समुद्र में दफन था इतिहास का सबसे बड़ा खजाना! जिब्राल्टर की खाड़ी में मिला 134 जहाजों का ‘कब्रिस्तान’

नई दिल्ली: स्पेन के आर्कियोलॉजिस्ट्स की नई खोज ने इतिहास के पन्नों को दोबारा पलटने पर मजबूर कर दिया है. अल्जेसिरस के बंदरगाह और रॉक ऑफ जिब्राल्टर के बीच फैली खाड़ी में प्राचीन जहाजों का एक विशाल जखीरा मिला है. इस प्रोजेक्ट के दौरान रिसर्चर्स ने 5वीं सदी ईसा पूर्व से लेकर दूसरे विश्व युद्ध तक के 30 से ज्यादा जहाजों के मलबे का दस्तावेजीकरण किया है. जिब्राल्टर जलडमरूमध्य यानी स्ट्रेट ऑफ जिब्राल्टर हमेशा से यूरोप और अफ्रीका के बीच एक अहम कड़ी रहा है. हजारों सालों से इस रास्ते ने फोनीशियन और रोमन जहाजों से लेकर ब्रिटिश और डच जहाजों तक को अपनी लहरों में समाया है. यूनिवर्सिटी ऑफ काडिज के नेतृत्व में चले इस तीन साल के प्रोजेक्ट ने अब तक कुल 151 ऐतिहासिक स्थलों की पहचान की है. इनमें 134 ऐसे स्थान हैं जहां जहाज डूबे हुए हैं. यह खोज केवल लकड़ी और लोहे के मलबे की नहीं है, बल्कि यह व्यापार, युद्ध और खोज की उन कहानियों का सबूत है जो सदियों से समुद्र के नीचे दफन थीं.
क्या है प्रोजेक्ट हेराक्लेस और इसमें क्या खास मिला है?
यूनिवर्सिटी ऑफ काडिज के प्रोफेसर फेलिप सेरेजो एंड्रेओ इस पूरी रिसर्च का नेतृत्व कर रहे हैं. उन्होंने इस मिशन को ‘प्रोजेक्ट हेराक्लेस‘ नाम दिया है. उनकी टीम ने अब तक 34 जहाजों के मलबे का बारीकी से अध्ययन किया है. इसमें सबसे पुराना जहाज पुणिक काल का है, जो लगभग 5वीं सदी ईसा पूर्व का बताया जा रहा है. इसके अलावा टीम को 23 रोमन जहाज, दो देर से रोमन काल के जहाज और चार मध्यकालीन जहाज भी मिले हैं. आधुनिक काल के भी 24 जहाज इस लिस्ट में शामिल हैं.
इन खोजों में केवल जहाज ही नहीं, बल्कि 1930 के दशक के एक विमान का इंजन और प्रोपेलर भी मिला है. यह इलाका हमेशा से एक ‘बॉटलनेक’ रहा है, जहां से हर जहाज को गुजरना ही पड़ता था. चाहे वह व्यापारिक मार्ग हो या युद्ध का मैदान, जिब्राल्टर की खाड़ी ने हर दौर को देखा है. यहां अलग-अलग संस्कृतियों और देशों के जहाजों का मिलना इस जगह की रणनीतिक अहमियत को दर्शाता है.
17वीं सदी के स्पेनिश जहाज ‘पुएंते मायोर्गा II’ के मलबे की जांच करते पुरातत्वविद. (तस्वीर: अलेजांद्रो मान्यास)
क्या मध्यकालीन जहाजों से खुलेंगे इस्लामिक शासन के राज?
प्रोफेसर सेरेजो और उनकी टीम के लिए सबसे रोमांचक खोज तीन मध्यकालीन जहाज हैं. ये जहाज उस दौर के हैं जब दक्षिणी स्पेन में इस्लामिक शासन का आखिरी समय चल रहा था. इन जहाजों के जरिए उस समय की समुद्री यात्राओं और तकनीक के बारे में नई जानकारी मिलने की उम्मीद है. रिसर्चर्स का मानना है कि ये मलबे हमें उस समय के समाज और उनके समंदर से जुड़ाव को समझने में मदद करेंगे.
आमतौर पर म्यूजियम में रखी वस्तुओं से हमें इतिहास का एक छोटा हिस्सा पता चलता है. लेकिन जब हम इन जहाजों को उनके मूल स्थान पर देखते हैं, तो पूरी कहानी ज्यादा साफ नजर आती है. यह खोज बताती है कि कैसे समुद्री समाज ने सदियों तक इन लहरों पर अपना जीवन बिताया था.
स्पेनिश गनबोट और ‘जासूसी किताब’ का क्या है पूरा मामला?
इस प्रोजेक्ट के दौरान 18वीं सदी की एक छोटी स्पेनिश गनबोट ‘पुएंते मेयोर्गा IV’ का मलबा भी मिला है. यह गनबोट उस समय ब्रिटिश जहाजों पर अचानक हमला करने के लिए जानी जाती थी.
ये नावें अक्सर खुद को मछली पकड़ने वाली नावों के रूप में छिपा लेती थीं और फिर अचानक हमला कर देती थीं. खुदाई के दौरान प्रोफेसर सेरेजो को एक लकड़ी का डिब्बा मिला जो दिखने में बिल्कुल किताब जैसा था.
18वीं सदी की स्पेनिश गनबोट ‘पुएंते मायोर्गा IV’ के मलबे में मिला किताब के आकार का एक बक्सा. (तस्वीर: फेलिपे सेरेज़ो आंद्रेओ)
शुरुआत में टीम को लगा कि यह कोई जासूसी से जुड़ा दस्तावेज हो सकता है. उन्हें लगा कि शायद कोई ऑफिसर इसमें दुश्मन के जहाजों के नक्शे छिपाकर ले जा रहा था.
हालांकि जब इसे सावधानी से खोला गया, तो अंदर से लकड़ी की कंघियां निकलीं. इससे पता चला कि युद्ध के बीच भी वह ऑफिसर अपनी ग्रूमिंग को लेकर काफी फिक्रमंद था.
क्यों खतरे में है यह कीमती ऐतिहासिक समुद्री खजाना?
इतनी बड़ी खोज के बाद अब वैज्ञानिकों के सामने सबसे बड़ी चुनौती इसे बचाने की है. पोर्ट डेवलपमेंट, ड्रेजिंग और डॉक निर्माण जैसी गतिविधियों से इन ऐतिहासिक स्थलों को भारी नुकसान पहुंच रहा है.
क्लाइमेट चेंज भी एक बड़ा खतरा बनकर उभरा है. समुद्र का बढ़ता जलस्तर मिट्टी की परतों को बदल रहा है, जिससे ये प्राचीन अवशेष खुले में आ रहे हैं.
इसके साथ ही एक खास तरह की समुद्री शैवाल यानी इनवेसिव एल्गी भी इन मलबों पर तेजी से फैल रही है. प्रोफेसर सेरेजो ने स्पेन की सरकार से इन साइट्स को सुरक्षित घोषित करने की अपील की है.
अगर समय रहते इन्हें संरक्षित नहीं किया गया, तो इतिहास के ये कीमती पन्ने हमेशा के लिए मिट सकते हैं.
कैसे आम लोग देख सकते हैं समुद्र के नीचे का यह नजारा?
इन खोजों को आम लोगों तक पहुंचाने के लिए रिसर्चर्स ने नई तकनीक का सहारा लिया है. टीम ने इन साइट्स के वर्चुअल मॉडल और 360-डिग्री वीडियो तैयार किए हैं. इन्हें ऑनलाइन और स्थानीय म्यूजियम में देखा जा सकता है.
प्रोफेसर सेरेजो का कहना है कि वे लोगों को वीआर गॉगल्स के जरिए ‘ड्रायलैंड डाइविंग’ का अनुभव कराते हैं. हालांकि समुद्र के नीचे ये जहाज किसी फिल्म की तरह चमकते हुए नहीं दिखते, लेकिन उनकी ऐतिहासिक वैल्यू बहुत ज्यादा है.
लोगों को यह दिखाना जरूरी है कि पानी के नीचे क्या हो रहा है ताकि वे इनके संरक्षण की मांग कर सकें. यह छोटा सा समुद्री इलाका पूरे आइबेरियन प्रायद्वीप और उत्तरी अफ्रीका के समुद्री इतिहास के विकास को समझने का एक शानदार जरिया है.
क्या इन जहाजों से व्यापारिक रूट की नई जानकारी मिलेगी?
जिब्राल्टर की खाड़ी में मिले ये जहाज साबित करते हैं कि यह मार्ग सदियों से ग्लोबल ट्रेड का केंद्र रहा है. यहां डच, वेनेशियन, स्पेनिश और इंग्लिश जहाजों का मिलना बताता है कि दुनिया की हर बड़ी ताकत इस रास्ते का इस्तेमाल करती थी.
अटलांटिक महासागर से भूमध्य सागर में प्रवेश करने के लिए यह सबसे मुख्य रास्ता था. इन जहाजों के मलबे से मिलने वाली चीजें उस समय की अर्थव्यवस्था और व्यापारिक वस्तुओं के बारे में भी जानकारी देती हैं.
रिसर्चर्स को उम्मीद है कि आने वाले समय में और भी कई बड़े खुलासे हो सकते हैं. फिलहाल टीम इन सभी 134 जहाजों का पूरा डेटाबेस तैयार करने में जुटी है ताकि आने वाली पीढ़ियां इस समुद्री विरासत को जान सकें.



