इतने बन गए फ्लैट, कम पड़ गए खरीदार! क्या अब घट जाएंगी कीमतें, NCR में मिलेगा सस्ता घर?

Property Trend Now: आज के समय में घर खरीदना सिर्फ एक जरूरत नहीं, बल्कि जिंदगी का सबसे बड़ा निवेश बन चुका है. लेकिन तेजी से बदलते रियल एस्टेट बाजार ने इस सपने को नया मोड़ दे दिया है. जहां एक तरफ शहरों में लग्जरी और प्रीमियम घरों की चमक बढ़ रही है, वहीं दूसरी ओर आम आदमी के लिए किफायती घरों के विकल्प लगातार कम होते जा रहे हैं.
जेएलएल की ताजा रिपोर्ट इसी बदलते ट्रेंड की ओर इशारा करती है. रिपोर्ट के मुताबिक, साल 2026 की पहली तिमाही में देश के टॉप 7 शहरों में 70,631 घर बिके, जो सालाना आधार पर 8% की बढ़ोतरी है. लेकिन असली कहानी इस ग्रोथ के पीछे छिपे बदलाव में है,अब बाजार में सस्ते घर नहीं, बल्कि महंगे घरों का दबदबा तेजी से बढ़ रहा है.
प्रीमियम हाउसिंग बना बाजार का नया चेहरारिपोर्ट के अनुसार, 1 करोड़ रुपये से अधिक कीमत वाले घरों की हिस्सेदारी बढ़कर 71% तक पहुंच गई है, जो पिछले साल 59% थी. खासतौर पर 1.5 से 3 करोड़ रुपये के सेगमेंट में 67% की जबरदस्त बढ़ोतरी दर्ज की गई है. इसके उलट, 1 करोड़ रुपये से कम कीमत वाले घरों की हिस्सेदारी घटकर 29% रह गई है. यह साफ दिखाता है कि किफायती हाउसिंग अब धीरे-धीरे बाजार से बाहर होती जा रही है या फिर उसकी सप्लाई बेहद सीमित हो गई है.
चार शहरों में सिमट रही डिमांडदिल्ली-एनसीआर, बेंगलुरु, मुंबई और पुणे, ये चार शहर अब पूरे देश के रियल एस्टेट बाजार की धुरी बन चुके हैं. रिपोर्ट के मुताबिक, कुल हाउसिंग डिमांड का 77% हिस्सा इन्हीं शहरों में केंद्रित है. इन शहरों में बेहतर कनेक्टिविटी, रोजगार के मौके और आधुनिक इंफ्रास्ट्रक्चर खरीदारों को आकर्षित कर रहे हैं.
बिक्री के मामले में दिल्ली एनसीआर दूसरे नंबर परबिक्री के मामले में इस बार चेन्नई में 61% की बढ़त दर्ज की गई. वहीं, इसके बाद दिल्ली-एनसीआर में 30% और बेंगलुरु में 18% की तेजी रही. दूसरी ओर, पुणे में नए प्रोजेक्ट्स की कमी के चलते बिक्री में 14% की गिरावट आई है. 2026 की पहली तिमाही में प्रीमियम हाउसिंग सेगमेंट का बाजार में दबदबा कायम रहा.
अब आया दिलचस्प ट्रेंड, क्या मिडिल क्लास को मिलेगा घर? एक सबसे दिलचस्प ट्रेंड यह सामने आया है कि दिल्ली-एनसीआर सहित प्रमुख रियल एस्टेट के शहरों में जहां नई परियोजनाओं की लॉन्चिंग में 13% की बढ़ोतरी हुई है, वहीं बिक्री की रफ्तार 8% तक ही सीमित हो गई है. ऐसे में मार्केट में अभी भी बने फ्लैटों की संख्या ज्यादा है जबकि खरीदार 5 फीसदी कम हैं. ऐसे में सबसे बड़ा सवाल है कि क्या फ्लैटों की कीमतें कम होंगी और मिडिल क्लास को यह फायदा मिलेगा?
विशेषज्ञ कहते हैं कि यह संकेत देता है कि खरीदार अब जल्दबाजी में निर्णय नहीं ले रहा, बल्कि वह लोकेशन, कीमत, डेवलपर की विश्वसनीयता और भविष्य की वैल्यू को ध्यान में रखते हुए सोच-समझकर निवेश कर रहा है. 5 फीसदी से कीमतों में खास अंतर आने की संभावना नहीं दिख रही, लेकिन देखा जा रहा है कि मिडिल क्लास ने पिछले कुछ साल में अपनी खरीदने की क्षमता बढ़ाई है और करोड़ रुपये तक का फ्लैट वह खरीद रहे हैं.
कीमतों में उछाल ने बढ़ाई चुनौतीसप्लाई और डिमांड में अंतर के बावजूद एक ट्रेंड यह भी है कि टॉप 7 शहरों में प्रॉपर्टी की कीमतों में 20% तक की बढ़ोतरी दर्ज की गई है. निर्माण लागत, जमीन की कीमत और बेहतर सुविधाओं की बढ़ती मांग ने घरों को महंगा बना दिया है.यही कारण है कि डेवलपर्स अब प्रीमियम और लग्जरी सेगमेंट पर ज्यादा ध्यान दे रहे हैं, जहां मार्जिन भी बेहतर है और मांग भी मजबूत.
डेवलपर्स की नजर में बाजार का बदलता रुख
मिगसन ग्रुप के एमडी यश मिगलानी का कहना है कि बेहतर इंफ्रास्ट्रक्चर जैसे एक्सप्रेसवे, मेट्रो नेटवर्क और एयरपोर्ट कनेक्टिविटी ने रियल एस्टेट के नक्शे को पूरी तरह बदल दिया है. जिन इलाकों में पहले सीमित विकास था, वहां अब प्रीमियम प्रोजेक्ट्स तेजी से उभर रहे हैं. खरीदार अब बड़े घर, बेहतर सुविधाएं और अच्छी लोकेशन को प्राथमिकता दे रहा है, जिससे प्रीमियम सेगमेंट का दबदबा लगातार बढ़ रहा है.
एसकेए ग्रुप के डायरेक्टर संजय शर्मा का कहना है कि नोएडा और ग्रेटर नोएडा जैसे क्षेत्रों में इंफ्रास्ट्रक्चर का तेजी से विकास हुआ है,चाहे वह एक्सप्रेसवे हो, मेट्रो कनेक्टिविटी हो या कमर्शियल हब्स का विस्तार. इन फैक्टर्स ने प्रीमियम हाउसिंग की मांग को नई ऊंचाई दी है. आज का खरीदार अपने निवेश में लॉन्ग टर्म वैल्यू देखता है, इसलिए वह ऐसे प्रोजेक्ट्स को प्राथमिकता दे रहा है जो भविष्य में बेहतर रिटर्न और जीवनशैली दोनों दे सकें.
सिक्का ग्रुप के चेयरमैन हरविंदर सिंह सिक्का का कहना है कि किफायती हाउसिंग सेगमेंट में गिरावट चिंता का विषय है. बढ़ती लागत और सीमित जमीन के कारण इस सेगमेंट में प्रोजेक्ट्स लाना चुनौतीपूर्ण हो गया है. लेकिन बाजार का संतुलन बनाए रखने के लिए जरूरी है कि डेवलपर्स और सरकार मिलकर ऐसे मॉडल तैयार करें, जिससे मध्यम वर्ग के लिए भी घर खरीदना संभव बना रहे. आने वाले समय में टियर-2 और उभरते इलाकों में इस सेगमेंट के लिए बेहतर अवसर दिख सकते हैं.
अंसल हाउसिंग के डायरेक्टर कुशाग्र अंसल का कहना है कि मेट्रो शहरों में जमीन की कीमतें जिस तेजी से बढ़ी हैं, उसने प्रोजेक्ट की कुल लागत को काफी ऊपर पहुंचा दिया है. ऐसे में किफायती घर बनाना व्यावहारिक रूप से कठिन हो गया है. यही वजह है कि डेवलपर्स अब प्रीमियम और हाई-एंड प्रोजेक्ट्स की ओर शिफ्ट हो रहे हैं, जहां बेहतर सुविधाओं के साथ ग्राहकों को वैल्यू ऑफर की जा सकती है.
आम खरीदार के लिए क्या है रास्तारियल एस्टेट बाजार की यह तेजी जहां निवेशकों और हाई-एंड खरीदारों के लिए अवसर लेकर आई है, वहीं आम खरीदार के लिए चुनौतियां भी बढ़ा रही है.ऐसे में एक्सपर्ट्स मानते हैं कि उभरते क्षेत्रों, बेहतर कनेक्टिविटी वाले कॉरिडोर और मिड-सेगमेंट प्रोजेक्ट्स में अभी भी अच्छे मौके मौजूद हैं. कुल मिलाकर, बाजार अब एक नए दौर में प्रवेश कर चुका है,जहां सस्ता घर नहीं, बल्कि बेहतर और बड़ा घर ही नई मांग बन गया है. ऐसे में सही फैसला वही होगा, जो जरूरत, बजट और भविष्य की वैल्यू तीनों को संतुलित करे.



