Jalore News: 800 साल पुराना मंदिर, फिर भी बालाजी के ऊपर नहीं बनी छत! जानिए पातालेश्वर हनुमानजी की रहस्यमयी कहानी

Last Updated:September 12, 2026, 12:21 IST
जालोर से करीब 10 किलोमीटर दूर कानीवाड़ा गांव में स्थित पातालेश्वर हनुमानजी मंदिर अपनी अनोखी मान्यताओं के लिए प्रसिद्ध है. करीब 800 साल पुराने इस मंदिर में विराजमान हनुमानजी को स्वयंभू माना जाता है. स्थानीय मान्यता है कि बालाजी धरती से स्वयं प्रकट हुए थे।. मंदिर की सबसे खास बात यह है कि आज तक हनुमानजी की प्रतिमा के ऊपर छत नहीं बन पाई है. श्रद्धालु इसे बालाजी का चमत्कार मानते हैं। मंगलवार और शनिवार को यहां बड़ी संख्या में भक्त दर्शन के लिए पहुंचते हैं.
जालोर. शहर से करीब 10 किलोमीटर दूर कानीवाड़ा गांव में पातालेश्वर हनुमानजी का प्राचीन मंदिर है. इस मंदिर की खासियत सिर्फ इसकी प्राचीनता नहीं, बल्कि यहां विराजमान हनुमानजी की प्रतिमा से जुड़ी मान्यता है. स्थानीय लोगों के अनुसार यहां हनुमानजी की प्रतिमा किसी व्यक्ति ने स्थापित नहीं की, बल्कि वे स्वयं धरती से प्रकट हुए थे. इसी वजह से इन्हें स्वयंभू और पातालेश्वर हनुमानजी के नाम से जाना जाता है. पुजारी हस्तिमल गर्ग ने लोकल18 को बताया कि हमारे पूर्वजों से यह मान्यता चली आ रही है कि पातालेश्वर हनुमानजी पाताल से प्रकट हुए हैं. हमारे पूर्वज पाताल में स्थित कुएं में हनुमानजी की पूजा करते थे, उसी समय की यह पूरी मान्यता बताई जाती है. जब हमारे पूर्वज मेवाड़ से मारवाड़ की तरफ आ रहे थे, तो उनके मित्र ने उन्हें हनुमानजी दिए. उन्होंने पूछा कि इन्हें लेकर कैसे जाऊंगा? तब कहा गया कि हनुमानजी आपके साथ जमीन के ऊपर भी चलेंगे और पाताल में भी आपके साथ रहेंगे.
मान्यता के अनुसार, जब वे कानीवाड़ा पहुंचे और रात में यहीं रुके, तो उनके साथ लाई गई वह वस्तु अचानक जमीन में समा गई. इसके बाद जब उस जगह पर खुदाई की गई तो वह वस्तु और नीचे जाती चली गई. पुजारी के अनुसार, तभी संकेत मिला कि यहां खुदाई नहीं करनी है, बल्कि हनुमानजी इसी स्थान पर प्रकट होंगे. जब यहां खुदाई की गई तो वह और अंदर जाने लगी. फिर कहा गया कि मुझे खोदो मत, मैं यहीं रहूंगा और यहीं प्रकट होऊंगा. इसके बाद यहां बालाजी स्वयंभू रूप में प्रकट हुए। इसी वजह से इन्हें पातालेश्वर हनुमानजी कहा जाता है.
मंदिर से जुड़ी सबसे खास बात इसकी छत को लेकर है, स्थानीय मान्यता के अनुसार यह मंदिर करीब 800 साल पुराना बताया जाता है, लेकिन आज भी हनुमानजी के ऊपर छत नहीं है. कहा जाता है कि कई बार यहां छत बनाने का प्रयास किया गया, लेकिन हर बार काम सफल नहीं हो सका. श्रद्धालु इसे भी पातालेश्वर हनुमानजी का चमत्कार मानते हैं. पुजारी ने बताया कि बालाजी के ऊपर छत नहीं है, कई बार छत बनाने की कोशिश हुई, लेकिन कोशिश सफल नहीं हुई। मान्यता है कि स्वयंभू बालाजी बंधन में नहीं रहते, इसलिए आज भी इनके ऊपर खुला आसमान है. मंगलवार और शनिवार को मंदिर में विशेष आस्था देखने को मिलती है. इन दिनों बड़ी संख्या में श्रद्धालु दर्शन के लिए पहुंचते हैं और कई भक्त पैदल यात्रा करके भी यहां आते हैं. मंगलवार और शनिवार को पातालेश्वर हनुमानजी का विशेष श्रृंगार किया जाता है.
About the Authorमोनाली पाल
नमस्ते मेरा नाम मोनाली है, पेशे से पत्रकार हूं, ख़बरें लिखने का काम है. लेकिन कैमरे पर समाचार पढ़ना बेहद पसंद है. 2016 में पत्रकारिता में मास्टर्स करने के बाद पांच साल कैमरे पर न्यूज़ पढ़ने के साथ डेस्क पर खबरे…
और पढ़ेंLocation :
Jalor,Rajasthan
First Published :
September 12, 2026, 12:21 IST



