खूबसूरत देश, हर तरह की सुख सुविधा, फिर क्यों मुल्क छोड़ने के लिए मची भगदड़

खूबसूरत मुल्कों की बात की जाए तो न्यूजीलैंड का नाम भी आता है. बर्फ से ढके पहाड़, लॉर्ड ऑफ द रिंग्स वाली जादुई हरियाली, शांत समंदर और दुनिया का सबसे सुकून भरा जीवन… हम और आप वहां छुट्टियां बिताने या बसने के सपने देखते हैं. लेकिन जरा ठहरिए… धरती के इस स्वर्ग की जमीनी हकीकत कुछ और ही है. न्यूजीलैंड के अपने ही नागरिक धड़ाधड़ सूटकेस पैक कर रहे हैं और देश छोड़कर निकल रहे हैं. एक ही साल में 70,000 से ज्यादा लोगों ने इस जन्नत को ‘बाय-बाय’ कह दिया है. तो ऐसा क्या हुआ कि लोग इस खूबसूरत देश को छोड़कर जा रहे हैं.
न्यूजीलैंड की कुल आबादी करीब 50-51 लाख है. इसमें से अगर 71,000 लोग यानी यानी पूरी आबादी का 1.4% एक ही साल में देश छोड़ दें, तो सवाल तो उठेंगे. कोरोना से पहले भी लोग देश छोड़ रहे थे, लेकिन मुश्किल से साल में 3,000 लोग पलायन करते थे. वो एक नॉर्मल बात थी. लेकिन बीते 12 महीनों में 71,000 लोग निकल लिए और वापस सिर्फ 26,000 आए. मतलब, जाने वालों की लाइन लंबी है और आने वालों का काउंटर खाली पड़ा है.
जा कहां रहे हैं ये लोग?
ये लोग कोई अमेरिका, लंदन या यूरोप के सपने नहीं देख रहे. ये अपने पड़ोसी देश ऑस्ट्रेलिया पहुंच रहे हैं. आंकड़ों की मानें तो न्यूजीलैंड छोड़ने वाले 60% लोग सीधे ऑस्ट्रेलिया शिफ्ट हो रहे हैं. तस्मान सागर पार करके ऑस्ट्रेलिया में आज 7 लाख से ज्यादा न्यूजीलैंडवासी रह रहे हैं. वहां पहले से ही इनके रिश्तेदार, दोस्त और यार-प्यार मौजूद हैं, तो सेटल होने में कोई दिक्कत भी नहीं होती.
क्यों टूट रहा है न्यूजीलैंड का तिलिस्म?
न्यूजीलैंड से इस भगदड़ के पीछे कोई मनी और महंगाई की मार है. देश में बेरोजगारी दर 3.5% हो गई है, जो वहां के हिसाब से पिछले 10 साल में सबसे ज्यादा है. सरकारी नौकरियां कम हो रही हैं. 2025 में देश की जीडीपी ग्रोथ सिर्फ 1% के आसपास रेंग रही है. किराना, राशन और घर के किराए आसमान छू रहे हैं, लेकिन बॉस सैलरी बढ़ाने को तैयार नहीं है. दूसरी तरफ ऑस्ट्रेलिया है, जो दोनों हाथ खोलकर पैसा लुटा रहा है. वहां की इकॉनमी दौड़ रही है, बेरोजगारी कम है और सैलरी… न्यूजीलैंड के मुकाबले काफी ज्यादा है.
ऑस्ट्रेलिया में ऐसा क्या है जो न्यूजीलैंड में नहीं?
ऑस्ट्रेलिया सिर्फ सैलरी ही नहीं दे रहा, बल्कि वो वर्किंग कंडीशन भी दे रहा है जो न्यूजीलैंड में नहीं मिलतीं. जैसे ओवर-टाइम का पैसा, वीकेंड पर काम करने का एक्स्ट्रा बोनस और छुट्टियां. ऑस्ट्रेलिया में एक नर्स को साल का लगभग 60-62 हजार अमेरिकी डॉलर यानी लगभग 50 लाख रुपये का पैकेज मिल रहा है. यही वजह है कि पिछले साल 10,000 से ज्यादा न्यूजीलैंड की नर्सों ने ऑस्ट्रेलिया का टिकट कटा लिया.
न्यूजीलैंड के पुलिसवाले भी अब अपनी वर्दी ऑस्ट्रेलिया में पहनना चाह रहे हैं. पिछले दो-ढाई साल में 200 से ज्यादा पुलिसवालों ने नौकरी छोड़ दी. ऑस्ट्रेलिया उन्हें महीने के 75,000 डॉलर और रहने के लिए सस्ते घर का लालच दे रहा है. ऑस्ट्रेलिया में खदानों और रियल एस्टेट का काम जोरों पर है, और वहां स्किल्ड वर्कर्स की भारी डिमांड है.
कौन लोग जा रहे हैं?
पहले जो लड़के-लड़कियां कॉलेज की पढ़ाई पूरी करते थे, वो मजे-मजे में एक-दो साल के लिए विदेश घूमने या काम करने निकल जाते थे. इसे वहां ओवरसीज एक्सपीरियंस कहते थे. लेकिन अब 20 से 30 साल के वो अनुभवी प्रोफेशनल्स जा रहे हैं, जो मार्केट में अच्छा-खासा अनुभव रखते हैं. और सबसे बड़ी बात… इनका वापस लौटने का कोई इरादा नहीं है. हद तो तब हो गई जब वो विदेशी लोग, जो खुद अपना देश छोड़कर न्यूजीलैंड में बसने आए थे, वो भी अब बोरिया-बिस्तर बांधकर निकल रहे हैं.



