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Success Story: ₹3,000 से शुरू हुआ सफर, आज सूई-धागे के दम पर 4 भाइयों ने लिखी कामयाबी की नई कहानी

Last Updated:July 04, 2026, 05:51 IST

Success Story: कोटा के गुमानपुरा में स्थित ‘जनता अल्टरेशन’ पिछले 45 सालों से कपड़ों की परफेक्ट फिटिंग के लिए पूरे शहर में मशहूर है. 3 कारीगरों और ₹3,000 की पगड़ी से शुरू हुए इस पुश्तैनी कारोबार को आज 4 भाई मिलकर संभाल रहे हैं और अब इसमें तीसरी पीढ़ी की भी एंट्री हो चुकी है. आज इस हुनर के दम पर 4 दुकानें संचालित हो रही हैं, जिससे न केवल इस परिवार का बल्कि 15 अन्य कारीगरों के परिवारों का भी भरण-पोषण हो रहा है. प्रतिदिन 100 से अधिक ग्राहकों का भरोसा ही इनकी सफलता की सबसे बड़ी कुंजी है.

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Success Story Kota: वह समय जब एक चद्दर के नीचे दुकान लगाई जाती थी लेकिन फैशन के इस बदलते दौर में जहाँ हर दिन नए ब्रांड्स बाजार में आ जाते हैं, वहीं राजस्थान के कोटा शहर में कपड़ों की फिटिंग यानी ‘अल्टरेशन’ का एक ऐसा ठिकाना भी है, जिसने खुद में एक बड़ा इतिहास समेट रखा है. कोटा के गुमानपुरा में स्थित ‘जनता अल्टरेशन’ आज किसी पहचान का मोहताज नहीं है. कपड़ों को परफेक्ट शेप देने वाले इस हुनर को चमकाते-चमकाते आज इस परिवार की तीसरी पीढ़ी भी दुकान पर कैंची और फीता थाम चुकी है. सूई-धागे के इस पुश्तैनी कारोबार ने सफलता की एक अनोखी इबारत लिखी है.

जनता अल्टरेशन के साबिर हुसैन ने बताया कि यह सफर आज से करीब 45 साल पहले उनके वालिद (पिता) साहब ने शुरू किया था. उस दौर में कोटा शहर के लोग ‘अल्टरेशन’ शब्द से पूरी तरह वाकिफ भी नहीं थे. लोगों के लिए अल्टरेशन का मतलब सिर्फ पैंट की लंबाई कम करना या ढीली ढाली सिलाई को ठीक कर देना भर था. फैशन की समझ और कपड़ों के सही नाप की बारीकियों को इस दुकान ने पूरे शहर को सिखाया. बुजुर्गों ने पहले भी कई तरह के व्यापार आजमाए थे, लेकिन बरकत इसी टेलरिंग लाइन में लिखी थी. शुरुआत बेहद मुश्किलों भरी थी. एक छोटी सी दुकान किराए पर ली गई और उस ज़माने में ₹3,000 की पगड़ी देकर इस काम की मजबूत बुनियाद रखी गई, जो आज एक मिसाल बन चुकी है.

चार भाइयों का मजबूत साथ और तीसरी पीढ़ी की शानदार एंट्रीवक्त बदला, कोटा शहर बदला और यह देश के सबसे बड़े कोचिंग हब के रूप में स्थापित हो गया, लेकिन जनता अल्टरेशन पर लोगों का भरोसा कभी नहीं बदला. परिवार के सबसे बड़े भाई शाकिर हुसैन हैं और उनसे छोटे भाई इकबाल हुसैन हैं. दोनों ने इस काम को दिन-रात एक करके सींचा. अब साबिर हुसैन और उनके छोटे भाई भी इसी विरासत को आगे लेकर साथ चल रहे हैं. इस कहानी का सबसे खूबसूरत मोड़ यह है कि अब इस दुकान में परिवार की तीसरी पीढ़ी की भी शानदार एंट्री हो चुकी है. साबिर हुसैन का भतीजा भी अब इस पुश्तैनी काम को और आधुनिक व बड़ा करने के लिए पूरी शिद्दत से जुट गया है.

3 कारीगरों से शुरू हुआ सफर, आज 15 परिवारों का सहारासाबिर हुसैन कहते हैं, “आज से 45 साल पहले जब काम शुरू हुआ था, तब हमारे पास सिर्फ 3 कारीगर हुआ करते थे. लेकिन आज हमारे पास 10 से ज्यादा पक्के कारीगर काम कर रहे हैं. इनमें से कुछ कारीगर तो ऐसे हैं जो पिछले 15 से 20 सालों से हमारे साथ एक परिवार की तरह जुड़े हुए हैं.” शुरुआत भले ही एक दुकान से हुई थी, लेकिन आज इनके पास 4 दुकानें हैं. जिनमें तीन दुकान किराए की है. ऊपर वाले के करम और मेहनत की बदौलत आज इस काम के जरिए केवल इस एक परिवार का ही नहीं, बल्कि दुकान में काम करने वाले 14 से 15 अन्य कारीगरों के परिवारों का भी पेट पल रहा है.

रोजाना 100 ग्राहक, ‘संतुष्टि’ ही सबसे बड़ी यूएसपीइस दुकान पर रोजाना औसतन 100 से ज्यादा ग्राहक अपने कपड़ों की फिटिंग दुरुस्त कराने आते हैं. साबिर हुसैन पुरानी यादों को ताजा करते हुए बताते हैं कि पहले के जमाने में भी इस काम से इतनी अच्छी कमाई हो जाती थी कि घर का खर्च आराम से चल जाए और आज भी मेहनत का पूरा फल मिल रहा है. ग्राहकों का अटूट विश्वास और उनके चेहरे की खुशी ही हमारी सबसे बड़ी यूएसपी है. 45 साल पहले बोया गया वो छोटा सा बीज आज एक ऐसा बरगद बन चुका है, जिसके सूई-धागे के मजबूत रिश्ते ने पूरे कोटा शहर को अपना मुरीद बना रखा है.

About the Authorvicky Rathore

Vicky Rathore (born July 25, 1994) is a multimedia journalist and digital content specialist currently working with Rajasthan. I have over 8 years of experience in digital media, where I specialize in cr…और पढ़ें

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