Sirohi News I rajasthan news I सिरोही के तपोवन में केमिकल-फ्री फसल सुरक्षा के उपाय

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केमिकल फ्री खेती की मिसाल, तपोवन में देसी नुस्खों से कीट नियंत्रण का प्रयोग
Last Updated:June 20, 2026, 18:37 IST
Agriculture Tips In Monsoon: सिरोही जिले के आमथला स्थित तपोवन में जैविक और यौगिक खेती का सफल मॉडल विकसित किया जा रहा है, जहां फसलों को कीटों से बचाने के लिए पूरी तरह देसी और प्राकृतिक उपाय अपनाए जाते हैं. यहां नीम, गोमूत्र, गोबर और विभिन्न पौधों की पत्तियों से तैयार जैविक घोल का उपयोग किया जाता है, जिससे माहू, सफेद मक्खी, कैटरपिलर और अन्य कीटों का प्रभावी नियंत्रण होता है. बिना किसी रासायनिक कीटनाशक के की जा रही यह खेती न केवल फसल की गुणवत्ता को बेहतर बना रही है, बल्कि किसानों को सुरक्षित और टिकाऊ कृषि की दिशा में भी प्रेरित कर रही है.
सिरोही. प्री मानसून के साथ ही खेतों में नमी बढ़ने से कई तरह के कीट फसल पर लगने का खतरा भी बढ़ गया है. किसान कीड़ों से फसल को बचाने के लिए कई तरह के केमिकलयुक्त कीटनाशक का उपयोग फसल पर करते है. इनसे कीट से तो फसल का बचाव होता है, लेकिन केमिकल की वजह से फसल की गुणवत्ता पर भी असर पड़ता है. कई केमिकल स्वास्थ्य के लिए भी हानिकारक होते है, इसी समस्या को देखते हुए सिरोही जिले के आमथला स्थित तपोवन में पिछले कई वर्षों से हो रही ऑर्गेनिक खेती में कीड़ों से बचाव के लिए कई देशी और जैविक नुस्खों को अपनाया जा रहा है. यहां खेती के कामकाज को कई वर्षों से संभाल रहे बीके लालनभाई ने बताया कि तपोवन में जैविक और यौगिक खेती को बढ़ावा दिया जा रहा है. इस तकनीक से कई तरह की सब्जियों, फलों और फूलों की खेती हो रही हैं. पौधों को कीड़ों से बचाने के लिए भी कोई रासायनिक पेस्टीसाइड का उपयोग नहीं कर जैविक तरीके अपनाए जाते हैं.
नीम की खली और गौ उत्पादों का उपयोग वर्षों पहले पारंपरिक खेती में केमिकल का उपयोग नहीं होता था, पिछले कुछ वर्षों में इनका उपयोग बढ़ा है. तपोवन में जैविक खेती की ट्रेंड देशभर से आने वाले किसानों को दी जाती है. कीड़ों से बचाव के लिए यहां कई तरीके बताए जाते है, नीमकी खेती से तैयार होने वाले मिस्क्चर का उपयोग पौधों को कीड़ों से बचाता है. रस चूसने वाले कीटों जैसे माहू, सफेद मक्खी के नियंत्रण के लिए यह रामबाण माना जाता है. 5 किलो नीम की पत्तियां या सूखे फल को अच्छी तरह कूट कर एक बर्तन में पत्तियां, 5 लीटर गोमूत्र और 1 किलोग्राम गोबर मिलाकर इसे किसिबोर या कपड़े से ढक दें. दो से तीन दिन ढलने के बाद रोजाना सुबह शाम इस घोल को हिला लें. इसे साफ पकड़े से छानकर 15 लीटर पानी के स्प्रे में 1 लीटर मिलाकर फसल पर छिड़काव कर लें. इससे कीट आपकी फसल पर नहीं लगेंगे.
केटरपिलर और लटो से बचावफसल को बड़े कीटों जैसे कैटरपिलर और जटिल इल्लियों से बचाने के लिए नीम, करंज, सीताफल, पपीता, अमरूद, अरंडी आदि की पत्तियों को बारीक कूटकर 200 लीटर पानी में डालकर इसमें लहसून मिर्च का पेस्ट और गोबर – गौमूत्र मिलाकर ड्रम को बोरी से ढक लें. इस मिश्रण को एक से डेढ़ महीने तक छह में रखकर सड़ने दें. इसे भी रोजाना सुबह शाम लकड़ी से हिलना जरूरी है, इसके बाद तैयार मिश्रण को 2 से 3 लीटर घोल को 15 लीटर पानी में डालकर छिड़काव करने से बड़े कीटों से फसल का बचाव होगा.
About the AuthorMonali Paul
नमस्ते मेरा नाम मोनाली है, पेशे से पत्रकार हूं, ख़बरें लिखने का काम है. लेकिन कैमरे पर समाचार पढ़ना बेहद पसंद है. 2016 में पत्रकारिता में मास्टर्स करने के बाद पांच साल कैमरे पर न्यूज़ पढ़ने के साथ डेस्क पर खबरे…और पढ़ें
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Sirohi,Rajasthan



