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बैक-नेक पेन पर सर्जरी नहीं समाधान! 80% मरीज बिना ऑपरेशन ठीक – जोधपुर के डॉ. हरीश का बड़ा दावा

जोधपुर : अक्सर बैक और नेक पेन के मरीजों को लगता है कि इलाज का मतलब सर्जरी ही है… लेकिन आपको जानकर हैरानी होगी कि करीब 80% मामलों में बिना ऑपरेशन भी पूरी राहत मिल सकती है सही जांच, समय पर थेरेपी और लाइफस्टाइल में छोटे बदलाव – इनसे मरीज बड़ी सर्जरी से बच सकते हैं. तो क्या हर दर्द के लिए सर्जरी जरूरी है? आज हम इसी सच्चाई को समझेंगे जोधपुर के काइरोप्रैक्टिक और फिजियोथैरेपी डॉक्टर हरीश से..

आजकल लोगों में एक धारणा तेजी से फैलती जा रही है कि कमर दर्द, गर्दन दर्द या रीढ़ से जुड़ी ज्यादातर समस्याओं का समाधान सिर्फ सर्जरी ही है. लेकिन डॉक्टर हरीश का कहना है कि यह गलत है. 80% मामलों में जो बैक पेन या नेक पेन होता है, वह मैकेनिकल पेन होता है, जिसे बिना ऑपरेशन और बिना दवाइयों के भी ठीक किया जा सकता है. वहीं बताया कि कैसे गलत बैठने की आदतें, ज्यादा देर कंप्यूटर पर काम करना, लंबी ड्राइविंग या गलत पोस्चर हमारे स्पाइन पर असर डालते हैं और दर्द की वजह बनते हैं

स्पाइन का अलाइनमेंट बिगड़ा तो पूरे शरीर पर असर, दर्द से लेकर पाचन तक होता प्रभावितडॉ हरीश  बताते हैं कि हमारी रीढ़ की हड्डी यानी स्पाइन पूरे शरीर का संतुलन बनाकर रखती है और इसी स्पाइन से निकलने वाली नसें ब्रेन के सिग्नल्स को पूरे शरीर तक पहुंचाती हैं. ऐसे में यदि वर्टेब्रा अपनी जगह से थोड़ा भी खिसक जाए या अलाइनमेंट बिगड़ जाए तो दर्द, कमजोरी या सुन्नपन जैसी समस्याएं शुरू हो जाती हैं. यही कारण हैं कि कई बार पेट की समस्या, गैस, भारीपन या पाचन से जुड़ी दिक्कतें भी स्पाइन की गड़बड़ी से जुड़ी हो सकती हैं. विशेषज्ञों के अनुसार यदि दर्द बैठने, उठने, झुकने, वजन उठाने या लंबे समय तक बैठने के बाद महसूस होता है, तो यह मैकेनिकल पेन की श्रेणी में आता है और ऐसे मामलों में सर्जरी की बिल्कुल जरूरत नहीं पड़ती.

सर्जरी कब जरूरी? विशेषज्ञों ने बताए गंभीर लक्षणडॉक्टर्स का कहना है कि सर्जरी तभी जरूरी होती है जब मरीज को पैरों में लगातार झनझनाहट हो, ब्लैडर या बाउल कंट्रोल यानी पेशाब–पाखाने पर नियंत्रण खत्म होने लगे, रीढ़ में कोई गांठ या सूजन हो, या रात में दर्द की वजह से नींद न आए. इन लक्षणों में जांच करवाना अनिवार्य है. लेकिन ज्यादातर मामलों में ऐसी गंभीर स्थिति नहीं होती. फिजियोथैरेपी डॉक्टर हरीश बताते हैं कि जो नस दब जाती है, उसे खोलने का काम किसी भी दवाई से नहीं हो सकता. इसे केवल मैकेनिकल तरीके से ही ठीक किया जा सकता है, जिसे काइरोप्रैक्टिक थेरेपी के जरिए आराम से किया जाता है. काइरोप्रैक्टर वर्टेब्रा का अलाइनमेंट सही करते हैं, जिसकी वजह से दबे हुए नर्व चैनल खुल जाते हैं और दर्द तुरंत कम होने लगता है.

लंबे समय से कमर-गर्दन दर्द? काइरोप्रैक्टिक दे सकता है तुरंत आराम डॉ हरीश 18 से 19 साल के अनुभव रखने वाले जोधपुर के काइरोप्रैक्टर ओर फिजियोथैरेपी डॉ हरीश बताते हैं कि यह प्रक्रिया पूरी तरह सुरक्षित है. यह उतनी ही सुरक्षित है जितना सड़क पर गाड़ी चलाना अगर ड्राइवर स्किलफुल हो तो दुर्घटना की संभावना नहीं के बराबर रहती है. उनका कहना है कि जिन लोगों को लंबे समय से कमर दर्द, गर्दन दर्द, बैठने-दौड़ने में दिक्कत या सुबह उठने पर दर्द जैसा महसूस होता है, उन्हें काइरोप्रैक्टिक थेरेपी से तुरंत राहत मिल सकती है. कई मरीज ऐसे आते हैं जो चल भी नहीं पाते, लेकिन थेरेपी के बाद उन्हें काफी राहत मिलती है और उनकी स्थिति सामान्य हो जाती है.

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