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नारी शक्ति वंदन अधिनियम: 11, 12 फिर 1.20 बज गए…आधी रात तक जगी संसद, हर महिला सांसद को मिला मौका, कब-क्या हुआ?

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नारी शक्ति वंदन अधिनियम: रात 1.20 बजे तक जगी संसद, सबको मिला मौका, कब-क्या हुआ

Last Updated:April 17, 2026, 05:43 IST

Nari Shakti Vandan Adhiniyam News: लोकसभा में देर रात नारी शक्ति वंदन अधिनियम और संविधान के 131वें संशोधन पर बहस चली. संसद में लोकसभा की कार्यवाही कई बार आगे बढ़ानी पड़ी. कारण कि लोकसभा स्पीकर ओम बिरला हर महिला सांसद को बोलने का मौका देना चाहते थे. वहीं, इस बिल पर पीएम मोदी ने 33 फीसदी महिला आरक्षण पर सर्वसम्मति की अपील की. चलिए जानते हैं आधी रात को संसद में क्या-क्या हुआ.नारी शक्ति वंदन अधिनियम: रात 1.20 बजे तक जगी संसद, सबको मिला मौका, कब-क्या हुआZoomदेर रात तक चली संसद, नारी शक्ति वंदन अधिनियम पर हुई चर्चा, ओम बिरला ने महिला सांसदों की भागीदारी की तारीफ की

नई दिल्ली: जब आप सो रहे थे, तब संसद जाग रही थी. वह भी महिलाओं को उसका हक दिलाने की खातिर. जी हां, नारी शक्ति वंदन अधिनियम पर देर रात तक संसद सत्र जारी रहा. संसद में देर रात तक महिलाओं के आरक्षण, संविधान संशोधन, और परिसीमन से जुड़े तीन बिलों पर चर्चा चली. कई बार लोकसभा की कार्यवाही बढ़ाई गई. देर रात तक बड़ी संख्या में सांसद सदन में मौजूद रहे और इस विधेयक पर हो रही चर्चा में हिस्सा लिया. लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने महिला सांसदों की भागीदारी और मौजूदगी की तारीफ की. इस दौरान एक-एक महिला सांसदों से पूछ-पूछकर उन्हें बोलने का मौका दिया गया.

सदन की कार्यवाही पहले रात्रि 11 बजे तक बढ़ाई गई. फिर 12 बजे तक, एक बजे तक और आखिर में सांसदों के बोलने तक चलती रही.  देर रात तक सदन में सांसद बिल पर चर्चा करते रहे और अपनी बात रखते रहे. स्पीकर ओम बिरला ने चर्चा में महिलाओं की भागीदारी की तारीफ की. उन्होंने कहा कि आज सबसे ज्यादा महिलाएं बैठी हैं. उन्होंने कहा,’ महिला आरक्षण बिल पर प्रतिबद्धता देखो, इतनी देर रात तक महिलाएं सदन में बैठी हैं. सदन में गिनती कर लो. आज पुरुषों का समय नहीं है.’ गौरतलब है कि आज इस बिल पर वोटिंग होगी.

रात 1.20 बजे तक क्या हुआ?17 अप्रैल को देर रात 1:20 बजे सदन की कार्रवाई सुबह 11 बजे तक के लिए स्थगित कर दी गई. इसकी घोषणा स्पीकर ओम बिरला ने की. सदन की कार्रवाई के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 16 अप्रैल को लोकसभा में भाषण दिया. इसके बाद पक्ष और विपक्ष के तमाम नेताओं ने इस बिल पर चर्चा की, जिसमें गृह मंत्री अमित शाह, प्रियंका गांधी, कंगना रनौत, केसी वेणुगोपाल, और असदुद्दीन ओवैसी समेत तमाम नेताओं ने अपनी बात रखी.

पीएम मोदी ने क्या कहा?प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने गुरुवार को महिलाओं के आरक्षण बिल पर हो रही चर्चा को ऐतिहासिक पल बताया. उन्होंने कहा कि संसद और विधानसभा में महिलाओं की ज्यादा भागीदारी से देश को नई दिशा मिलेगी. प्रधानमंत्री ने सभी राजनीतिक दलों से अपील की कि लोकसभा और विधानसभाओं में महिलाओं के लिए 33 प्रतिशत आरक्षण के प्रस्ताव को सर्वसम्मति से पास किया जाए. उन्होंने कहा कि इससे पहले जो समय बर्बाद हुआ है, उसकी भरपाई होगी.

नारी शक्ति को पीएम का सलाम

पीएम मोदी ने आगे कहा कि देश की ‘नारी शक्ति’ को सलाम करते हुए कहा कि यह समय की जरूरत है कि महिलाओं को 33 प्रतिशत आरक्षण दिया जाए और इसमें और देरी नहीं होनी चाहिए. उन्होंने चेतावनी भी दी कि जो लोग इसका विरोध करेंगे, उसके नकारात्मक परिणाम हो सकते हैं.

संसद में महिला आरक्षण विधेयक पारित कराने के लिए किसके पास कितनी ताकत?

बहरहाल, संसद में महिला आरक्षण विधेयक को दो-तिहाई बहुमत से पारित कराने के लिए सत्तारूढ़ राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (राजग) के पास आवश्यक संख्याबल नहीं है. हालांकि अन्य दलों के समर्थन हासिल करने से या उनमें से कुछ के मतदान से अनुपस्थित होने पर विधेयक का जरूरी मतों के साथ पारित होना संभव है.
लोकसभा में एनडीए यानी राजग को 293 सदस्यों का समर्थन है जो सदन का 54 प्रतिशत है, जबकि विपक्ष के पास 233 सांसद हैं. सात सांसद निर्दलीय हैं, जबकि सात सांसद वाईएसआरसीपी, एआईएमआईएम और शिरोमणि अकाली दल जैसे दलों से हैं, जिन्होंने अभी तक खुले रूप में विधेयकों का समर्थन नहीं किया है.
नियमों के अनुसार, संविधान संशोधन विधेयक सहित विधेयकों के समर्थन के लिए 360 सांसदों की आवश्यकता है, जो उपस्थित और मतदान करने वाले सांसदों की संख्या के दो-तिहाई के बराबर है. विधेयकों को लोकसभा से मंजूरी मिलने के लिए, समाजवादी पार्टी (37 सांसद), तृणमूल कांग्रेस (28 सांसद) या द्रमुक (22 सांसद) में से कम से कम दो मुख्य विपक्षी दलों को मतदान से अनुपस्थित रहना होगा। सदन में कांग्रेस के 98 सांसद हैं.
लोकसभा में भाजपा के 240 सांसद, तेदेपा के 16 और जद (यू) के 12 सांसद हैं. यदि विधेयकों को लोकसभा की मंजूरी नहीं मिलती है, तो उन्हें राज्यसभा में नहीं लाया जाएगा. राज्यसभा में राजग के पक्ष में 141 सांसद हैं, जो सदन का 58 प्रतिशत है। वहीं विपक्ष के 83 सांसद हैं.
बीआरएस, वाईएसआरसीपी, बीजद और बसपा जैसे दलों और निर्दलीय सांसदों के सदन में 20 सांसद हैं और उनके समर्थन से फैसले पर असर पड़ सकता है. राज्यसभा में भाजपा के 107 सदस्य हैं, जबकि कांग्रेस के 28, तृणमूल कांग्रेस के 13, आम आदमी पार्टी के 10 और द्रमुक के आठ सांसद हैं.
सूत्रों के अनुसार, कई भाजपा सांसदों ने निजी तौर पर स्वीकार किया कि महत्वपूर्ण विधेयकों को पारित कराने के लिए उनके पास पर्याप्त संख्या बल नहीं है.
संविधान में संशोधन के लिए संसद के दोनों सदनों में विशेष बहुमत की आवश्यकता होती है: कुल सदस्यों का बहुमत (50 प्रतिशत से अधिक) और उपस्थित तथा मतदान करने वाले सदस्यों का दो-तिहाई बहुमत. इसलिए यदि लोकसभा में वर्तमान में मौजूद सभी 540 सदस्य उपस्थित हों और मतदान करें, तो दो-तिहाई बहुमत के लिए 360 मत चाहिए.
प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने लोकसभा में सभी राजनीतिक दलों से महिला आरक्षण अधिनियम संबंधी संविधान संशोधन विधेयक को सर्वसम्मति से पारित करने की अपील की और कहा कि जो भी इसका विरोध करेंगे, उन्हें लंबे समय तक इसकी कीमत चुकानी पड़ेगी. महिला आरक्षण कानून में संशोधन करने वाला संविधान (131वां संशोधन) विधेयक बृहस्पतिवार को मत विभाजन के बाद लोकसभा में पेश किया गया. इसके साथ ही दो सामान्य विधेयक – परिसीमन विधेयक और केंद्र शासित प्रदेश कानून (संशोधन) विधेयक भी पेश किए गए.
करीब 40 मिनट की तीखी बहस के बाद इन विधेयकों को लोकसभा में पेश किया गया. विपक्ष ने संवैधानिक (131वां संशोधन) विधेयक पेश करने के लिए मत विभाजन की मांग की. 251 सदस्यों के समर्थन और 185 सदस्यों के विरोध के साथ विधेयक पेश किया गया.
About the AuthorShankar Pandit

Shankar Pandit has more than 10 years of experience in journalism. Before (Network18 Group), he had worked with Hindustan times (Live Hindustan), NDTV, India News Aand Scoop Whoop. Currently he handle ho…और पढ़ें

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First Published :

April 17, 2026, 05:41 IST

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