जिंदगी में मोबाइल फोन लगभग हर व्यक्ति की जरूरत बन चुका है. कई लोगों की सुबह अलार्म बंद करने के बाद सीधे स्क्रीन पर नजर डालने से शुरू होती है. कौन सा मैसेज आया, किसने कॉल किया, सोशल मीडिया पर क्या नया है, ये सब जानने की जल्दबाजी रहती है. सद्गुरु ने इसी आदत को हल्के-फुल्के अंदाज में सामने रखा. उन्होंने बताया कि युवा ही नहीं, कई बुजुर्ग भी सुबह उठते ही फोन ढूंढ़ने लगते हैं. उनकी इस बात पर लोगों ने हंसते हुए तालियां भी बजाईं, लेकिन इसके पीछे एक गंभीर संदेश छिपा था. उनका मानना है कि दिन की शुरुआत किसी गैजेट से नहीं, बल्कि अपने भीतर की सकारात्मकता से होनी चाहिए.

सिर्फ 20 सेकंड की आदत1. मुस्कान से क्यों शुरू करें दिन?सद्गुरु के मुताबिक सुबह उठकर केवल 20 सेकंड मुस्कुराना भी बड़ा फर्क ला सकता है. उन्होंने लोगों से कहा कि जागने के बाद बस मुस्कुराइए. यह जरूरी नहीं कि सामने कोई हो या कोई खास वजह हो.

आमतौर पर लोग सोचते हैं कि मुस्कान किसी व्यक्ति, घटना या खुशी का नतीजा होती है. लेकिन सद्गुरु इस सोच को अलग नजरिए से देखते हैं. उनका कहना है कि मुस्कान किसी और के लिए नहीं, बल्कि अपने लिए भी हो सकती है. अगर भीतर अच्छा महसूस हो रहा है तो मुस्कान अपने आप चेहरे पर आ जाती है.

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2. आखिर किस पर मुस्कुराएं?जब उन्होंने लोगों से पूछा कि सुबह मुस्कुराएं, तो अगला सवाल भी खुद ही रखा-“किस पर मुस्कुराएं?” फिर उन्होंने जवाब दिया, “किसी पर नहीं.”

यही बात उनके संदेश का सबसे खास हिस्सा है. उनका मानना है कि मुस्कुराने के लिए किसी बाहरी वजह की जरूरत नहीं होनी चाहिए. यह कोई सामाजिक औपचारिकता नहीं, बल्कि भीतर की स्थिति का संकेत है. अगर इंसान अपने अंदर शांति और संतोष महसूस करे, तो मुस्कान अपने आप उभरती है.

3. खुशी का स्रोत बाहर नहीं, भीतर हैआज लोग अक्सर अपनी खुशी को दूसरे लोगों, परिस्थितियों या उपलब्धियों से जोड़ देते हैं. नौकरी अच्छी होगी तो खुश रहेंगे, कोई तारीफ करेगा तो मुस्कुराएंगे, कोई खास व्यक्ति मिलेगा तो दिन अच्छा लगेगा. लेकिन ऐसी खुशी अक्सर अस्थायी होती है. सद्गुरु का संदेश इसी सोच को चुनौती देता है. उनका कहना है कि अगर मुस्कुराने के लिए हमेशा किसी बाहरी वजह का इंतजार किया जाए, तो इंसान अपनी भावनाओं का नियंत्रण दूसरों को सौंप देता है. इसके बजाय खुशी और संतोष का स्रोत अपने भीतर खोजा जाना चाहिए. एक साधारण उदाहरण देखें. कई लोग सुबह पार्क में टहलने जाते हैं. कुछ लोग प्रकृति को देखकर सहज ही खुश हो जाते हैं, जबकि कुछ लोग उसी माहौल में भी तनाव और चिंताओं में डूबे रहते हैं. फर्क माहौल में नहीं, बल्कि मानसिक स्थिति में होता है.

4. छोटी आदत, बड़ा असरविशेषज्ञ भी मानते हैं कि दिन की शुरुआत सकारात्मक सोच के साथ करने से मानसिक स्थिति बेहतर हो सकती है. सुबह के पहले कुछ मिनट तनाव, चिंता या मोबाइल स्क्रीन में बिताने के बजाय अगर व्यक्ति खुद को शांत और सहज महसूस करने का मौका दे, तो उसका असर पूरे दिन पर दिखाई देता है. सद्गुरु का सुझाव किसी कठिन अभ्यास जैसा नहीं है. इसमें न घंटों का समय लगता है और न ही किसी विशेष तैयारी की जरूरत होती है. सिर्फ 20 सेकंड के लिए मुस्कुराना, खुद को महसूस करना और दिन की शुरुआत हल्के मन से करना ही इसका मूल विचार है.

तकनीक हमारे जीवन का अहम हिस्सा है, लेकिन हर सुबह की शुरुआत तकनीक से ही हो, यह जरूरी नहीं. सद्गुरु का संदेश याद दिलाता है कि सुकून और खुशी की तलाश बाहर नहीं, अपने भीतर भी की जा सकती है. अगर सुबह उठते ही फोन की जगह मुस्कान आपका स्वागत करे, तो शायद दिन थोड़ा बेहतर और हल्का महसूस हो.

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