Rajasthan

Sikar Nanad-Bhojai Free Education Initiative

Last Updated:April 16, 2026, 10:50 IST

Inspirational Story: सीकर के हर्ष गांव में ननंद आरती और भोजाई सुनीता बागड़ी मिलकर गरीब बच्चों को निशुल्क ट्यूशन दे रही हैं. बाबूजी महाराज मंदिर में संचालित इस पाठशाला में करीब 60 बच्चे शिक्षा ग्रहण कर रहे हैं. बिना किसी सरकारी मदद के चल रही इस मुहिम में ग्रामीण भी बढ़-चढ़कर सहयोग कर रहे हैं और पानी की कमी के बावजूद बच्चों के लिए घरों से पानी भेज रहे हैं. इस पहल से न केवल बच्चों की पढ़ाई में सुधार हुआ है, बल्कि समाज में रिश्तों की एक नई और सकारात्मक तस्वीर भी सामने आई है.

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सीकर. राजस्थान के सीकर जिले से करीब 15 किलोमीटर दूर स्थित हर्ष गांव इन दिनों एक ऐसी सामाजिक क्रांति का गवाह बन रहा है, जिसने रिश्तों की परिभाषा और शिक्षा के महत्व को एक साथ पिरो दिया है. आमतौर पर समाज में ननंद और भोजाई के रिश्ते को पारिवारिक खींचतान से जोड़कर देखा जाता है, लेकिन यहाँ की आरती और उनकी भाभी सुनीता बागड़ी ने इस धारणा को तोड़ते हुए एक मिसाल पेश की है. यह जोड़ी पिछले डेढ़ साल से गांव के उन गरीब बच्चों के लिए निशुल्क कोचिंग चला रही है, जो आर्थिक तंगी के कारण बाहर पढ़ने नहीं जा सकते. उनकी इस निःस्वार्थ सेवा ने न केवल बच्चों को किताबी ज्ञान से जोड़ा है, बल्कि उनके जीवन में अनुशासन और बेहतर संस्कारों का समावेश भी किया है.

ननंद आरती, जो वर्तमान में बीए फाइनल की छात्रा हैं और उनकी भाभी सुनीता, जिन्होंने सेकेंडरी तक शिक्षा प्राप्त की है, ने इस मुहिम की शुरुआत करीब डेढ़ साल पहले की थी. आरती बताती हैं कि उन्होंने देखा कि गांव के कई बच्चे शाम के समय गलियों में बिना किसी उद्देश्य के घूमते रहते थे और उनके माता-पिता ट्यूशन की फीस भरने में सक्षम नहीं थे.

इसी समस्या को देखते हुए दोनों ने गांव के बाबूजी महाराज मंदिर को अपनी पाठशाला बनाया. आज यहाँ शाम 4 से 6 बजे तक रोजाना क्लास लगती है, जिसमें शुरुआत में चंद बच्चे थे, लेकिन अब यह संख्या बढ़कर 60 तक पहुँच गई है. यहाँ हर जाति और वर्ग के बच्चे एक साथ बैठकर न केवल अपना होमवर्क पूरा करते हैं, बल्कि कठिन विषयों को भी आसानी से समझते हैं.

शिक्षा के प्रति जुनून और ग्रामीणों का अनूठा सहयोगहर्ष गांव की इस पाठशाला की सफलता का अंदाजा बच्चों के परीक्षा परिणामों से लगाया जा सकता है. यहाँ पढ़ने वाले छात्र आदिल, मनीषा, मानवी और तारामणि बताते हैं कि मुफ्त शिक्षा मिलने से उनके रिजल्ट में काफी सुधार हुआ है और अब उनका मन पढ़ाई में लगने लगा है. गांव में पानी की भीषण कमी एक बड़ी समस्या है, लेकिन शिक्षा के इस मंदिर को प्यासा नहीं रहने दिया जाता.

बच्चों के अभिभावक और ग्रामीण अपने घरों से पीने का पानी भरकर मंदिर भेजते हैं, ताकि पढ़ने आने वाले बच्चों को प्यास के कारण परेशानी न हो. स्थानीय निवासी सुनील सैनी और नारायण राम नायक का कहना है कि इन बेटियों की इस पहल ने पूरे गांव का नाम रोशन किया है और बच्चों में एक नया अनुशासन देखने को मिल रहा है.

About the Authorvicky Rathore

Vicky Rathore (born July 25, 1994) is a seasoned multimedia journalist and digital content specialist with 8 years of experience across digital media, social media management, video production, editing, content…और पढ़ें

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Location :

Sikar,Sikar,Rajasthan

First Published :

April 16, 2026, 10:50 IST

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