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कहानी बाखासर के ठाकुर बलवंत सिंह की, वो जांबाज जिसने जोंगा गाड़ी में बैठकर पाकिस्तान के उड़ा दिए थे होश

Last Updated:December 12, 2025, 14:17 IST

Barmer News Hindi : 1971 के भारत-पाक युद्ध में बाखासर के कुख्यात डाकू बलवंत सिंह ने वह कारनामा कर दिखाया था, जिसे सुनकर आज भी थार का रेगिस्तान गर्व से सिर उठाता है. सेना के साथ मिलकर उन्होंने अपनी चतुराई और इलाके की गहरी समझ से पाकिस्तान की मजबूत टैंक रेजिमेंट को चकमा दिया और छोछरो चौकी सहित 100 गांवों पर कब्जा दिला दिया.

बाड़मेर : 1971 के भारत-पाक युद्ध में बाड़मेर के बाखासर के डाकू बलवंत सिंह दुश्मन फौज के लिए काल बन गया थे. थार के रेगिस्तान की हर पगडंडी से वाकिफ बलवंत सिंह के साथ मिलकर ब्रिगेडियर कर्नल भवानी सिंह ने युद्ध का पासा पलटा और छोछरो चौकी समेत पाक के 100 गांव भारत के कब्जे में ले लिए थे. राजस्थान के सरहदी रेगिस्तान में 1971 का भारत-पाक युद्ध सिर्फ सैनिकों की बहादुरी का ही नहीं बल्कि आम लोगों के असाधारण साहस का भी गवाह रहा है.

बाड़मेर के बाखासर इलाके में उस समय बॉर्डर की कमान बिग्रेडियर कर्नल भवानी सिंह के हाथ में थी. सामने पाकिस्तान की मजबूत टैंक रेजिमेंट थी मगर थार के रेगिस्तान में रास्ते खोजना और आगे बढ़ पाना आसान नहीं था. जब कर्नल भवानी सिंह को याद आया बाखासर का कुख्यात डकैत बलवंत सिंह. वह वही व्यक्ति था जिसका नाम सुनकर भारत और पाकिस्तान दोनों तरफ के 100 किलोमीटर के दायरे में खौफ पैदा हो जाता था.

बलवंत सिंह पाकिस्तान के रास्तों से थे वाकिफबलवंत सिंह सरहद के उस भूभाग से भली-भांति परिचित थे जिसे सैनिक नक्शों में भी नहीं ढूंढ पाते थे. पाकिस्तान के वह छोछरो तक आने-जाने के रास्तों को जानते थे. जैसे ही उसे सूचना मिली कि सेना उसकी मदद चाहती है तो बलवंत सिंह ने बिना देर किए हथियार उठाए और देश की रक्षा के लिए आगे बढ़ गए.

4 जोंगा जीपों के सहारे पाक सेना को चटाई थी धूलभारतीय सेना ने बलवंत सिंह को एक बटालियन और 4 जोंगा जीपें सौंपीं. इन सैनिकों के पास टैंक नहीं थे जबकि सामने पाकिस्तान की मजबूत टैंक रेजिमेंट तैनात थी. इसी समय बलवंत सिंह ने यहां अपनी चतुराई दिखाई और सेना की जोंगा जीपों के साइलेंसर निकलवा दिए ताकि उनकी आवाज दूर से सुनकर पाकिस्तानी सेना यह समझे कि भारतीय सेना टैंक लेकर आगे बढ़ रही है.

पाक के 100 गांवों पर कर लिया था कब्जारेगिस्तान की रातों में गूंजती यह आवाज इतनी प्रभावशाली थी कि पाकिस्तान की चौकियों में खलबली मच गई. पाक सेना को लगा कि भारतीय सेना की भारी टैंक रेजिमेंट उनके इलाके में प्रवेश कर चुकी है. इसी अफरा-तफरी का फायदा उठाते हुए बलवंत सिंह और भारतीय बटालियन ने तेजी से आगे बढ़कर पाक सैनिकों पर हमला बोल दिया. भारतीय सेना ने पाकिस्तान की छोछरो चौकी सहित आसपास के लगभग 100 गांव अपने कब्जे में ले लिए.

मारवाड़ के रॉबिनहुड कह लाए ठाकुर बलवंत सिंह बाखासर1971 के युद्ध में अदम्य साहस दिखाने पर डाकू बलवंत सिंह हीरो बन गए और राजस्थान सरकार ने बलवंत सिंह के खिलाफ दर्ज हत्या, लूट, डकैती के सारे मुकदमों को वापस ले लिया. बाड़मेर का बाखासर इलाका गुजरात के कच्छ भुज से सटा हुआ है ऐसे में बाड़मेर जैसलमेर और कच्च-भुज क्षेत्र में डाकू बलवंत सिंह की बहादुरी के चर्चे आज भी होते हैं. अब बलवंत सिंह की छवि यहां डाकू नहीं बल्कि रॉबिन हुड की है.

About the AuthorRupesh Kumar Jaiswal

रुपेश कुमार जायसवाल ने दिल्ली यूनिवर्सिटी के ज़ाकिर हुसैन कॉलेज से पॉलिटिकल साइंस और इंग्लिश में बीए किया है. टीवी और रेडियो जर्नलिज़्म में पोस्ट ग्रेजुएट भी हैं. फिलहाल नेटवर्क18 से जुड़े हैं. खाली समय में उन…और पढ़ें

Location :

Barmer,Rajasthan

First Published :

December 12, 2025, 14:04 IST

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1971 भारत-पाक युद्ध में बाखासर के बलवंत सिंह की बहादुरी की कहानी

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