सहारनपुर में बढ़ रहा सिंदूर की खेती का रकबा, एक बार लगा के किसान 20 साल तक करें कमाई, जाने

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सहारनपुर में बढ़ रहा सिंदूर की खेती का रकबा, एक बार लगाएं, 20 साल करें कमाई
Last Updated:May 01, 2026, 14:14 IST
सिंदूर की खेती अन्य खेती से किसान को दो से तीन गुना अधिक मुनाफा देती है, जबकि इस खेती में किसी भी प्रकार के खाद और रसायन की आवश्यकता नहीं पड़ती. सिंदूर की खेती के साथ-साथ उसी खेत से सहफसली के रूप में किसान अन्य फसलों की पैदावार भी ले सकता है. सिंदूर की खेती करने वाले सुधीर कुमार सहारनपुर के पहले किसान है. सुधीर कुमार मार्केट में बिकने वाले सिंथेटिक सिंदूर से लोगों को बचाने के लिए और नेचुरल सिंदूर को लोगों तक पहुंचाने के लिए सिंदूर की खेती कर रहे हैं.
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सहारनपुरः किसान परंपरागत खेती से हटकर कुछ अलग प्रकार की खेती करना काफी पसंद करते हैं. बेहट विधानसभा के छोटे से गांव खुशहालीपुर के रहने वाले सुधीर कुमार ऑर्गेनिक खेती करने के लिए जाने जाते हैं. जिनके द्वारा लगभग 4 साल पहले सिंदूर की खेती को लेकर एक ट्रायल किया गया था जो कि पूरे तरीके से सफल रहा. आज सुधीर कुमार ने परंपरागत खेती से हटकर सिंदूर की खेती को बढ़ावा देते हुए अपने खेत में लगभग 100 से अधिक पौधे रोपित किए हैं. जबकि सहारनपुर में सिंदूर की खेती के लिए मौसम अनुकूल रहता है.
अन्य खेती की तुलना में फायदे का है बिजनेस
सिंदूर की खेती अन्य खेती से किसान को दो से तीन गुना अधिक मुनाफा देती है, जबकि इस खेती में किसी भी प्रकार के खाद और रसायन की आवश्यकता नहीं पड़ती. सिंदूर की खेती के साथ-साथ उसी खेत से सहफसली के रूप में किसान अन्य फसलों की पैदावार भी ले सकता है. सिंदूर की खेती करने वाले सुधीर कुमार सहारनपुर के पहले किसान है. सुधीर कुमार मार्केट में बिकने वाले सिंथेटिक सिंदूर से लोगों को बचाने के लिए और नेचुरल सिंदूर को लोगों तक पहुंचाने के लिए सिंदूर की खेती कर रहे हैं. सिंदूर की खेती में एक पेड़ से लगभग 2 किलो सिंदूर प्राप्त होगा जो की ₹10000 कीमत पर बिकेगा जबकि 100 पेड़ से प्रत्येक वर्ष बिना लागत लगाएं लाखों रुपए सुधीर कुमार आसानी से कमा सकेंगे.
चार साल पहले दो पेड़ से की थी शुरूआत
किसान सुधीर कुमार सैनी ने लोकल 18 से बात करते हुए बताया कि हम लोगों ने 4 साल पहले एक दो पेड़ सिंदूर के अपने यहां खेत में लगाया था. एक पेड़ शुरुआत में लगाया फिर धीरे-धीरे बढ़ता गया और आज हमारे इस संस्थान के अंदर सैकड़ो पेड़ हो गए हैं. हम इसको बड़ी तेजी के साथ बढ़ा रहे हैं, क्योंकि जो ओरिजिनल प्राकृतिक सिंदूर है उसकी बड़ी मांग है. हम चाहते हैं कि सब लोगों को हम इसको उपलब्ध करवाने में सहयोग करेंगे.
प्राकृतिक सिंदूर मार्केट में है नहीं, सभी सिंथेटिक इस्तेमाल कर रहे हैं. पेड़ से इसको हम अगर 1 किलो सिंदूर हम बना लेते हैं तो उसकी कीमत कम से कम 5000 होगी. इसको किलो के भाव में तो कोई देंगे नहीं तो हम इसको छोटे-छोटे पैक माताओं, बहनों के लिए जहां हमारे सिंदूर पूजा में और उनके श्रृंगार के लिए इस्तेमाल होता है. उसके लिए हम इसको छोटी पैकिंग में लेकर के आएंगे.
मिलावटी सिंदूर करता है नुकसान
सिंदूर को अगर देखे तो मरकरी, कांच जैसी चीजों से मिला करके बनाया जाता है, जो पूर्णतया सिंथेटिक है. यह सिंथेटिक होने के नाते हमारे बॉडी के ऊपर बड़े नुकसान पहुंचाता है. वह नुकसान सबसे पहले हमारी त्वचा को होता है और प्राकृतिक सिंदूर की अगर बात करें तो यह प्राकृतिक सिंदूर हमें त्वचा से लेकर सभी चीजों में अच्छा फायदा करेगा और किसी प्रकार की हानि होने का तो सवाल ही नहीं होता. लेकिन जैसे-जैसे पेड़ अपना विस्तार करेगा तो एक पेड़ से हमें 2 से 3 किलो तक सिंदूर मिलाने की पूर्ण आशा है. हमारे पास अभी 100 के करीब सिंदूर के पेड़ हो गए हैं.
अन्य किसानों को भी पूरा विश्वास होने लगा है कि जब यह कर सकते तो हम क्यों नहीं और अच्छा मुनाफा सबको चाहिए और किसानों को तो अपनी आय बढ़ाने के लिए इससे अच्छा कोई साधन हो नहीं सकता. सिंदूर का पेड़ एक तरह का जैसे हमारे जंगली पेड़ होते हैं इस तरह से होता है और इसमें किसी प्रकार का कोई स्प्रे या किसी प्रकार का कीटनाशी या फिर उर्वरक शक्ति अगर जमीन के अंदर है तो इसको पानी के अलावा दूसरा कोई खाद आदि देने की आवश्यकता नहीं पड़ती है.
About the AuthorRajneesh Kumar Yadav
मैं रजनीश कुमार यादव, 2019 से पत्रकारिता से जुड़ा हूं. तीन वर्ष अमर उजाला में बतौर सिटी रिपोर्टर काम किया. तीन वर्षों से न्यूज18 डिजिटल (लोकल18) से जुड़ा हूं. ढाई वर्षों तक लोकल18 का रिपोर्टर रहा. महाकुंभ 2025 …और पढ़ें
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