sikar news I rajasthan news I नीमकाथाना में सरकारी चारागाह भूमि पर स्पाइनलेस कैक्टस की आधुनिक खेती

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सीकर में चारागाह भूमि पर आधुनिक तकनीक से हो रही स्पाइनलेस कैक्टस की खेती
Last Updated:July 07, 2026, 11:33 IST
Spineless cactus: सीकर के नीमकाथाना क्षेत्र के गांवली गांव में सरकारी चारागाह भूमि को अतिक्रमण से बचाने के लिए पंचायत ने अनोखी पहल की है. यहां जलग्रहण विकास एवं भू-संरक्षण विभाग द्वारा 1.5 हेक्टेयर भूमि पर स्पाइनलेस कैक्टस की आधुनिक खेती की जा रही है. इस परियोजना में 15 हजार पौधे लगाए गए हैं और करीब 16.84 लाख रुपये खर्च किए हैं. कांटों रहित इस कैक्टस की फसल एक साल में तैयार हो जाएगी, जिसके बाद इसे ग्राम पंचायत को सौंप दिया जाएगी.
सीकर. जिले के नीमकाथाना क्षेत्र के गांवली गांव में सरकारी जगह को अतिक्रमण से बचाने के लिए पंचायत ने अनोखा तरीका निकाला है. यहां सरकारी चारागाह भूमि पर जलग्रहण विकास और भू-संरक्षण विभाग द्वारा आधुनिक खेती की जा रही है. ऐसा करने से ये जगह हरी-भरी भी बन रही है और अतिक्रमण का भी कोई डर नहीं रह गया है. खास बात ये है इस जगह पर कोई सामान्य गेहूं, बाजरा, ग्वार या अन्य पारंपरिक फसल नहीं उगाई जा रही, बल्कि यहां बिना कांटों वाले कैक्टस की खेती की गई है. इसे स्पाइनलेस कैक्टस कहते हैं.
जलग्रहण विकास और भू-संरक्षण विभाग, नीमकाथाना के एक्सईएन संजीव यादव ने बताया कि विभाग द्वारा गांवली गांव में 1.5 हेक्टयेर में स्पाइनलेस कैक्टस की खेती की जा रही है, इसमें कुल 15 हजार पौधे लगाए गए हैं. इसकी खेती करने के लिए करीब 16.84 लाख रुपए खर्च किए गए हैं. इसकी खेती को पूरी तरह तैयार कर ग्राम पंचायत को सौंप दी जाएगी. इसके बाद ग्राम पंचायत इसे आय बढ़ाने या फिर पशुओं के लिए चारे में काम ले सकती है. उन्होंने बताया कि यह फसल एक साल में तैयार हो जाएगी, इसके बाद इसे ग्राम पंचायत को सौंप दिया जाएगा.
पानी के लिए लगाया टांका व सोलर पंपएक्सईएन संजीव यादव ने बताया कि जल ग्रहण विकास और भू-संरक्षण विभाग ने इसके लिए चारागाह भूमि को तैयार किया. खेती में सिंचाई के लिए ड्रीप सिस्टम लगाया गया है, साथ ही सोलर पंप भी लगाया है. पानी के लिए भूमि पर टांका तैयार किया और खेती को पशुओं से बचाने के लिए तारबंदी की गई. यानी इस खेती को करने के लिए पूरी तरह से आधुनिक तकनीकों का उपयोग किया जा रहा है. एक्सईएन संजीव यादव ने बताया कि स्पाइनलेस कैक्टस अफ्रीका महाद्वीप की शुष्क जलवायु का पौधा है. विभाग ने इसे उत्तर प्रदेश के झांसी में भारतीय चारागाह एवं चारा अनुसंधान संस्थान से मंगवाकर रोपित किया है. एक्सपर्ट के अनुसार, इसके लिए यहां की जलवायु अनुकूल है, इसलिए इसे ‘हरा सोना’ भी कहा जाता है, इसका उपयोग पशुओं के चारे और बायोगैस उत्पादन के लिए किया जाता है.
चारे में आता है कामस्पाइनलेस केक्टस पर पारंपरिक कैक्टस की तरह रीढ़ जैसे कांटे नहीं होते. इस वजह से किसान और पशुपालक इसे बेहद आसानी से बिना किसी चोट के डर के छू सकते हैं और काट सकते है. इसके गूदेदार पत्तों में 85 से 90 फीसदी तक पानी भरा होता है. सूखाग्रस्त इलाकों में पशु इसे खाते हैं, तो उनकी भोजन और पानी की जरूरत कम हो जाती है. इसमें कैल्शियम, मैग्नीशियम, सोडियम और पोटैशियम जैसे जरूरी खनिज और कार्बोहाइड्रेट प्रचुर मात्रा में पाए जाते हैं. इसकी छाल का उपयोग चमड़ा उद्योग में किया जाता है.
About the AuthorMonali Paul
नमस्ते मेरा नाम मोनाली है, पेशे से पत्रकार हूं, ख़बरें लिखने का काम है. लेकिन कैमरे पर समाचार पढ़ना बेहद पसंद है. 2016 में पत्रकारिता में मास्टर्स करने के बाद पांच साल कैमरे पर न्यूज़ पढ़ने के साथ डेस्क पर खबरे…और पढ़ें
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Location :
Sikar,Rajasthan



